सिंदूरी साँझ का इंतज़ार

 नैना के मुँह से कोई शब्द नहीं फूटा। उसने काँपते हाथों को आगे बढ़ाया, जैसे यह तस्दीक करना चाहती हो कि सामने खड़ा इंसान हाड़-मांस का सच है या कोई छलावा। जैसे ही उसकी उंगलियों ने अनिरुद्ध के खुरदुरे कोट को छुआ, अनिरुद्ध ने एक झटके में उसका हाथ पकड़ा और उसे खींचकर अपने सीने … Read more

ममता की अधूरी देहरी

कल्याणी जी ने प्रज्ञा के आंसुओं को अपने हाथों से पोंछा और उसके माथे को चूमते हुए कहा, “अब कभी मत रोना। तेरी माँ तुझे छोड़कर कहीं नहीं गई थी, शायद वह मेरे ही रूप में तुझ तक पहुँचना चाहती थी। पर मेरी मूर्खता ने तुझे बहुत सताया। अब यह घर, यह परिवार और यह … Read more

रिश्तों की छाँव : एक नई शुरुआत

भोपाल शहर के कोलाहल से दूर एक शांत इलाके में स्थित ‘आश्रय’ वृद्धाश्रम की इमारत वैसे तो बहुत खूबसूरत थी, लेकिन इसके भीतर रहने वालों के दिलों में एक अजीब सा सन्नाटा पसरा रहता था। इसी आश्रम के एक कोने में स्थित बेंच पर सावित्री देवी का पूरा दिन बीत जाता था। सावित्री देवी को … Read more

पंछी, परवाज़ और खाली घोंसला

सूरत की एक शांत और प्रतिष्ठित कॉलोनी में बने दो मंजिला बंगले ‘आनंद निकेतन’ के बड़े से दालान में बैठी सुमित्रा देवी अपने कांपते हाथों से चाय की चुस्कियां ले रही थीं। सुबह की धूप आंगन में उतर आई थी, लेकिन उस विशाल घर का कोना-कोना एक अजीब से सन्नाटे में डूबा हुआ था। दीवार … Read more

ऐसी भाभी सबको मिले – सीमा सिंघी 

जब से देवकी का विवाह बासु के साथ तय हुआ। तब से ही देवकी खुश तो थी मगर..एक अनजाना डर उसके अंदर समाए जा रहा था । वह अक्सर सोचती रहती थी कि… जब ब्याह कर वह उस घर में जाएगी तो… वहां उसे भाभी के साथ साथ मां का भी फर्ज निभाना होगा । … Read more

षड्यंत्र – गरिमा जैन

भाभी मेरे लिए चाय बना दीजिए और साथ में पकोड़े भी अच्छा छोटी आप चलिए मैं अभी बनाती हूं  अरे यह आपके चेहरे को क्या हो गया ? दिखाइए जरा । कुछ नहीं ,कुछ नहीं ! यह कैसा निशान है चेहरे पर? कुछ नहीं मैं फिसल कर गिर गई थी  भाभी मैं छोटी बच्ची नहीं … Read more

छठी का उपहार – अर्चना सिंह

घर के हर कोने में पकवानों की खुशबू बिखरी हुई थी । चारु घर के अंदर घुसते ही अपनी माँ सुधा जी को मिठाई के डिब्बे पकड़ाते हुए बोली…”लो माँ ! अभी इसको सम्भाल कर रखो जब अपनी भतीजी का मुँह देखूँगी तब तुमसे ले लूंगी। सुधा जी ने सवालिया निगाहों से चारु को देखते … Read more

भाभी हो तो ऐसी – मधु वशिष्ठ

“अरे! तूने बताया ही नहीं कि मिनी का एक्सीडेंट हो गया और उसके पैरों में भी प्लास्टर चढ़ा हुआ है? यह तो मैं अपने बैंक की मेरठ वाली ब्रांच में आया तो सोचा चल तेरे से भी मिलता हुआ चलूं, वरना तू तो बताती भी नहीं।” दर्द से कराहते हुए भी मामा को देखकर मिनी … Read more

मैली चादर का उजास

 आईने के सामने खड़ी मंदाकिनी अपनी कजरारी आँखों में सलीके से सुरमा लगा रही थी। उसके अधरों पर एक सहज और सच्ची मुस्कान थिरक रही थी, जो शायद उसने कई बरसों से खुद के चेहरे पर नहीं देखी थी। उसने गहरे हरे रंग की रेशमी साड़ी पहनी थी, जिसके किनारों पर सुनहरी गोटेदार किनारी लगी … Read more

संस्कारों की बेड़ियाँ

 अवंतिका ने अपने पिता के आँसू पोंछते हुए बहुत ही सौम्यता से कहा, “बाबूजी, आपको माफी मांगने की ज़रूरत नहीं है। आपने मुझे जो संस्कार दिए थे, मैं उनके खिलाफ कभी नहीं थी। लेकिन मुझे यह समझ आ गया कि त्याग का अर्थ खुद को मिटा देना नहीं होता। अगर कोई स्त्री अपने हिस्से का … Read more

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