सार्थकता की छाँव
निहारिका जब लाल जोड़े में सजी, अपनी आँखों में अनगिनत सपने लिए सेठ रामनाथ जी के विशाल और भव्य बंगले ‘आशीर्वाद’ की चौखट पर पहुँची थी, तो उसके मन में एक अजीब सी घबराहट थी। मायके का वो मध्यमवर्गीय लेकिन खुला माहौल, जहाँ उसे हमेशा पढ़ने-लिखने और आगे बढ़ने की आज़ादी मिली थी, क्या इस … Read more