अब और नहीं कार्तिक – वीणा सिंह

आज माया का तीसरा दिन है आईसीयू में…माया को ब्रेन स्ट्रोक के कारण आईसीयू में एडमिट करना पड़ा है… रूपेश जी तीन दिन से पागल से हॉस्पिटल में भगवान से दुआ मांग रहे हैं अपनी जीवन संगिनी के स्वास्थ्य के लिए…

              डॉक्टर ने अचानक रुपेश जी को सूचना दी पेशेंट होश में आ गई है.. पर थोड़ी देर बाद आप देख सकते हैं.. रुपेश जी हाथ जोड़े आंख बंद किए अपने इष्ट देव को धन्यवाद दे रहे हैं…

                 कल आईसीयू में माया से मिलकर जी नहीं भरा.. दो दिन बाद वार्ड में शिफ्ट हो जाएगी तब.. अपने दिल को दिलासा दिया रुपेश जी ने..

                आज वार्ड में शिफ्ट हो गई माया.. रुपेश जी अपने हाथों में माया का हाथ लिए बैठे हैं.. मौन मुखर हो गया है.. आँखें बरस रही है रुपेश जी की.. साठ की उम्र जीवन साथी के सबसे ज्यादा साथ रहने की उम्र होती है.. शिकवे शिकायत खूबसूरती सब से दूर… ये कोई मायने नहीं रखते… बच्चे अपनी दुनिया में व्यस्त हो जाते हैं.. उस वक्त पति पत्नी हीं एक दूजे के लिए होते हैं… सुख दुःख हंसी मुस्कुराहट उदासी शेयर करने के लिए..

माया के सिरहाने बैठे बैठे रुपेश जी को नींद आ जाती है और माया विगत स्मृतियों में चली जाती है…

 कितने मन्नत के बाद कार्तिक का जनम हुआ था. किसी ने कहा मंगल करो बेटा होगा.. शादी के पांच साल बीत गए थे.. कितने व्रत उपवास किए तब कार्तिक का जनम हुआ छठ के बाद.. इसलिए नाम कार्तिक रखा.. कार्तिक के परवरिश में कोई कमी नहीं छोड़ी.. बिजली कट जाती गर्मियों की रात में तो हम पति पत्नी कंधे पर कार्तिक को पूरे रात छत पर घुमाते..

कार्तिक का एडमिशन शहर के सबसे अच्छे स्कूल में कराया.. रुपेश जी ऑफिस से आकर कपड़े की दुकान में तीन घंटे ओवरटाइम करते ताकि कार्तिक का फीस टाइम से जमा हो जाए.. प्लस टू के लिए बड़े शहर में नाम लिखाया… कार्तिक के जनम के बाद हम पति पत्नी अपना अस्तित्व कार्तिक में विलीन कर दिए.. आर्थिक अभाव को कभी कार्तिक को महसूस नहीं होने दिया.. सारे गहने धीरे धीरे बिक गए कार्तिक की पढ़ाई और उसकी छोटी बड़ी ख्वाहिशों को पूरा करने में.. गांव की जमीन और दो कमरे का ये घर हमारी संपत्ति थी.. दूसरे बच्चे के लिए नहीं सोचा कि कार्तिक को दिक्कत हो जाएगी.. बस यही कहावत याद करते पुत सपूत तो का धन संचय पुत कपूत तो का धन संचय.. पर्व त्यौहार पर कार्तिक जब नए अपने पसंद के कपड़े पहनता तो हम दोनों अपने पुराने कपड़ों में इतराते… फल दूध कितने मनुहार से खिलाती कार्तिक को.. रुपेश जी की थाली लगाती तो पूछते कार्तिक ने खा लिया.. मैं कहती हां तब फिर ठीक है कह कर खाने लगते.. अपनी पसंद इच्छाएं सब कुछ हमने कार्तिक पर वार दिया था…. तबियत खराब होने पर हम दोनों सरकारी अस्पताल में घंटों बैठे रहते और कोशिश करते बाजार से दवा खरीदना पड़े तो जेनेरिक दवाई हीं ले.. पर कार्तिक को प्राइवेट क्लिनिक में हीं बचपन से दिखाया…

इंजीनियरिंग करने के बाद कार्तिक का कैंपस सिलेक्शन हो गया.. सिलेक्शन के पहले दो दिन के लिए कार्तिक एक लड़की के साथ आया.. मैने बहुत अच्छे से दोनों का स्वागत सत्कार किया.. लड़की की आंखों में हम पति पत्नी के लिए उपेक्षा और तिरस्कार का भाव झलक रहा था जो उसके बातचीत से भी दिख रहा था.. कार्तिक जाने के पहले बोला मै निकी से शादी करूंगा.. बिना किसी भूमिका के दो टूक में अपना फैसला सुना दिया..

               ज्वाइनिंग के बाद कार्तिक अपने दोस्तों के साथ गोवा में डेस्टिनेशन वेडिंग कर लिया.. हमे सिर्फ सूचना मिली… इकलौते बेटे के लिए कितने अरमान दिल में सजा के रखे थे… पराई लड़की को क्या दोष दें जब अपना खून हीं….. एक दूसरे को हमने कैसे संभाला.. पर अंदर में कुछ टूट के बिखर हीं गया था…आज हम महसूस कर रहे थे जब #अपने पराए हो जाते हैं #तब इंसान जीते जी मर जाता है….

                कार्तिक साल भर बाद आया गांव की जमीन बेच कर मुझे पैसे दे दीजिए फ्लैट बुक करने है.. आप लोग गांव वाले घर में क्यों नहीं शिफ्ट हो जाते.. ये घर हम बेचकर डुप्लेक्स ले लेंगे… निकी की बहुत इच्छा है.. हम तो अब इधर आने से रहें.. गांव में आप लोगों को कंपनी भी मिल जाएगी.. होनी अनहोनी में काम आयेंगे… मां की ममता का इतना अपमान.. नहीं मै मां हूं पर एक स्त्री और एक पत्नी भी हूं.. अपने वजूद को बेटे के लिए मिटा दिया था पर आज मुझे अपने अधिकार के लिए बोलना होगा लड़ना होगा अपने हीं बेटे से.. मैने कहा सुनो कार्तिक गांव का जमीन तीन हिस्से में बांटी जाएगी हम दोनों पति पत्नी और तीसरा हिस्सा तुम्हारा और ये घर और जमीन मेरे नाम से है इसका तुम कुछ नहीं कर सकते.. मै इसे किसी ट्रस्ट के नाम कर दूंगी…. पैसा  अब आज के समय में बेटा का रूप हो गया है..जाओ कोई कोर्ट कचहरी..ले लो कानून से..कार्तिक बोला मरने के बाद आप दोनों की लाश लावारिसों की तरह रहेगी मै अंतिम संस्कार भी नहीं करूंगा.. मैने कहा हम अब दूहरा के मरेंगे…. रुपेश जी को तो जैसे काठ मार गया था.. और तेजी से कार्तिक घर से निकल गया..

         उसके बाद क्या हुआ मुझे पता नहीं… आज होश आने पर नर्स ने बताया मुझे ब्रेन स्ट्रोक आया था.. मेरे पति कितना रो रहे थे और डॉक्टरों से मुझे बचा लेने की आरजू मिन्नत कर रहे थे.. मां कभी अपने कोख जाये को बददुआ नहीं देती पर….

पति पत्नी का रिश्ता समय के साथ खरे कुंदन सा कैसे निखर जाता है उम्र के इस पड़ाव पर मैने बहुत अच्छे से महसूस किया है.. एक दूसरे के पूरक बन जाते हैं.. बिना किसी इगो के.. जो बहुमूल्य वक्त हमने कार्तिक के लिए गवां दिए उसे वापस तो नहीं ला सकते पर बचे वक्त को जी भर के जी लेना है.. भगवान ने मुझे दूसरा जनम शायद इसी लिए दिया है.. बेटा भले हीं अपना नहीं हुआ तो क्या हुआ इतना अच्छा जीवन साथी तो है मेरे साथ मेरा पास.. इसी के लिए मुझे जीना होगा ठीक होना है.. आंखों के कोर से ढ़लक आए आंसुओं को रुपेश जी पोंछ रहे थे.. बस अब और आंसू नहीं.. दोनों मुस्कुरा दिए..

     #   ये किसी की आपबीती है.. जिसे मैने अपनी लेखनी से टूटे फूटे शब्दों में व्यक्त करने की कोशिश की है.. भावनाओं को शब्दों में नहीं बांध पाई हूं पर कोशिश किया है..#

Veena singh 

#अपने हुए पराए #स्वलिखित सर्वाधिकार सुरक्षित #

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