सोने की चेन – शुभ्रा बैनर्जी 

अब मां की तबीयत दिन ब दिन खराब ही होती जा रही है।कभी शुगर बिल्कुल कम हो जाता है,तो हाइपो में चली जाती हैं।अस्पताल में भर्ती करना उन्हें ,कोई कम टेढ़ी खीर नहीं।इस असंभव से काम को करने की जिम्मेदारी भी शुभा पर ही थी।इनके बेटे की भी यही आदत थी, इंजेक्शन लगवाने से और … Read more

सिंदूर की राख से जन्मी ‘माँ’

 माँ की आवाज में एक ऐसा खौफनाक ठहराव था जो किसी भी इंसान की रूह कंपा दे। उसने आगे कहा, “कान खोलकर सुन लो। तुम्हारी पत्नी कल्याणी आज इसी फर्श पर तुम्हारे इन जूतों के नीचे मर चुकी है। अब जो तुम्हारे सामने खड़ी है, वो सिर्फ और सिर्फ इस लड़के की ‘माँ’ है। और … Read more

न्याय की लाल माटी

“मालिक, ऐसा गज़ब मत बोलिए। वो आपकी भी बेटी जैसी है। अगले महीने उसके हाथ पीले होने वाले हैं। मैं खून-पसीना एक करके आपका एक-एक पैसा चुका दूँगा, बस मेरी बच्ची की तरफ आँख मत उठाइए।” लेकिन समर सिंह ने एक ज़ोरदार लात रामदीन के सीने पर मारी और अपने दोस्तों के साथ भद्दे ठहाके … Read more

स्वाभिमान की धार

 जाने से पहले रघुपति सुरभि के पास आया। उसने अपने दोनों हाथ जोड़कर सुरभि के सिर के ऊपर रखे और कांपती आवाज में बोला, “बिटिया, आज तुमने सिर्फ इस बूढ़े को काम नहीं दिया, तुमने मेरे स्वाभिमान को मरने से बचा लिया। आज मेरी बच्चियां पेट भर खाना खाएंगी और कल गर्व से स्कूल जाएंगी। … Read more

सपनों का घर

लखनऊ के गोमती नगर में रहने वाली कमला देवी का परिवार आस-पड़ोस में काफी प्रतिष्ठित माना जाता था। उनके पति दीनानाथ जी एक सरकारी विभाग से रिटायर्ड अधिकारी थे। परिवार में एक बेटा था सौरभ, जिसकी शादी को अभी महज़ दो साल ही हुए थे, और घर में एक प्यारी सी बहू थी मेघा। सबसे … Read more

खौफ के पार एक उम्मीद

  रमा देवी बार-बार दरवाजे की ओट से बाहर झांकतीं और फिर निराश होकर आंगन में लौट आतीं। उनके माथे की लकीरें उनके भीतर चल रहे तूफान को साफ बयां कर रही थीं। उनके पति, जो कभी एक मिल में काम करते थे, पिछले तीन सालों से लकवे का शिकार होकर बिस्तर पर थे। घर में … Read more

रिश्तों की छांव

 “चुप कर मुर्ख!” दीदी ने माधव की बात बीच में ही काट दी। उन्होंने अपने पल्लू की गांठ खोली और उसमें से एक छोटी सी कपड़े की पोटली निकाली। वो पोटली उन्होंने माधव के हाथों में रख दी। “इसमें मेरी कुछ एफडी (Fixed Deposit) के कागज़ात हैं और मेरे कुछ पुराने गहने हैं जो मैंने … Read more

रिश्तों की कीमत

कार्तिक मास की हल्की-हल्की ठंड ने दस्तक दे दी थी। सुबह का धुंधलका अभी पूरी तरह छँटा भी नहीं था, लेकिन मीरा की रसोई में बर्तनों की खनक और मसालों की सोंधी महक ने पूरे घर को जगा दिया था। आज भाई दूज का पवित्र त्योहार था। वैसे तो घर में काम करने वाली बाई … Read more

सच्ची चौखट

लंदन के एक प्रतिष्ठित अस्पताल से कार्डियोलॉजी में अपनी मास्टर्स की डिग्री और गोल्ड मेडल हासिल करने के बाद, जब डॉक्टर सुशांत पूरे छह साल बाद भारत लौट रहे थे, तो उनके घर में किसी बड़े त्योहार जैसा माहौल था। सुशांत की माँ, कावेरी देवी की छाती गर्व से चौड़ी हो गई थी। हो भी … Read more

बरसों बाद लौटी वो शाम

हफ्ते भर की कॉर्पोरेट नौकरी, क्लाइंट मीटिंग्स और अनगिनत टारगेट्स ने मेरे दिमाग को किसी मशीन में तब्दील कर दिया था। ऐसा लगता था जैसे मैं जी नहीं रहा हूँ, बस कलैंडर की तारीखों के साथ किसी अंधी दौड़ में भाग रहा हूँ। कई महीनों की इस कमरतोड़ मेहनत के बाद आज जाकर मुझे एक … Read more

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