स्वाभिमान की धार
जाने से पहले रघुपति सुरभि के पास आया। उसने अपने दोनों हाथ जोड़कर सुरभि के सिर के ऊपर रखे और कांपती आवाज में बोला, “बिटिया, आज तुमने सिर्फ इस बूढ़े को काम नहीं दिया, तुमने मेरे स्वाभिमान को मरने से बचा लिया। आज मेरी बच्चियां पेट भर खाना खाएंगी और कल गर्व से स्कूल जाएंगी। … Read more