गुस्सा – खुशी

राजन इतना गुस्सा अच्छी बात नहीं है ये सब बर्बाद कर देगा समझो जरा।क्या समझू वो सतीश अपनी पत्नी को छोड़ तुम्हारी प्लेट में खाना क्यों लगा रहा था।सतीश मेरी प्लेट में खाना नहीं लगा रहा था वो माधवी के लिए ही ले जा रहा था उसके हाथ में बोल था इसलिए मैने उनकी प्लेट … Read more

वो आंसू खुशी के थे

रघुनाथ जी मुस्कुराए, पर उस मुस्कान में एक अजीब सा दर्द था। उन्होंने बहुत ही धीमी लेकिन चुभने वाली आवाज में पूछा, “और… इंसानियत? आत्मीयता? क्या ये मशीन वो भी मंगवा सकती है? क्या ये बता सकती है कि तेरी मां जब रसोई में अकेले काम करती है, तो उसके दिल में अपने बेटे से … Read more

वफ़ादार

अंदर का नजारा देखकर रोहन के होश उड़ गए। ब्रूनो तुरंत रोहन के पैंट को अपने मुंह से पकड़कर उसे बेडरूम की तरफ खींचने लगा। रोहन दौड़ा-दौड़ा बेडरूम में गया, तो देखा कि सुमित्रा जी फर्श पर बेसुध पड़ी थीं। शायद वे बाथरूम से लौटते वक्त फिसल कर गिर गई थीं। उनका पूरा शरीर बुखार … Read more

गुस्सा एक दिन सब बर्बाद कर देगा – अनिता शर्मा

बेटी – माँ! जब मैं गुस्से में होती हूँ तब मेरे मुँह से बुरे शब्द जल्दी क्यों निकलने लग जाते हैं? और फिर मुझसे कोई बात भी करना पसंद नहीं करता। सब मुझसे दूरी बना लेते हैं। माँ – हाँ बेटी! क्योंकि गुस्सा हमारी भावनाओं पर हावी हो जाता है। गुस्सा भावनाओं का एक मजबूत … Read more

“गुस्सा एक दिन सब खत्म कर देता है” – रेणु सिंह राधे

आज माँ की बरसी है पूरा एक साल बीत गया  ऐसा लग रहा है कल ही तो माँ मेरे साथ थी वो मुझ से बाते कर रही थी  कभी कभी मेरी किसी बात पर डांट भी देती थी समझा रही थी  इतना गुस्सा नहीं करते बिट्टो, देख पति पत्नि का रिश्ता काँच की तरह नाजुक … Read more

गुस्सा एक दिन सब बर्बाद कर देगा – सुदर्शन सचदेवा

“तुमसे एक छोटी-सी बात भी ठीक से नहीं हो सकती!” अजय की तेज आवाज सुनकर पूरा घर सहम गया। रसोई में खड़ी उसकी पत्नी नेहा के हाथ रुक गए। कमरे में बैठी सास ने अखबार नीचे रख दिया और दोनों बच्चे चुपचाप एक-दूसरे का चेहरा देखने लगे। बात सिर्फ इतनी थी कि नेहा से अजय … Read more

काँच के रिश्ते

“अंजलि, जो तुमने नीचे देखा, वो बहुत दुखद था, लेकिन तुम्हें एक बात समझनी होगी। जब दो अलग-अलग इंसान, जिनकी सोच अलग है, परवरिश अलग है, एक ही छत के नीचे पूरी जिंदगी बिताने का फैसला करते हैं, तो उनके बीच वैचारिक मतभेद होना एक बेहद स्वाभाविक सी बात है। जहां गहरा प्यार होता है, … Read more

निस्वार्थ भावना

मुझे उस पांच सौ के नोट को देखकर हंसी आ गई। मैंने मन ही मन सोचा, ‘माँ भी किस दुनिया में जी रही हैं। आजकल इतने पैसों में तो बड़े अस्पतालों के पार्किंग और पर्चे का खर्च भी पूरा नहीं होता।’ कार में बैठते ही दादा जी, जो पीछे की सीट पर दर्द से कराह … Read more

ममता की छाँव

विदाई की शहनाइयाँ बज रही थीं। मीरा की बुआ ने उसके कान में फुसफुसाते हुए कहा था, “तू तो बहुत किस्मत वाली है री मीरा। ससुराल में कोई सास-ससुर का झंझट नहीं। सास तो है नहीं, बस ससुर जी हैं, वो क्या ही कहेंगे। अब तो पूरे घर की मालकिन तू ही है। आराम से … Read more

बस बहुत हो गया – डॉ आभा माहेश्वरी

सुबह के छह बजे थे। अलार्म बजने से पहले ही सीमा की आँख खुल गई। वह रोज़ की तरह जल्दी-जल्दी उठी, रसोई में गई, चाय बनाई, बच्चों का टिफ़िन तैयार किया और पति राजेश के लिए नाश्ता बनाने लगी। घर के सारे काम निपटाते-निपटाते उसे खुद नाश्ता करने का भी समय नहीं मिलता था। राजेश … Read more

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