जो बोया है वही तो काटना पड़ता है – मंजू ओमर

नीता ओ नीता अवनि और आकाश आ गए क्या, उनसे कह दो थोड़ी देर मेरे पास आकर  बैठे। और तुम भी नहीं बैठती मेरे पास बस दिनभर काम का बहाना बना कर मुझसे दूर दूर रहती हो, अमित आवाजें दे रहा था, लेकिन कोई सुन नहीं रहा था। ये रोज का हो गया था अमित … Read more

बोया, वो पाया – सुदर्शन सचदेवा

“मम्मी, ये पुरानी सिलाई मशीन कब तक संभालकर रखोगी? अब तो कोई इसका इस्तेमाल भी नहीं करता।” संजय ने स्टोर रूम की धूल साफ़ करते हुए झुंझलाकर कहा। नीरा मुस्कुराई, मशीन पर हाथ फेरा और बोली, “कुछ चीज़ें सिर्फ़ सामान नहीं होतीं बेटा… उनमें किसी की पूरी ज़िंदगी सिलाई हुई होती है।” संजय ने बात … Read more

जो बोया, वही पाया – बिमला रावत जड़धारी

रामेश्वरी की अंतिम विदाई थी। सभी रिश्तेदार और दोनों बेटियाॅं भी पहुॅंच गयी थी। सभी कह रहें थे अच्छा हुआ मुक्ती मिल गयी, बहुत कष्ट में थी। दोनों बेटियाॅं आपस में बोली, मम्मी ने जो बोया था वही पाया। दादी को कितना परेशान किया था।दादा जी तो थे नहीं, दादी जी ही थी जो गाॅंव … Read more

*जो बोया, वही पाया* – तोषिका

उसने *जो बोया, वही पाया* है, और मुझे अपनी बहु पर गर्व है, शशि की सास मीनू सीना तान कर बोली। पूरे घर में खुसुर फुसुर होने लग गई। सब आपस में ये बातें करने लग गए कि शशि अपने बेटे,राजीव; जो उसको अपनी जान से भी ज्यादा प्यारा है उस के लिए ऐसा कैसे … Read more

जो बोया वही पाया – सीमा सिंघी 

चार दिवारी के इस छोटे से कमरे में नंदनी जी का मन नहीं लग रहा था । उनका बहुत मन कर रहा था कि वह भी बेटे बहू और पोते-पोतियो के साथ बाहर घूमने जाएं। उनके संग होटल में बैठकर सुकून से कुछ पल बिताए, कुछ अच्छा खाएं क्योंकि अब तक की जिंदगी में तो … Read more

काहे मरे जा रहे हो – लतिका श्रीवास्तव 

ओ ओ काम के कीड़े ईमानदारी के भूतनाथ सुन तो भाई रुक जा थोड़ा हम भी पीछे हैं तुम्हारे….रमेश ने रघुनाथ को आवाज दी। आजा भाई आजा अपनी रफ्तार में तनिक भी कमी ना करते हुए रघुनाथ जी ने ऑफिस के दरवाजे तक तेजी से कदम बढ़ाते हुए मुस्कुरा के कहा तो रमेश ठठा कर … Read more

जो बोया वही पाया – अरुणा गर्ग

मालाजी के परिवार में उनके सास ससुर और पति ,दो बच्चे थे।वे एक तेज स्वभाव की महिला थी।जब तक उनकी सास से बनी वे बहू की पूरी मदद करतीं।माला भी अच्छी बन सहयोग ले लेती। अचानक उनकी सास को लकवे की शिकायत हो गई । उनके हाथ पैर अब कमजोर हो गये फिर भी वे … Read more

जो बोओगे वह काटोगे। – मधु वशिष्ठ

बिस्तर पर लेटे हुए ही गला सूखने लगा, घबराहट सी बढ़ने लगी।  पास में रखा पानी पिया तो उल्टी के कारण मन खराब हो रहा था किसी तरह से बॉथरूम तक पहुंची, उल्टी से सारा बाथरूम सब कुछ खराब हो गया था, बहुत मुश्किल से खुद को संभाला, किसी तरह से आकर बिस्तर पर लेटी, … Read more

कर्मों का फल – गीता वाधवानी

 अरे! यह तो वही है ना, हां लग तो रही है। एक औरत ने दूसरी से कहा। ” यही तो है कर्मों का फल, जो बोया वही पाया, हां सुमन, तुम ठीक कह रही हो। ”   सड़क पर खड़ी दो औरतों की यह बातचीत थी।      वह सड़क के किनारे मरी पड़ी थी। उसके दोनों हाथ … Read more

*जो बोया वही पाया* – पुष्पा जोशी

‘सुजाता ओ सुजाता जरा रूकों ना’ शोभा जी ने आवाज लगाई मगर शायद सुजाता जी ने सुना नहीं।  शोभा जी प्रात:कालीन भ्रमण करके घर लौट रही थी, आज कई दिनों के बाद, उन्हें उनकी सहेली सुजाता नजर आई और वे उसे आवाज लगा रही थी। उन्होंने अपनी चाल कुछ तेज कर दी वे सुजाता से … Read more

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