बेटी-जंवाई तो मेहमान हैं – शुभ्रा बैनर्जी
ख़ुद के घर में रश्मि ने मां-पापा से यही सीखा था कि,घर की जिम्मेदारी भाई-बहनों की साझी होती है। बेटे और बेटी की परवरिश,पढ़ाई और खान-पान में कभी मतभेद करते नहीं हैं मां -बाप,तो उनके प्रति ,उस घर के प्रति जिम्मेदारी से मुंह कैसे मोड़ सकती हैं बेटियां। तब दादी कहतीं मां से”जमाना कितना भी … Read more