डांट में छिपे अथाह प्रेम – संगीता अग्रवाल
“अब तूने मुझे अपने हाथ से खिलाया है, तो थोड़ा मैं भी तुझे खिला दूँ। सुबह से तूने भी तो कुछ ढंग का नहीं खाया होगा मेरी इस ज़िद के चक्कर में,” शांति देवी ने कहते हुए एक निवाला सुमेधा के मुँह में डाल दिया। अयान, जो दरवाज़े के पीछे खड़ा सब कुछ सुन और … Read more