**सोने का पिंजरा: एक खोखली मुस्कान का सच**

बारिश की बूंदें कांच की बड़ी-बड़ी खिड़कियों पर टकरा रही थीं। शहर के सबसे पॉश इलाके में बना ‘मल्होत्रा विला’ बाहर से जितना भव्य और खूबसूरत दिखता था, आज अंदर से उतना ही शांत और सर्द महसूस हो रहा था। इटालियन मार्बल से सजे उस विशाल ड्रॉइंग रूम में बैठी नंदिनी के हाथ में कॉफी … Read more

 खामोश दीवारों का दर्द – अर्चना खंडेलवाल

खिड़की के बाहर सावन की झमाझम बारिश हो रही थी, लेकिन काव्या के अंदर जैसे एक सूखा रेगिस्तान पसर चुका था। उसकी छोटी बहन श्रुति, जो अपनी कॉलेज की छुट्टियों में कुछ दिनों के लिए दीदी के घर रहने आई थी, सोफे पर बैठी स्तब्ध थी। उसने अभी-अभी जो देखा था, उस पर उसे यकीन … Read more

**चमकते ख्वाब और घर की चौखट** – अर्चना खंडेलवाल

“निहारिका, इस तरह आधी रात को अचानक घर छोड़ कर जाना ठीक नहीं होगा,” अनिरुद्ध की आवाज़ में गुस्सा नहीं, बल्कि एक गहरी पीड़ा थी। “अभी बाबूजी और माँ सो गए हैं, सुबह उठकर जब वे तुम्हारे बारे में पूछेंगे तो मैं उन्हें क्या जवाब दूंगा? वे सब तुमसे कितना प्यार करते हैं, तुम्हारा कितना … Read more

अदालत का फैसला – एम. पी. सिंह

जीवन भोपाल के पास एक छोटे से गावं मैं रहता था और पशु आहार का कारोबार करता था. पंजाब से माल आता था ओर आस पास के छोटे पशु पालक माल ले जाते थे. बिक्री बहुत ज्यादा नहीं थीं पर कमाई काफ़ी ज्यादा थीं. जीवन की पत्नी ज्योति अपना घर ओर  बच्चे नीता व नितिन … Read more

किसी पर आखं बद करके भरोसा न करें – मंजू ओमर 

मत रो बेटा अपने आसूं पोछ ले। कैसे पोछ लू अपने आसूं माँ, वन्दना ने मेरे साथ बहुत गलत किया। उसने मेरी दुनिया ही उजाड दी। कोई बहन अपनी सगी बहन के साथ ऐसा करती है क्या। गलती तो मेरी भी है मैंने आखं बदं करके वन्दना के ऊपर भरोसा कर लिया। मुझे नहीं पता … Read more

बुढ़ापा तो सबका आता है। – दीपा माथुर

दादा जी आप रोज रोज ये गीता सत्र क्यों देखते हो? डोरेमॉन आपको पसंद नहीं है क्या? दादा जी शुभ की इस मासूमियत पर खिलखिला दिए बोले ” देख तो सकता हु पर सिर्फ आपके साथ ही आप दिखाते ही नहीं हो? शुभ ने एक बात गर्दन नीचे झुकाई ओर तुरंत शरारती ढंग से दादा … Read more

“उपकार ” – कमलेश आहूजा

“आज ऑफिस से आने में देर क्यों कर दी?”-रिया गैस पर चाय चढ़ाते हुए पति रोहित से बोली। “अरे,एक कलिग(सहकर्मी) की फेअरवेल पार्टी थी इसलिए देर हो गई।अपने पिता को अकेला छोड़कर विदेश जा रहा है।” “रोहित,तुम्हारी माँ को तो हमारा एहसानमंद होना चाहिए हमने उन्हें अपने पास रखा हुआ है।अच्छा खाना,कपड़ा और सारी सुविधाएं … Read more

बुढ़ापा तो सबको आता है – बिमला रावत जड़धारी

जब मैं छोटा था तो हर गर्मियों की छुट्टियों में अपने पिताजी के साथ गाॅंव जाता था। कभी-कभी किसी गर्मियों की छुट्टी में मम्मी भी जाया करती थी। मम्मी को गाॅंव बिल्कुल भी पसंद नहीं था। बस वह पिताजी का मन रखने के लिए चली जाती थी। पिताजी पूरे साल ऑफिस से छुट्टी नहीं लेते … Read more

पहला प्यार – एम. पी. सिंह

स्कूल की पढ़ाई पूरी कर कॉलेज में एडमिशन लिया. कॉलेज का पहला दिन, नये साथी, नये टीचर, नये चेहरे, नई जगह बस शहर वहीं पुराना. इन नये चेहरों में एक चेहरा ऐसा भी था जो मेरे सपनो की राजकुमारी से मिलता था. मेरे दिल ने अपनी राजकुमारी के चहरे क़ो पहचान लिया और उसके पीछे … Read more

बुढ़ापा तो सभी को आता है। – मधु वशिष्ठ

बुढ़ापा तो सभी को आता है परंतु बुढ़ापे में जीना कैसे हैं वह सब को नहीं आता।  आन्टी जी पड़ोस के घर में ही रहती थीं। ८० साल की उम्र में भी उन्होंने कोई काम वाली नहीं रखी थी। उनके बेटे और बेटी दोनों अमेरिका में रहते थे। आंटी और अंकल दोनों काॅलेज मैप प्रोफेसर … Read more

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