*अपने हुए पराए* – तोषिका

मां, मां कहा हो तुम? जल्दी बाहर आओ। खुशी में चिल्लाती दिया बोली। उधर रसोई से अपनी साड़ी से हाथ सुखाती हुई बाहर आते हुए उसकी मां रमा बोली “क्या हुआ बेटा? सब ठीक तो है ना?” दिया बोली हा मा सब ठीक है, अरविंद को स्कॉलरशिप मिली है, अब वो अमेरिका जाके अपनी आगे … Read more

अपने कब बन गए पराये – गीता वाधवानी  

 दरवाजे पर घंटी बजी। मां शारदा देवी ने दरवाजा खोला और अपने बेटे आयुष्मान को देखकर बोली-” अरे बेटा आज तो जल्दी आ गया पैसे तो तुझे आते आते रात के 8:00 जाते हैं। ”   आयुष्मान -” हां मां आज हम बाहर खाना खाने चलेंगे, आप तैयार हो जाओ।मैं अभी रति से भी तैयार होने … Read more

छोटा भाई है तो भाई ही रह बाप न बन मेरा – मंजू ओमर   

कहाँ से आ रहे हो तुम इतनी रात को, क्यों तू मुझसे सवाल जवाब कर रहा है, देख तू छोटा है मुझसे तो छोटे की तरह रह मेरा बाप बनने की कोशिश न कर। जब से अनिल जी गए है इस दुनिया से तब से रोज का ही किस्सा हो गया है इस घर मे … Read more

मेघवर्णी – रीमा महेन्द्र ठाकुर

कच्ची हांडी में रखी ताजी ताड़ी बरबस उस शहरी युवक को अपनी ओर खींच रही थी । पर उससे ज्यादा आकर्षण उसे मेघा का शरीर कर रहा .देवली फलिए की मेघा किसान झीतरा भीलाल की  की बेटी थी ।तंबई रंग के बीच बीच में आबनूसी रंग का भी हल्का दबाब .उसे मेघवर्णी बना रहा था … Read more

अभिमान के उस पार – सीमा गुप्ता

“ज्ञान का इतना बड़ा भंडार समेटे बैठे हैं आप, पर क्या कभी इस घर की दीवारों में कैद घुटन को भी पढ़ने की कोशिश की है, नीलकंठ?” सुमित्रा जी ने मेज पर कप रखते हुए भारी स्वर में कहा। नीलकंठ जी अखबार के पन्ने पलटते हुए गंभीर आवाज़ में बोले, “सुमित्रा, मैं अखबार की सुर्खियाँ … Read more

परायेपन का सुरक्षा कवच – लतिका श्रीवास्तव 

सावित्री सुशांत का कोई फोन आया ? सुबोध जी ने सुबह से पांचवीं बार वही प्रश्न किया तो सावित्री झुंझला गई। अरे अब काहे करेगा ऊ यहां फोन।अब ता नौकरी भी मिल गई बीबी भी मिल गई।काम खत्म मां बाप का । जब तक पढ़ाई कर रहे थे जब नौकरी नहीं मिली थी परेशान थे … Read more

मेंहदी अभियान – विभा गुप्ता

      बचपन में गर्मी की छुट्टियाँ होते ही हम सब भाई-बहन नानी घर चले जाते थें।दोपहरी में घर के बड़े आराम करते और हम छोटे खूब उधम मचाते।ऐसे में एक दिन हमारी नानी ने हम बच्चों को बगीचे से मेंहदी के पत्ते तोड़ लाने का काम सौंप दिया। हम सभी ने बड़े उत्साह से अपने-अपने रुमाल … Read more

बेटी-जंवाई तो मेहमान हैं – शुभ्रा बैनर्जी

ख़ुद के घर में रश्मि ने मां-पापा से यही सीखा था कि,घर की जिम्मेदारी भाई-बहनों की साझी होती है। बेटे और बेटी की परवरिश,पढ़ाई और खान-पान में कभी मतभेद करते नहीं हैं मां -बाप,तो उनके प्रति ,उस घर के प्रति जिम्मेदारी से मुंह कैसे मोड़ सकती हैं बेटियां। तब दादी कहतीं मां से”जमाना कितना भी … Read more

*बेटा-बहु तो अपने ही होते हैं* – तोषिका

*बेटा – बहु तो अपने ही होते है*। तुम्हारी मां के मुंह से ये वाक्य सुन सुन के मैं थक गया था। लेकिन तुम्हारी मां को अपनी औलाद पर इतना भरोसा था कि उसने मेरी एक ना सुनी। चिल्लाते हुए रमेश अपने बेटे रवि और दूर खड़ी बहु समीना को बोला। रवि कुछ बोले उस … Read more

बेटा – खुशी

निर्मला जी के दो बच्चे थे। धीरेन और दृष्टि।धीरेन बड़ा था जब वो दो साल का था तो पिता की नौकरी छूट जाने के कारण वो जमशेदपुर से दिल्ली आ गए।निर्मला का जमशेदपुर में भरा पूरा परिवार था। मां बाप ,बहने भाई पड़ोस में ही मां का पूरा परिवार रहता था।बचपन से निर्मला लाडो में … Read more

error: Content is protected !!