दो पीढ़ियाँ, एक कप चाय
सदानंद जी ने धीमे से मुस्कराते हुए अपनी चाल चली और बोले, “बेटा, जब दो समझदार और स्वाभिमानी औरतें अपने-अपने सच को साबित करने में लगी हों, तो समझदार पुरुषों को बीच में नहीं बोलना चाहिए, बल्कि एक तीसरा रास्ता निकालना चाहिए।” सदानंद जी बिना कुछ कहे उठे, छाता उठाया और चुपचाप बाहर निकल गए। … Read more