विश्वास की डोर मजबूत होती है – विनीता सिंह

मुंबई की बारिश भारी हो रही थी। लोकल ट्रेन की खिड़की से पानी की बूंदें तेजी से सरक रही थीं, जैसे शहर की भागदौड़ को धोना चाहती हों। आरव खिड़की के पास बैठा था, आंखें सूनी। उसके बगल में सोनू सो रहा था, सिर कंधे पर टिका हुआ। दोनों बचपन के दोस्त थे,

धारावी की तंग गलियों से निकले। आरव इंजीनियर बन गया था, आईटी कंपनी में जॉब। सोनू ऑटो चलाता था, लेकिन सपने बड़े थे—एक दिन अपना गैरेज खोलना।पांच साल पहले, सोनू का एक्सीडेंट हो गया। ट्रक ने उसके ऑटो को टक्कर मार दी। डॉक्टरों ने कहा, “पैर कटेगा।

” आरव ने सब कुछ बेच दिया—अपना लैपटॉप, गोल्ड चेन, यहां तक कि मां का मंगलसूत्र। प्राइवेट हॉस्पिटल में ऑपरेशन हुआ। सोनू बच गया, लेकिन पैर लंगड़ा हो गया। “भाई, तूने मेरी जान बचाई,” सोनू ने कहा था, आंसू पोछते हुए।

“अब तू मेरा भरोसा मत तोड़ना।”आरव ने हंसकर कहा, “विश्वास की डोर कभी टूटती नहीं, बस मजबूत होती जाती है।” लेकिन जिंदगी ने परीक्षा ली। आरव की कंपनी में लेऑफ हो गया। घर का लोन, पत्नी की प्रेग्नेंसी—सब कुछ डूबने को था।

सोनू को पता चला। उसने अपना पुराना ऑटो बेच दिया। “ये ले, भाई। तू नया जॉब ढूंढ ले। मैं रिक्शा चला लूंगा।” आरव ने मना किया, लेकिन सोनू अड़ गया। “तूने मेरा पैर बचाया, मैं तेरी जिंदगी बचाऊंगा। विश्वास दो तरफा सड़क है।”आरव ने नई जॉब पा ली बैंगलोर में। सोनू मुंबई में रह गया। महीनों फोन पर बातें होतीं।

“भाई, तू ठीक है न?” “हां रे, बस तेरी याद आती है।” लेकिन एक दिन फोन आया—सोनू बीमार। किडनी फेलियर। डायलिसिस के पैसे नहीं। आरव ने सब छोड़ दिया। बैंगलोर से रात की ट्रेन पकड़ी। स्टेशन पर पहुंचा तो सोनू मुस्कुरा रहा था। “तू आ गया? मैं जानता था।

“आरव ने सोनू को कंधा दिया, हॉस्पिटल ले गया। डॉक्टर ने कहा, “डोनर मिल जाए तो बचेगा।” आरव ने टेस्ट कराया—मैच हो गया। ऑपरेशन सफल रहा। सोनू की आंखों में आंसू थे। “भाई, तूने अपना एक हिस्सा दे दिया। अब हमारा विश्वास खून से जुड़ गया।”आज दोनों धारावी की छत पर बैठे हैं।

मुंबई की लाइट्स चमक रही हैं। सोनू का गैरेज चल पड़ा है। आरव पार्टनर है। बारिश थम गई। आरव बोला, “देख, विश्वास की डोर कितनी मजबूत हो गई।

” सोनू ने कंधा थपथपाया, “हां भाई, ये कभी नहीं टूटेगी।”शहर की भीड़ में, दो दिलों का बंधन अमिट था। विश्वास, जो मुश्किलों में ही तो मजबूत होता है।

दोनों दोस्तों ने एक दूसरे पर विश्वास किया और दोनों सफल हुए इसलिए कहते हैं की विश्वास की डोर बहुत बहुत मजबूत थी 

विनीता सिंह

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