संस्कारों की पूँजी

रोहन की एक-एक बात मेरे कानों में अमृत की तरह घुल रही थी। मेरा गला भर आया। एक मध्यमवर्गीय माँ के लिए इससे बड़ा दिन और क्या हो सकता है कि जिस बेटे की उँगली पकड़कर उसने चलना सिखाया था, आज वही बेटा उसका संबल बनकर खड़ा था और कह रहा था कि ‘माँ, अब … Read more

आँसुओं की छाँव में खिला सिंदूर

 कल्याणी जी उठकर खड़ी हो गईं। उन्होंने लाल चुनरी अवंतिका की गोद में रख दी। “फैसला अब तेरे हाथ में है। या तो इसी कमरे में बैठकर सारी ज़िंदगी आंसुओं के समंदर में डूबती रह और अपने पिता की आत्मा को भी कष्ट देती रह, या फिर एक वीर पिता की बहादुर बेटी बनकर उठ, … Read more

कर्ज से रिश्ते तक

 मैंने आगे बढ़कर शारदा को उठाया और देवेश से कहा, “देवेश जी, पुरानी गलतियों का पश्चाताप रोने से नहीं, बल्कि अपनी जिंदगी को सुधारने से होता है। अगर आप सच में शारदा और अपनी बेटियों से प्यार करते हैं, तो आपको इस दलदल से बाहर निकलना होगा। क्या आप एक नई शुरुआत करने के लिए … Read more

जड़ों की पुकार

 सुमित्रा की बात सुनते ही मेरे मन का सारा बोझ, सारा अपराधबोध जैसे आंसुओं के साथ बह गया। मैंने सुमित्रा की ओर देखा। एक स्त्री जब माँ बनती है तो त्याग की प्रतिमूर्ति होती है, और जब वह बहू बनती है तो बिखरते हुए रिश्तों को एक सूत्र में पिरोने वाली डोरी बन जाती है। … Read more

आँगन की छाँव

 आंचल की आँखों से झर-झर आँसू बहने लगे। उसने थाली को पास की मेज पर रखा और झुककर प्रमिला के पैर छूने लगी। प्रमिला ने तुरंत उसे ऊपर उठाया और अपने गले से लगा लिया। इस बार दोनों के आंसुओं में कोई दर्द नहीं था, बल्कि एक ऐसा पवित्र संतोष था जो शब्दों की सीमाओं … Read more

स्वाभिमान की दहलीज

“नहीं मानव, आज बात कमरे में नहीं, सबके सामने होगी,” अवंतिका ने अपनी आवाज़ में बिना कोई कड़वाहट लाए कहा। “तुमने मुझसे वादा किया था कि तुम मेरा सम्मान करोगे, मुझे समझोगे। लेकिन तुमने तो मुझे सिर्फ एक भूमिका में बाँध दिया। मैंने प्रेम विवाह किया था क्योंकि मुझे तुम पर भरोसा था। मैंने अपनी … Read more

अनकही कसक और ममता का सच

रात के करीब दस बज रहे थे। जयपुर की गुलाबी ठंड धीरे-धीरे अपने पैर पसार रही थी। पूरे दिन की गहमागहमी के बाद घर में सन्नाटा उतरने लगा था। रसोई का सारा काम निबटाकर, गैस का चूल्हा पोंछकर अवनि ने भारी सांस छोड़ी। सुबह पांच बजे से वह लगातार पैरों पर खड़ी थी। घर के … Read more

दीवार के उस पार का आँगन

 तन्वी ने उँगली उठाकर उस छह फीट ऊँची ईंटों की दीवार की तरफ इशारा किया, “यह दीवार… यह दीवार सिर्फ पत्थरों की नहीं है। यह आप दोनों के अहम् की वो खूनी लकीर है जिसने नानी की छाती को दबा रखा है। जब एक माँ ने आप दोनों को नौ महीने अपनी कोख में रखा, … Read more

आईना और अनुभव

 “मुझे माफ कर दे नंदिनी,” सुमित्रा का गला भर आया। “मैं यह भूल गई थी कि किसी पौधे को बड़ा करने के लिए उस पर धूप बरसाने से ज्यादा जरूरी उसे खाद और पानी देना होता है। मैंने तुझसे उस समझदारी की उम्मीद की, जिसे हासिल करने में मुझे खुद पच्चीस साल लग गए। तूने … Read more

मान का तराजू

अवनि की आंखों में अपमान और बेबसी के आंसू उमड़ आए, लेकिन उसके संस्कारों ने उसे अपनी सास के सामने पलटकर जवाब देने की अनुमति नहीं दी। उसने अपने होंठ भींचे, सिर झुकाया और बिना एक शब्द कहे भारी कदमों से अपने शयनकक्ष की ओर चली गई। कमरे का दरवाजा बंद करते ही उसका संयम … Read more

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