ये कैसा बंधन है! – श्वेताअग्रवाल

जैसे ही डोरबेल बजी, निमित्त तेज़ी से उठा और दरवाज़े की तरफ दौड़ पड़ा। जब तक उसकी पत्नी वाणी किचन से निकल आई, उसने दरवाजा खोल दिया था। बाहर दरवाज़े पर डाकिया खड़ा था। उसने तुरंत उसके हाथ से लिफ़ाफ़ा लिया और उसे वहीं दरवाज़े पर खड़े-खड़े लिए खोल दिया, मानो उससे सब्र ही नहीं … Read more

ये कैसा बंधन – रेखा जैन

“मम्मी, आप ये ड्रेस ले लीजिए…” काव्या ने दुकान में रखी हल्के नीले रंग की खूबसूरत ड्रेस उठाकर अपनी सास रूपा की तरफ बढ़ा दी। रूपा ने ड्रेस को देखा और फिर अपनी बहू को प्यार भरी नजरों से देखते हुए बोलीं, “लेकिन बेटा, मैं तो सिर्फ साड़ी पहनती हूँ… ड्रेस नहीं।” “तो क्या हुआ … Read more

बंधन – खुशी

सिया और अमन की शादी को पांच साल हो गए थे।अमन एक आटोमोबाइल कंपनी में था।घर में माँ मनोरमा, पिता आदित्य और भाई रवि थे। सिया एक खुशमिजाज लड़की थी जिसने पूरे घर को अपना बना लिया। परन्तु शादी के पांच साल भी सिया की गोद नहीं भरी। डाक्टर कहते सब ठीक है ‌ पिछले … Read more

रिश्ता – डाॅ उर्मिला सिन्हा

अचानक दोनों में टक्कर हो गई। ” जरा संभल कर”। “ओह,सारी” और टकराने वाली नौ-दो ग्यारह। मिहिर के हाथ से गिलास गिर गया। गनीमत गिलास खाली था…झन्न से आवाज हुई , मिहिर ने नजरें दौड़ाई हल्का सा गुलाबी दुपट्टा दिखा। उसने देखने की कोशिश की… और आगे बढ़ गया। शादी विवाह का घर, नृत्य-संगीत, रस्मोरिवाज … Read more

कर्मों का आईना

आरव ने पलटकर अपनी माँ की आँखों में देखा। उसकी मासूमियत में एक ऐसी सच्चाई थी जो किसी भी इंसान की रूह कंपा सकती थी। उसने सहजता से कहा, “नहीं मम्मा, ये कमरा आपके और पापा के लिए है। जब आप और पापा दादा-दादी की तरह बूढ़े हो जाओगे, तो मेरी पत्नी भी तो आप … Read more

खाली मंडप

 दूसरी तरफ, कावेरी देवी की आँखों के कोर भी नम थे, लेकिन उन्होंने बहुत ही मज़बूती से खुद को संभाला हुआ था। एक माँ होने के नाते उनका दर्द शायद रघुवीर जी से भी कहीं ज्यादा था। नौ महीने कोख में रखने से लेकर उसे एक समझदार लड़की बनाने तक, कावेरी ने अपनी पूरी ज़िंदगी … Read more

**रिश्तों का अनकहा कर्ज़**

 अंजलि की आंखें नम हो गईं। उसने कहा, “भैया, मुझसे छुपाने की कोशिश मत करो। मुझे पता चल गया है कि आपके बिजनेस में पिछले महीने बहुत भारी नुकसान हुआ है और आप लोग बैंक का कर्ज चुकाने के लिए यह घर बेचने की सोच रहे हैं। उस दिन जब आप मां के कमरे में … Read more

सपनों की उड़ान और माँ का आँचल

काव्या के लिए यह जवाब किसी वज्रपात से कम नहीं था। उसने रोते हुए अपने पिता को बहुत समझाने की कोशिश की कि वह अपना ख्याल रख सकती है, वहाँ हॉस्टल में रहेगी, लेकिन दीनानाथ जी अपने फैसले पर अडिग थे। उनका प्यार और अपनी बच्ची के प्रति उनकी फिक्र इतनी हावी थी कि वह … Read more

सर्द रातों की वो खामोश गर्माहट

“हम इतनी रात को इसलिए निकलते हैं,” प्रेरणा ने आँसू पोंछते हुए कहा, “ताकि किसी को ऐसा न लगे कि हम कोई अहसान कर रहे हैं या किसी को दिखावा कर रहे हैं। हम बस चुपचाप उनके ऊपर कंबल डाल देते हैं जो ठंड से सिकुड़े हुए सो रहे होते हैं। जब वो सुबह उठकर … Read more

स्मृतियों की गूंज और एक प्याली चाय

कैलाश बाबू ने लैंडलाइन का रिसीवर जैसे ही क्रैडल पर रखा, उनके चेहरे पर एक पुरानी, जानी-पहचानी मुस्कान तैर गई। उनके मुंह से आदतन और बड़े ही उत्साह के साथ निकला, “अरे सावित्री, सुन रही हो? लखनऊ से अपने रमेश बाबू का फोन था, उनकी छोटी बेटी की शादी तय हो…”  शब्द उनके होंठों पर … Read more

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