पिता का न्याय
रमाकांत जी के पचहत्तरवें जन्मदिन का जश्न पूरे शबाब पर था। घर के बड़े से लॉन में रिश्तेदारों और जान-पहचान वालों की भीड़ जमा थी। चारों तरफ रोशनी, फूलों की सजावट और हंसी-मज़ाक का माहौल था। केक काटने की रस्म के बाद रमाकांत जी ने अपने दोनों बेटों और बहुओं को मंच पर बुलाया। यह … Read more