स्वाभिमान की धार

 जाने से पहले रघुपति सुरभि के पास आया। उसने अपने दोनों हाथ जोड़कर सुरभि के सिर के ऊपर रखे और कांपती आवाज में बोला, “बिटिया, आज तुमने सिर्फ इस बूढ़े को काम नहीं दिया, तुमने मेरे स्वाभिमान को मरने से बचा लिया। आज मेरी बच्चियां पेट भर खाना खाएंगी और कल गर्व से स्कूल जाएंगी। … Read more

सपनों का घर

लखनऊ के गोमती नगर में रहने वाली कमला देवी का परिवार आस-पड़ोस में काफी प्रतिष्ठित माना जाता था। उनके पति दीनानाथ जी एक सरकारी विभाग से रिटायर्ड अधिकारी थे। परिवार में एक बेटा था सौरभ, जिसकी शादी को अभी महज़ दो साल ही हुए थे, और घर में एक प्यारी सी बहू थी मेघा। सबसे … Read more

खौफ के पार एक उम्मीद

  रमा देवी बार-बार दरवाजे की ओट से बाहर झांकतीं और फिर निराश होकर आंगन में लौट आतीं। उनके माथे की लकीरें उनके भीतर चल रहे तूफान को साफ बयां कर रही थीं। उनके पति, जो कभी एक मिल में काम करते थे, पिछले तीन सालों से लकवे का शिकार होकर बिस्तर पर थे। घर में … Read more

रिश्तों की छांव

 “चुप कर मुर्ख!” दीदी ने माधव की बात बीच में ही काट दी। उन्होंने अपने पल्लू की गांठ खोली और उसमें से एक छोटी सी कपड़े की पोटली निकाली। वो पोटली उन्होंने माधव के हाथों में रख दी। “इसमें मेरी कुछ एफडी (Fixed Deposit) के कागज़ात हैं और मेरे कुछ पुराने गहने हैं जो मैंने … Read more

रिश्तों की कीमत

कार्तिक मास की हल्की-हल्की ठंड ने दस्तक दे दी थी। सुबह का धुंधलका अभी पूरी तरह छँटा भी नहीं था, लेकिन मीरा की रसोई में बर्तनों की खनक और मसालों की सोंधी महक ने पूरे घर को जगा दिया था। आज भाई दूज का पवित्र त्योहार था। वैसे तो घर में काम करने वाली बाई … Read more

सच्ची चौखट

लंदन के एक प्रतिष्ठित अस्पताल से कार्डियोलॉजी में अपनी मास्टर्स की डिग्री और गोल्ड मेडल हासिल करने के बाद, जब डॉक्टर सुशांत पूरे छह साल बाद भारत लौट रहे थे, तो उनके घर में किसी बड़े त्योहार जैसा माहौल था। सुशांत की माँ, कावेरी देवी की छाती गर्व से चौड़ी हो गई थी। हो भी … Read more

बरसों बाद लौटी वो शाम

हफ्ते भर की कॉर्पोरेट नौकरी, क्लाइंट मीटिंग्स और अनगिनत टारगेट्स ने मेरे दिमाग को किसी मशीन में तब्दील कर दिया था। ऐसा लगता था जैसे मैं जी नहीं रहा हूँ, बस कलैंडर की तारीखों के साथ किसी अंधी दौड़ में भाग रहा हूँ। कई महीनों की इस कमरतोड़ मेहनत के बाद आज जाकर मुझे एक … Read more

**सात समंदर पार का सन्नाटा**

 पंडित शिवशंकर जी के पुश्तैनी मकान का बड़ा सा आँगन अब हमेशा खामोश रहता था। कभी इस आँगन में उनके बेटे रोहन की किलकारियां गूंजा करती थीं, लेकिन आज यहाँ सिर्फ शिवशंकर जी की सूखी खांसी और उनकी पत्नी, रमा देवी की अस्थमा से उखड़ती हुई सांसों की आवाज़ सुनाई देती है। उम्र के सातवें … Read more

सपनों की उड़ान और रिश्तों की दहलीज

शाम का धुंधलका गहराने लगा था और बाहर हल्की-हल्की बारिश हो रही थी। ड्राइंग रूम में टीवी पर समाचार चल रहे थे, जहाँ विक्रम अपने मोबाइल में उलझा हुआ था, पास ही सोफे पर बैठी उसकी माँ सुमित्रा जी स्वेटर बुन रही थीं और पिता रघुनाथ जी अपने चश्मे को नाक पर टिकाए अखबार के … Read more

उड़ान : एक अनकहा सफर

दूसरी ओर, रोहन भी अपने पिता के इस हस्तक्षेप से बुरी तरह चिढ़ गया था। पिता के सामने वह पलट कर जवाब तो नहीं दे सकता था, लेकिन उसका पुरुषार्थ इस बात को स्वीकार नहीं कर पा रहा था कि उसकी पत्नी अब उससे एक कदम आगे निकल चुकी है। पति और पत्नी एक गाड़ी … Read more

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