भूल सुधार – शुभ्रा बैनर्जी 

निशांत बचपन से ही बहुत संकोची स्वभाव का था।मां के सिवाय और किसी से भी खुलकर बात नहीं करता था।पति (सुशांत)हमेशा ताना देकर कहते थे निधि को”निधि कब तक तुम्हारा बेटा तुम्हारे पल्लू में छिपा रहेगा? अपने पापा से तक अजनबी जैसा व्यवहार करता है।मुझे देखते ही अंदर चला जाता है।उसे क्या तकलीफ़ है मुझसे? … Read more

*विश्वास की डोर बहुत मजबूत होता है* – तोषिका

घर में शहनाइयां बज रही है, खुशी का माहौल है। सारा शोर एक बंद दरवाजे के पीछे बंद हो गया और उस शोर में नवी को एक कड़कती आवाज आई “बहु आज से इस घर की और मेरे बेटे की जिम्मेदारी तुम्हारी है।” *१ साल बाद* आज कल आप दफ्तर से इतनी लेट आने लग … Read more

विश्वास – खुशी 

नलिन नीलू की आंखों में देख रहा था।नीलू की आंखों में पानी था।नलिन बोला नीलू मेरा एक बार एयरफोर्स में सिलेक्शन होने दो  मैं तुम्हारे पिता से तुम्हारा हाथ मांग लूंगा।अभी मेरी परिस्थिति ऐसी नहीं है।नलिन तुम मुझे भी तो समझो मै तुम्हारे बिना नहीं रह सकती।प्लीज़ नीलू कुछ दिन बस फिर हम एक होंगे … Read more

विश्वास की डोर मजबूत होती है – विनीता सिंह

मुंबई की बारिश भारी हो रही थी। लोकल ट्रेन की खिड़की से पानी की बूंदें तेजी से सरक रही थीं, जैसे शहर की भागदौड़ को धोना चाहती हों। आरव खिड़की के पास बैठा था, आंखें सूनी। उसके बगल में सोनू सो रहा था, सिर कंधे पर टिका हुआ। दोनों बचपन के दोस्त थे, धारावी की … Read more

मेघवर्णी – रीमा महेन्द्र ठाकुर

कच्ची हांडी में रखी ताजी ताड़ी बरबस उस शहरी युवक को अपनी ओर खींच रही थी । पर उससे ज्यादा आकर्षण उसे मेघा का शरीर कर रहा .देवली फलिए की मेघा किसान झीतरा भीलाल की  की बेटी थी ।तंबई रंग के बीच बीच में आबनूसी रंग का भी हल्का दबाब .उसे मेघवर्णी बना रहा था … Read more

error: Content is protected !!