भूल सुधार – शुभ्रा बैनर्जी
निशांत बचपन से ही बहुत संकोची स्वभाव का था।मां के सिवाय और किसी से भी खुलकर बात नहीं करता था।पति (सुशांत)हमेशा ताना देकर कहते थे निधि को”निधि कब तक तुम्हारा बेटा तुम्हारे पल्लू में छिपा रहेगा? अपने पापा से तक अजनबी जैसा व्यवहार करता है।मुझे देखते ही अंदर चला जाता है।उसे क्या तकलीफ़ है मुझसे? … Read more