एक बेनाम रिश्ते की दहलीज पर पश्चाताप
विराज का गला सूख गया था। उसने भारी और रुंधे हुए गले से सिर्फ इतना कहा, “मुझे पता है मेरे पास तुम्हें कॉल करने का कोई हक नहीं है… लेकिन मुझे माफ कर दो अदिति। मैं उस दिन इंसान नहीं, एक अंधा और घमंडी जानवर बन गया था।” दूसरी तरफ कुछ पलों का भारी सन्नाटा … Read more