परिवार के प्रति जिम्मेदारी

रोहन जैसे ही दफ्तर से थका-हारा घर लौटा, उसने देखा कि कमरे की लाइटें बंद हैं। उसने स्विच ऑन किया तो उसकी नजर सोफे के एक कोने में सिकुड़ कर बैठी अपनी पत्नी सौम्या पर पड़ी। सौम्या का चेहरा आँसुओं से भीगा हुआ था, आँखें रो-रोकर लाल हो चुकी थीं और उसके होंठ अभी भी … Read more

संस्कार कभी व्यर्थ नहीं जाते – निमिषा गोस्वामी

“सुहानी… ऐ सुहानी! अरे यार, जल्दी करो, देर हो रही है।” मनु अपनी पत्नी को तेज़ आवाज़ में बुला रहा था। “आ रही हूँ, बस दो मिनट और इंतज़ार करो।” सुहानी ने भी उसी अंदाज़ में जवाब दिया। “उफ़! ये महिलाएँ भी…” कहते हुए मनु पास पड़े सोफे पर धम्म से बैठ गया। वह आँखें … Read more

अपनो का साथ – मंजू ओमर

तुम रो क्यों रही हो मुक्ता क्या हुआ है ,और यह किससे बातें कर रही थी अभी फोन पर । वह पापा से बात कर रही थी मैं ,,तो क्या हुआ पापा से बात कर रही थी तो रोने की क्या बात है मयंक बोला । वह मम्मी की तबीयत ठीक नहीं है यूटरस का … Read more

दो कुलों का मान – आरती शिव टावरी

“बेटियाँ दो-दो कुलों का नाम रोशन करती हैं”—यह केवल एक कहावत नहीं, बल्कि जीवन का सच्चा अनुभव है। इस बात को साबित किया नंदिनी ने। नंदिनी एक साधारण परिवार की बेटी थी। उसके माता-पिता ने उसे बचपन से ही अच्छे संस्कार, शिक्षा और आत्मविश्वास दिया। वह पढ़ाई में हमेशा अव्वल रहती थी, लेकिन उसकी सबसे … Read more

अनपढ़ माँ

“क्या हुआ पापा? आप खुश नहीं हैं क्या? इतनी बड़ी कामयाबी मिली है मुझे,” समीर ने हैरानी से पूछा। रामनाथ जी ने गहरी साँस ली और बहुत ही शांत लेकिन चुभने वाले स्वर में कहा, “मैं बहुत खुश था समीर, लेकिन अभी कुछ ही पलों में तुमने मुझे यह अहसास दिला दिया कि मेरी और … Read more

मुक्कमल इश्क़

मेरा नाम लेते ही उसके हाथ कांप गए। उसने झटके से मेरी तरफ देखा। वो पत्थर जैसी दिखने वाली लड़की की आँखों में अचानक समंदर उमड़ पड़ा। वो कुछ बोल नहीं पा रही थी, बस मुझे एकटक देखे जा रही थी, जैसे यह यकीन करना चाहती हो कि यह कोई सपना तो नहीं है। वो … Read more

तीज की चुनरी, भारत का तिरंगा – लक्ष्मी कानोडिया ‘अनिका’

सावन जब धरती पर उतरता है, तब वह केवल वर्षा नहीं लाता; वह स्मृतियों की भीगी हुई पोटली, लोकगीतों की गूँज, मेहंदी की महक और भारतीय स्त्री के मन का अनंत उत्सव भी साथ लाता है। पीपल की डाल पर पड़ा झूला केवल रस्सियों का सहारा नहीं होता, वह पीढ़ियों से चली आती संस्कृति का … Read more

त्याग की मूरत

कमरे में एक भारी सन्नाटा छा गया। प्रेरणा के चेहरे पर एक अजीब सी शून्यता आ गई। उसने अपनी आँखों में आए आँसुओं को पलकों के पीछे ही रोक लिया। कुछ पल बाद, प्रेरणा ने गहरी सांस ली, अपने चेहरे पर एक झूठी लेकिन मजबूत मुस्कान लाई और आशा  के पास जाकर उसके सिर पर … Read more

एहसास के धागे

 श्रुति तो जैसे पत्थर की मूरत बन गई थी। विक्रम के कमरे से बाहर जाते ही उसके अंदर का लावा फूट पड़ा। “माँ आ रही हैं? मतलब मेरी सास! इन्हें भी आज ही आना था? जब भी हम दोनों कहीं बाहर जाने का, अपने लिए कुछ वक्त निकालने का सोचते हैं, तो महारानी जी मुंह … Read more

गलती इंसान से ही होती है

“भाभी, मेरे देवर की शादी है, आप सपरिवार आमंत्रित हैं।” मेरे पड़ोस में रहने वाली विनीता ने खुशी से चहकते हुए एक लाल रंग का निमंत्रण पत्र मेरे हाथों में थमा दिया। मैं विनीता के देवर, प्रतीक को जानती थी। वह एक बहुत ही होनहार और एक बड़ी मल्टीनेशनल कंपनी में सीनियर सॉफ्टवेयर इंजीनियर था। … Read more

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