रिश्तों में अधिकार से ज्यादा प्रेम और भरोसे की ज़रूरत होती है? – मीना सहाय 

रक्षाबंधन का त्यौहार नज़दीक था, इसलिए कुंती अपनी भतीजी की शादी की तारीख पक्की होने की खुशी में अपने मायके, यानी अपने भाई के घर आई हुई थी। यहाँ आए उसे तीन दिन हो चुके थे, लेकिन इन तीन दिनों में उसने इस घर में जो कुछ देखा, वह उसकी अपनी सोच और जीवनशैली से … Read more

बड़ी माँ – सविता गर्ग 

“दीदी, आप हमेशा आईने के सामने इतनी देर लगाती हैं! मैं पिछले आधे घंटे से बाहर खड़ी आपका इंतज़ार कर रही हूँ, और आप हैं कि आपकी बिंदी ही सेट नहीं हो रही।” निहारिका ने अपने हाथों में पहनी कांच की चूड़ियों को खनकाते हुए अपनी बड़ी चचेरी बहन काव्या से शिकायत की। काव्या ने … Read more

विश्वास की डोर मजबूत होती है – विनीता सिंह

मुंबई की बारिश भारी हो रही थी। लोकल ट्रेन की खिड़की से पानी की बूंदें तेजी से सरक रही थीं, जैसे शहर की भागदौड़ को धोना चाहती हों। आरव खिड़की के पास बैठा था, आंखें सूनी। उसके बगल में सोनू सो रहा था, सिर कंधे पर टिका हुआ। दोनों बचपन के दोस्त थे, धारावी की … Read more

दौड़ती जिंदगी और ठहरे हुए संस्कार… – संध्या त्रिपाठी

क्यों परेशान है मिसराइन जी….. संयुक्त का हाथ पकड़ते हुए मिश्रा जी ने पूछा…  अरे कुछ नहीं मिश्रा जी… मैं तो बस ऐसे ही…  कुछ कुछ सोचती रहती हूं ना … अच्छा बताइए  आप अभी क्या सोच रही थीं …मुस्कुराते हुए मिश्रा जी ने कहा … आप हसेंगे…  तो क्या हुआ …अच्छा तो है आप … Read more

बुढ़ापा तो सब पर आना है – नीलम गुप्ता

वह इस सोसाइटी में पिछले काफी वर्षों से रह रही हैं ।घर में कोई दूसरा नहीं है ,ना पति ना बच्चे बस एक नौकरानी है जो उनके सब काम करती है। 4 वर्ष पूर्व जब हम यहां रहने आए तो सबसे पहले हमारा परिचय उन्हीं से हुआ। वह छड़ी के सहारे धीरे-धीरे चलती हुई हमारे … Read more

छोटी बहन – नीलम गुप्ता

अनुपमा उर्फ़ अनु, मेरी छोटी बहन बहुत प्यारी है l मेरा हर कहा मानती है l अपने चार साल छोटी अनु पर मैं खूब रॉब चलाती हूँ – अनु एक गिलास पानी देना l अनु मेरे बेग में से हिन्दी की किताब निकाल कर ला l मेरे कपडे में अलमारी में रख दे ! वगैरह … Read more

“अपने ही पराए ” – कमलेश आहूजा

रिया आज बहुत उदास थी क्योंकि उसने सच्चे प्यार को जो ठुकरा दिया था।और करती भी क्या वो?जिम्मेदारियों के बोझ तले दबी हुई थी।घर में कमाने वाली वो अकेली ही तो थी।पिता के जाने के छोटे भाई बहन और माँ की जिम्मेदारी उसके ही कंधों पे आन पड़ी थी।कैसे इन जिम्मेदारियों से मुँह मोड़कर अपना … Read more

अपने हुए पराए – डाॅ संजु झा

आसमान में सुबह से ही सूरज बादलों के साथ ऑंख-मिचौनी खेल रहा था।कभी बादलों की ओट में बिल्कुल छुप जाता और कभी अचानक से बादलों की ओट से निकलकर सारी पृथ्वी पर अपनी किरणों से उजाला भर जाता। जन्म के बाद से ही विदेश की धरती पर रहने पर भी अल्बर्ट को यहाॅं का मौसम … Read more

अपने हुए पराए – खुशी

अमन और नमन दोनों भाई थे।अमन बड़ा था अच्छी पोजीशन पर था।नमन छोटा था थोड़ा चुलबुला शरारती था।उधर अमन मेहनती काम के प्रति समर्पित इसी कारण वो बहुत ही कम उम्र में बहुत ऊंची पोजीशन पर पहुंच गया।नमन ने भी बीकॉम और मार्केटिंग में mba किया और उसकी भी अच्छी नौकरी लग गई। अब अमन … Read more

अपने हुए पराए – विनीता सिंह

एक गांव में राजू अपनी मां राधा के साथ रहता था ।दोनों खेती करते थे कुछ दिनों बाद राजू की शादी उसकी मां ने सीमा से करा दी सीमा बहुत सुशील संस्कारी थी उसने घर को अच्छी तरह से संभाल लिया। सबका बहुत ध्यान रखती थी और अपनी सासू मां के साथ मिलकर पूरे दिन … Read more

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