टूटे भ्रम – निधि गुप्ता
अनामिका के लिए उसके पिता, प्रोफ़ेसर विद्यानाथ, किसी महापुरुष से कम नहीं थे। शहर के सबसे प्रतिष्ठित कॉलेज में समाजशास्त्र के विभागाध्यक्ष विद्यानाथ जी अक्सर मंचों से समानता, रूढ़िवाद के अंत और आधुनिक विचारों की बड़ी-बड़ी बातें किया करते थे। अनामिका बचपन से ही दर्शकों की पहली कतार में बैठकर अपने पिता को तालियों की … Read more