गुस्सा एक दिन सब बर्बाद कर देगा – विनीता सिंह

रवि एक होनहार, मेहनती और समझदार लड़का था। वह पढ़ाई में हमेशा अच्छे अंक लाता था और अपने माता-पिता तथा शिक्षकों का प्रिय छात्र था। उसके बहुत से दोस्त भी थे, जो उसकी ईमानदारी और मदद करने की आदत की सराहना करते थे।  लेकिन उसकी एक बहुत बड़ी कमजोरी थी—उसे छोटी-छोटी बातों पर बहुत जल्दी … Read more

*गुस्सा एक दिन सब बर्बाद कर देगा* – तोषिका

मैने उसको इतनी बार समझाया है कि इतना गुस्सा नहीं करते है, और इसका यही *गुस्सा एक दिन सब बर्बाद कर देगा*। परेशान स्वर में रानी अपने आप से बोली। आखिर रानी परेशान ना हो तो क्या करे, जैसे जैसे उनका बेटा रवि बड़ा हो रहा था उसका गुस्सा उतना ही बढ़ता जा रहा था … Read more

सिसकते रिश्ते

“पापा! ओ पापा! जल्दी चलिए, दादी बाथरूम में गिर गई हैं। उनके घुटने से बहुत खून बह रहा है और वह दर्द से तड़प रही हैं।” दस साल का रोहन हांफते हुए अपने माता-पिता के बेडरूम के दरवाजे पर खड़ा था। उसकी आंखों में डर और चेहरे पर घबराहट साफ झलक रही थी। विशाल और … Read more

गुरू दक्षिणा – डॉ बीना कुण्डलिया

अरे बहु देखना जरा जाकर कामिनी आ गई लगता है,बाहर गाड़ी रूकने की आवाज आई उत्साहित ममता जी ने बहु नंदनी को आवाज लगाई। फिर खुद से ही बड़बड़ाई ये बेटियां भी फंक्शन त्यौहारों में जब तक घर में न आ जाये आँगन में रौनक ही नहीं आती ।  कामिनी रसोईघर में व्यस्त सभी काम … Read more

असली चरित्र

ट्रेन के पहियों की एक लयबद्ध खट-खट और खिड़की से पीछे छूटते हुए पेड़ों के दृश्य मुझे हमेशा सुकून देते थे, लेकिन आज यह सफर मुझे अंदर ही अंदर एक अजीब सी बेचैनी दे रहा था। मेरे सामने वाली सीट पर मेरी पत्नी, सुमेधा बैठी थी, और उसकी त्योरियां इस बात का सुबूत थीं कि … Read more

यादगार यात्रा

गोमती एक्सप्रेस आज अपने तय समय से चार घंटे की देरी से चल रही थी। कादंबरी खिड़की से माथा टिकाए बाहर के धुंधले नज़ारों को देख रही थी। ज़िंदगी भी तो इसी बारिश के धुंधले शीशे जैसी हो गई थी, जहाँ बाहर बहुत कुछ था मगर अंदर से सब धुंधला ही नज़र आता था। घर … Read more

तीसरा हिस्सा

शहर के सबसे पॉश इलाके में बना ‘आशीर्वाद’ भवन बाहर से जितना आलीशान और शांत दिखता था, अंदर से उसमें उतनी ही अशांति और कलह मची रहती थी। सेठ रामनारायण जी के देहांत को अभी मुश्किल से दो साल ही बीते थे, लेकिन इस छोटे से अंतराल में ही उस घर की पूरी तस्वीर बदल … Read more

रिश्तों के आसमान

दोपहर की चिलचिलाती धूप में रसोई का काम समेटते हुए कविता के हाथ अचानक ठिठक गए। फोन की स्क्रीन पर स्कूल की प्रिंसिपल का नंबर चमक रहा था। फोन उठाते ही दूसरी तरफ से आई घबराई हुई आवाज ने कविता के पैरों तले से जमीन खिसका दी। “कविता जी, तुरंत सिटी अस्पताल पहुँचिए, आपकी बेटी … Read more

सच्चा दांपत्य जीवन

शाम के करीब चार बज रहे थे। गुलमोहर एन्क्लेव के सेंट्रल पार्क में सुहागिन महिलाओं की चहल-पहल शुरू हो चुकी थी। लाल और गुलाबी जोड़ों में सजी धजी महिलाएं करवा चौथ की कथा सुनने के लिए इकट्ठा हो रही थीं। इसी सोसाइटी में पिछले महीने ही शिफ्ट हुई राधिका भी अपनी पूजा की थाली लिए … Read more

शान

“नसीब आपने लिखा था उसका, भगवान नहीं!” श्रुति ने भी उसी तेज़ आवाज़ में जवाब दिया। “लेकिन मैं अपना नसीब आपको नहीं लिखने दूंगी। मैं आज अपना इंटरव्यू देकर आ रही हूँ। मुझे नौकरी मिल गई है। कल से मैं अपनी ज़िंदगी अपने हिसाब से जिऊंगी। अगर इस घर में मुझे मेरी शर्तों पर, एक … Read more

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