जीवन की डोर
मयंक ने प्रज्ञा के दोनों हाथों को अपने हाथों में ले लिया। उसकी आँखों से कृतज्ञता के आँसू बह निकले। उसने रुंधे गले से कहा, “नहीं मेरी छोटी, शास्त्रों में रक्षा का जो भी अर्थ लिखा हो, लेकिन मेरी असली रक्षक तो तू है। सदियों से दुनिया कहती आई है कि भाई बहन की रक्षा … Read more