पराए जो अपने से लगे – मधु वशिष्ठ

सुबह-सुबह राठौर जी घर के बाहर बैठकर चाय की चुस्कियां ले रहे थे। मुझे देखते ही उन्होंने अंदर आने का इशारा किया। उनका मेरा संबंध आज का नहीं पिछले 40 सालों का है ।जी हां  हमने और राठौड़ जी ने लगभग साथ साथ ही घर बनाया था। एक दूसरे की दुख तकलीफों को भी यथासंभव … Read more

अपने ही घर में पराई

सुधा भाभी ने बीच में ही बात काटते हुए कहा, “तो निखिल की सजा तुम उस बूढ़ी मां को दोगी मोनिका? जिस मां ने तुम्हारे और तुम्हारे बेटे के भविष्य को सुरक्षित करने के लिए अपना मकान और अपनी सारी जमा-पूंजी तुम्हारे नाम कर दी, आज तुमने उसी के लिए दो रोटी और एक गिलास … Read more

चौखट का मोह

“मुझे माफ़ कर दो मेरे बच्चों…” गजेंद्र बाबू का गला रुंध गया। “मैं अपनी झूठी ठसक और इस मिट्टी के मोह में अंधा हो गया था। मैं भूल गया था कि ज़िंदगी का असली सुख चारदीवारी में नहीं, अपनों की बाहों के घेरे में होता है। आज इस मकान का मोह खत्म हुआ। अब हम … Read more

तिजोरी से बड़ा पिता का दिल

जब तक पिता की जेब भरी थी, वो अपनी लाडली बेटी के लिए भगवान थे, लेकिन जैसे ही बीमारी ने उनकी जमापूंजी छीन ली, उसी बेटी ने मौत से लड़ते पिता से मुंह मोड़ लिया… फिर अस्पताल के उस वार्ड में कुछ ऐसा हुआ जिसने खून के रिश्तों की परिभाषा ही बदल दी। आज के … Read more

रस्मों की डोर

मां को इस तरह फूट-फूटकर रोता देख आरव और मानसी दोनों सन्न रह गए। मानसी के हाथ से उसका डिजाइनर दुपट्टा छूटकर नीचे गिर गया। मां के एक-एक शब्द ने उन दोनों के दिल पर गहरी चोट की थी। जिस आधुनिकता और समय बचाने की दौड़ पर वे गर्व कर रहे थे, आज उसी ने … Read more

सूनी मांग का सिंदूर

 वैदेही ने अपने सारे ज़ख्म, सारी शिकायतें एक पल में भुला दीं। उसने अपने नाज़ुक कंधों पर समृद्ध का भारी हाथ रखा और अपनी पूरी ताकत लगाकर उसे सहारा देते हुए अंदर कमरे तक ले आई। उसने तुरंत उसके गीले कपड़े बदले, तौलिए से उसके बाल और शरीर पोंछा और उसे रजाई ओढ़ा दी। बाहर … Read more

घर की जीवित देवी

“बड़ी अम्मा, हिलना मत, अभी काजल लगाना है,” पीहू ने बिल्कुल अपनी मम्मी के अंदाज में आदेश दिया। भगवती देवी आंखें बंद करके शांत बैठ गईं। उन्हें लग रहा था जैसे बरसों बाद किसी ने उन्हें इतने प्यार, इतने अधिकार से छुआ है। जब इंसान बूढ़ा हो जाता है, तो लोग उसे छूना कम कर … Read more

अँगूठे की स्याही

वह पागलों की तरह उठा, बिना जूते पहने नंगे पैर ही फ्लैट से बाहर भागा। वह भागता हुआ अपनी पुरानी बस्ती के पास शारदा देवी के घर पहुँचा। दरवाज़ा खटखटाते ही जब शारदा देवी ने दरवाज़ा खोला, तो सामने आयुष खड़ा था—उसकी आँखें लाल थीं और चेहरे पर गहरा पश्चाताप था। अंदर कमरे में राधा … Read more

आत्म सम्मान – खुशी

नितिन तुम्हें ये पत्र जब मिलेगा तब तक मैं तुम्हारी दुनिया से दूर जा चुकी होगी तुम्हें कोई फर्क नहीं पड़ेगा मेरे जाने से तुम्हारे जीवन में मेरा कोई स्थान नहीं है । रोज अपनी आत्म सम्मान का गला घुट कर मैं नहीं जी सकती इसलिए मैं जा रही हूं अपने आत्मसम्मान के लिए अपनी … Read more

कड़वाहट से अपनेपन की ओर

अगले दिन अंकिता ने खुद मयंक भैया को फोन मिलाया। जब मयंक ने फोन उठाया, तो अंकिता ने प्रणाम करते हुए बड़े आदर से कहा, “भैया, मैं आपकी छोटी बहू अंकिता बोल रही हूं। मैं जानती हूं कि आपके दिल पर क्या गुजरी है, और मैं यह भी नहीं कहूंगी कि जो हुआ वह सही … Read more

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