साझी उड़ान
“अनन्या, मुझे माफ़ कर दो,” राघव की आवाज़ थोड़ी भारी थी। “उस दिन जब मैंने कहा था कि तुम गृहस्थी संभालो और मुझे पढ़ने-लिखने दो, तब मैं एक बहुत बड़े मुगालते में जी रहा था। मुझे लगता था कि पैसा कमाकर और सुख-साधन जुटाकर मैंने अपना फर्ज़ पूरा कर दिया। लेकिन पिछले कुछ दिनों में … Read more