*अपनों का साथ* – तोषिका

“जीवन में कभी कोई भी कठिनाई आए तो याद रखना हम तुम्हारे साथ है ऐसा हमेशा मेरे दादा जी कहते है” कमलेश ने अपने पोते अनंत को बोला। अनंत जो अभी मात्र ९ वर्ष का था, अपनी मासूम भरी आंखों से अपने दादाजी की बात ऐसे सुन रहा था जैसे ये सुनहरे अक्षर उसने पहली … Read more

वो मुझसे ज़्यादा मेरी भाभी की माँ है – डॉ आभा माहेश्वरी

जब भी मैं अपनी माँ के बारे में सोचता हूँ, मन में एक अजीब-सी टीस उठती है। बचपन में मैं अक्सर शिकायत किया करता था कि माँ का सारा ध्यान मुझ पर नहीं, बल्कि मेरी भाभी पर रहता है। मुझे लगता था कि शादी के बाद जैसे उन्हें एक बेटी मिल गई हो और मैं … Read more

अपनों का साथ – संयुक्त परिवार की सबसे बड़ी दौलत – सुदर्शन सचदेवा

कहते हैं, बड़ा घर ईंटों और सीमेंट से नहीं बनता, बल्कि उसमें रहने वाले अपनों के प्रेम, विश्वास और अपनापन से बनता है। संयुक्त परिवार भी ऐसा ही एक आँगन है, जहाँ हर रिश्ता अपने रंग से जीवन को सुंदर बना देता है। यहाँ किसी एक की खुशी, सबकी खुशी बन जाती है और किसी … Read more

वो मुझसे ज्यादा मेरी भाभी की मां है – सुदर्शन सचदेवा

 मुझसे ज़्यादा मेरी भाभी की माँ है… यह कहते हुए कभी-कभी मेरे अपने होंठ मुस्कुरा उठते हैं और आँखें भीग जाती हैं। क्योंकि मैं जानती हूँ… माँ का प्यार कभी कम नहीं होता, बस उसकी दिशा बदल जाती है। एक समय था, जब माँ की हर आवाज़ मेरे लिए होती थी—”बेटा, खाना खा लिया?”, “थक … Read more

अपनों का साथ – मधु वशिष्ठ

मां की मृत्यु का समाचार सुनकर जब उसके दोनों बेटे विदेश से आए तो वह यह देखकर हैरान थे उनकी अकेली रहने वाली माता जी के पास कितने लोग थे।  पूरा कमरा औरतों से भरा हुआ था आने जाने वाले कम ही नहीं हो रहे थे। लोग आकर ऐसे रो रहे थे कि मानो उन्होंने … Read more

अपनों का साथ – खुशी

गायत्री जी एक सुलझी महिला थी।उनके पति किशन जी की दुकान थी बड़े बाजार में किराने की दुकान थी जो बहुत बढ़िया चलती थी।उनके दो बेटे थे रितेश और राहुल दोनों भाइयों की एक दूसरे में जान बसती थी।पूरा परिवार एक दूसरे को समर्पित था।बच्चों ने भी अपनी शिक्षा पूरी कर कर पिता के कारोबार … Read more

अपनों का साथ

संडे का दिन था,बेटों के ऑफ़िस की छुट्टी थी रमा ने सोचा था आज थोड़ा आराम से ऊठूँगी…किंतु सुबह से ही किसी कौवे की लगातार काँव-काँव की आवाज आ रही थी..जिससे उसकी नींद जल्दी ही खुल गई।आवाज बंद होने का नाम ही नहीं ले रही थी…उसने खिड़की का पर्दा हटाकर बाहर देखा,तो..सामने के पेड़ पर … Read more

सोने का हार

मीरा ने महीने भर के राशन का हिसाब डायरी में लिखकर जैसे ही मेज़ पर रखा, सामने बैठे उसके पति सुधीर ने तुरंत डायरी उठा ली। सुधीर की आदत थी कि वह घर खर्च के लिए दिए गए पैसों का एक-एक रुपये का हिसाब मांगता था। पंद्रह रुपये का हिसाब डायरी में नहीं था, और … Read more

पहली रसोई

विवाह वाले घर की रौनक देखते ही बनती थी। पिछले एक हफ्ते से चल रही शहनाइयों की गूंज, ढोलक की थाप और महिलाओं के लोकगीतों ने पूरे घर को एक उत्सव में बदल दिया था। अब शादी संपन्न हो चुकी थी, लेकिन विदाई के बाद भी रिश्तेदारों और मेहमानों का जमावड़ा कम नहीं हुआ था। … Read more

असली घर

शहनाई की गूंज अब मद्धम पड़ चुकी थी और विदाई की बेला ने हर आँख को नम कर दिया था। मंडप के एक कोने में खड़ी अनुराधा अपनी बेटी नव्या को निहार रही थी। नव्या, जो अब अपने बचपन के आँगन को छोड़कर एक नए संसार में कदम रखने जा रही थी, उसकी आँखों में … Read more

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