खुशियां बांटने से बढ़ती हैं – मोहिनी मिश्रा
दीवाली के त्योहार की सुबह थी। सूरज ने अभी तक अपनी किरणें नहीं बिखेरी थीं, लेकिन निर्मला जी की सुबह हमेशा की तरह अलार्म बजने से पहले ही हो चुकी थी। भोर के चार बज रहे थे। घर में गहरी शांति थी, सिर्फ रसोई से बर्तनों की हल्की खनक और बेसन भूनने की सोंधी महक … Read more