पराए जो अपने से लगे – मधु वशिष्ठ
सुबह-सुबह राठौर जी घर के बाहर बैठकर चाय की चुस्कियां ले रहे थे। मुझे देखते ही उन्होंने अंदर आने का इशारा किया। उनका मेरा संबंध आज का नहीं पिछले 40 सालों का है ।जी हां हमने और राठौड़ जी ने लगभग साथ साथ ही घर बनाया था। एक दूसरे की दुख तकलीफों को भी यथासंभव … Read more