मां का अकेलापन – गीता वाधवानी

 “मम्मी, मैं चलती हूं कैब आ गई है।” 

 मम्मी( राधा देवी) ने कहा-” नैनसी, सुन तो बेटा, फिर कब आएगी, अबकी बार तो बहुत दिनों बाद आई है। इसी शहर में अपना ट्रांसफर क्यों नहीं करवा लेती। अब मैं और अकेली नहीं रह सकती। मेरा बिल्कुल मन नहीं लगता तेरे बिन। देख लेना किसी दिन मर जाऊंगी तो याद करेगी। ” 

नैनसी-” मम्मी क्यों ऐसे बोल कर मेरा जाना मुश्किल कर रही हो,वैसे भी मैं आपको अकेला छोड़कर जाती हूं तो टेंशन में रहती हूं और ट्रांसफर इतनी जल्दी नहीं होगा,कम से कम 2 साल वही रहना होगा। ” 

 मम्मी-” ठीक है फिर नौकरी छोड़ दे। ” 

 नैनसी-” मम्मी कैसी बातें कर रही हो, इतनी अच्छी जॉब है लोग इसे पाने के लिए तरसते हैं और मैं छोड़ दूं। अपना ध्यान रखना मैं चलती हूं। मेरी प्यारी मम्मी, चलो बाय बाय। ” 

 उसने बाहर निकलते समय देखा कि पड़ोस वाली सुशीला आंटी खड़ी है। उसने उनको नमस्ते किया और कहा कि आंटी मम्मी का ध्यान रखना। 

 सुशीला आंटी ने कहा -” हां बिटिया तुम चिंता मत करो। ” 

नैनसी चली जाती है और राधा उदास होकर सोफे पर बैठ जाती है। रात में वह अपनी पुरानी एल्बम निकाल कर बैठ जाती है और नैनसी की बचपन से लेकर अब तक सारी तस्वीर देखकर पुरानी बातें याद करने लग जाती है। 

 यह है मेरी नैनसी की पहले कदम की फोटो। कैसे पूरे घर में ठुमकती फिरती थी और यह वाला फोटो जब वह रेस में फर्स्ट आई थी और यह जब डांस में सेकंड आई थी और यह प्यारी फोटो डिबेट की। 

 समय कैसे पंख लगा कर उड़ता जाता है कितनी जल्दी बड़ी हो गई मेरी बिटिया और आज से 5 साल पहले जब उसके पापा गुजर गए थे तो कितना रोई थी पापा की लाडली। उसके बाद उसने खूब मेहनत करके पढ़ाई की और बढ़िया जॉब पाकर हैदराबाद चली गई।    गीता वाधवानी दिल्ली 

 थोड़े समय बाद दीपावली का उत्सव था। नैनसी दीपावली पर आई थी। राधा बहुत खुश थी। उसने उसके मनपसंद नारियल के लड्डू बनाए, उसके साथ शॉपिंग की,घर को साफ सुथरा करके खूब सजाया। 

 दोनों मां बेटी खूब बातें करती और टीवी पर पिक्चर देखतीं। 

 सुबह राधा नेनैनसी से कहा-” आजा बेटा बालों में तेल लगवा ले, कैसे रुखे बाल हो रहे हैं और फिर तू अगले हफ्ते चली जाएगी। ” 

नैनसी ने तेल लगवाया। दोनों ने मिलकर खूब अच्छे से दिवाली मनाई। अगली सुबह नैनसी ने देखा कि मम्मी अभी तक जागी नहीं है क्या बात है, वैसे तो रोज सुबह-सुबह उठ जाती हैं। उसने मम्मी को छू कर देखा तो उन्हें तेज बुखार था। 

 उसने जल्दी से कैब बुक कर दी और उन्हें डॉक्टर के पास ले गई। डॉक्टर साहब ने बताया कि वायरल बुखार हुआ है। लगभग एक हफ्ता आराम करना पड़ेगा। नैनसी को बहुत चिंता हो रही थी कि अब मैं नौकरी पर कैसे जाऊं। मम्मी को इस हाल में छोड़ भी नहीं सकती और एकदम से किसी को मम्मी की देखभाल के लिए रख भी नहीं सकती। ऐसे कैसे किसी पर भरोसा करूँ। उसने एक हफ्ते की छुट्टी बढ़ाने के लिए अपने ऑफिस में फोन किया। 

 ऑफिस से उसे बहुत डांट सुननी पड़ी और छुट्टी भी सिर्फ तीन दिन की मिली और वह भी अगली बार ऐसा करने पर नौकरी जाने की धमकी के साथ। 

 उसने समय पर मम्मी को दवाइयां  दी, उनके लिए हल्का खाना बनाया। उनको बहुत कमजोरी हो गई थी पर वह बेटी की मजबूरी भी समझ रही थी ं। 

 उन्होंने हिम्मत दिखाई और नैनसी से कहा -” तू मेरी चिंता मत कर, अब मैं ठीक हूं, तू अपनी जॉब पर जा मैं रोज तुझे फोन पर अपना हाल बताती रहूंगी। ” 

    नैनसी वापस चली गई, पर वह बहुत चिंतित थी और उसे अपनी नौकरी भी बहुत प्यारी थी। 

 धीरे-धीरे रोज अपनी मम्मी से बात करके और उन्हें वीडियो कॉल पर ठीक देखकर उसकी चिंता कम होने लगी।     गीता वाधवानी दिल्ली

 एक दिन उसकी मम्मी ने फोन किया और वह ऑफिस में मीटिंग होने के कारण फोन को अटेंड नहीं कर पाई। बाद में उसे रात को टाइम मिला,तब उसे लगा कि इस समय तो मम्मी सो चुकी होगी,अब मैं उनसे सुबह ही बात करूंगी। 

 सुबह मोबाइल बजने से उसकी आंख खुली तो उसने देखा कि पड़ोस वाली सुशीला आंटी का कॉल है। उसने कॉल रिसीव किया तो उन्होंने कहा “बेटा जल्दी आ जाओ,तुम्हारी मम्मी इस दुनिया में नहीं रही।” 

नैनसी जोर से रोते हुए चीखी ” क्या, यह नहीं हो सकता और उसके हाथ से फोन छूट कर गिर गया। 

     तभी मोबाइल का अलार्म बजने लगा और नैंनसी की आंख खुल गई। तब उसे लगा कि अच्छा हुआ यह सिर्फ एक सपना था,पर तभी उसके दिल ने कहा, कहीं अगर यह सपना सच हो गया तो, फिर उसने खुद से कहा नहीं ऐसा नहीं हो सकता। 

 उसने ऑफिस जाकर तुरंत अपने ट्रांसफर की बात की, लेकिन 2 साल वही रहने वाला नियम सामने आ गया। तब नैनसी ने रिश्तों की कीमत और अपनी मां के अकेलेपन को समझते हुए नौकरी छोड़ दी और घर वापसी में उसे बहुत हल्का महसूस हो रहा था। मानो उसके मन से कोई बोझ उतर गया हो और उसने अपनी कोई गलती सुधार ली हो और वह कल्पना में खो गई कि जब वह वापस पहुंचेगी तो उसकी मां कैसे खुश होगी। 

 अचानक नैनसी को आया हुआ देख कर ,माँ बहुत खुश हो गई थी और जब उन्हें पता लगा कि नैनसी अब उनके साथ ही रहेगी तो उनकी खुशी का ठिकाना ही नहीं था। उसने अब सोच लिया था कि मम्मी को कभी अकेला नहीं छोडूंगी  और कल से यही पर एक नई नौकरी की तलाश करूंगी। 

 अ प्रकाशित स्वरचित गीता वाधवानी दिल्ली 

साप्ताहिक प्रतियोगिता विषय #रिश्तो की कीमत 

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