अकेलापन

कमरे में खामोशी इतनी गहरी थी कि दीवार पर टंगी घड़ी की सुइयों की टिक-टिक भी किसी हथौड़े की चोट की तरह महसूस हो रही थी। विक्रम बेड के किनारे बैठा था, उसके हाथों में एक अस्पताल की फाइल थी और उसकी नजरें सामने ड्रेसिंग टेबल के पास खड़ी काव्या पर टिकी थीं। काव्या अपने … Read more

 सच्चे धागे

विशाखा जब से अनुराग के घर ब्याह कर आई थी, पूरे घर में अक्सर उसी के स्वभाव की चर्चा दबी जुबान में होती रहती थी। विशाखा एक बहुत ही शांत, गंभीर और कम बोलने वाली लड़की थी। वह पेशे से एक बैंक अधिकारी थी और उसे फालतू की गपशप, मोहल्ले की औरतों के साथ बैठकर … Read more

 बहू कम और बेटी ज्यादा

“रोहन, तुम किसी भी गलतफहमी में मत रहना। मैं तुम्हारी माँ की तीमारदारी करने के लिए वहाँ बिल्कुल नहीं जा रही हूँ।” श्रुति ने अपने बैग में लैपटॉप रखते हुए बहुत ही सपाट और कठोर स्वर में कहा। रोहन ने अभी-अभी फोन रखा था और वह गहरी चिंता में था। फोन उसके गृहनगर से था। … Read more

सच्ची मां

“अंजलि बेटा, जरा बाहर आना।” सुमित्रा जी ने अपनी अलमारी को ताला लगाते हुए अपनी नई नवेली बहू अंजलि को आवाज दी। अगले ही पल अंजलि रसोई से अपने हाथ पोंछती हुई बाहर आ गई। उसकी आंखें थोड़ी सूजी हुई थीं और चेहरा उतरा हुआ था। सुमित्रा जी ने अंजलि को हिदायत देते हुए कहा, … Read more

तोहफे की कीमत…

सुबह की भागदौड़ के बीच, जब घर में नाश्ते की खुशबू और कुकर की सीटियों का शोर गूंज रहा था, तभी दरवाजे से बाहर निकलते हुए समीर ने अपनी पत्नी काव्या को आवाज लगाई। “काव्या, सुनो! आज शाम को जल्दी तैयार हो जाना। तुम्हें याद है न, हमारे पुराने पड़ोसी माथुर अंकल की बेटी की … Read more

असली न्याय

“मालिक, ऐसा गज़ब मत बोलिए। वो आपकी भी बेटी जैसी है। अगले महीने उसके हाथ पीले होने वाले हैं। मैं खून-पसीना एक करके आपका एक-एक पैसा चुका दूँगा, बस मेरी बच्ची की तरफ आँख मत उठाइए।” लेकिन समर सिंह ने एक ज़ोरदार लात रामदीन के सीने पर मारी और अपने दोस्तों के साथ भद्दे ठहाके … Read more

“संस्कारों की सौगात ” – कमलेश आहूजा

घर में आज सुबह कुछ अलग-सी हलचल थी।शब्द कम थे,मुस्कानें ज़्यादा थीं और इशारों में जैसे कोई छोटा-सा राज़ पल रहा था।रोहन और नेहा कभी धीमे स्वर में बातें करते,तो कभी एक-दूसरे को देखकर मुस्कुरा देते।यह सब देखकर सरोज को लग रहा था,कि ज़रूर कोई ऐसी बात है जो उनसे छिपाई जा रही है। “क्या … Read more

सच्ची कमाई

साठ वर्षीय सुलोचना जी अपने दोनों हाथों में ताजी सब्जियों, फलों और कुछ घरेलू सामानों से भरे भारी थैले पकड़े, अपनी सोसायटी के मुख्य गेट से अंदर दाखिल हो रही थीं। उम्र के इस पड़ाव पर घुटनों में गठिया का दर्द अक्सर उन्हें परेशान करता था, लेकिन आज उनके चेहरे पर एक अजीब सी ऊर्जा … Read more

 रिश्ते चलते हैं बराबरी से

मीरा के हाथों में वह कागज का टुकड़ा बुरी तरह से कांप रहा था। वह कोई मामूली कागज नहीं था, बल्कि समीर की कंपनी से आया हुआ ‘रिलीविंग लेटर’ था। कमरे में पसरा सन्नाटा इतना गहरा था कि मीरा को अपनी ही धड़कनें सुनाई दे रही थीं। सामने पलंग पर बैठा समीर नजरें झुकाए अपने … Read more

अजनबी

रोहन जैसे ही थका-हारा दफ्तर से घर लौटा, सोफे पर बैठी उसकी पत्नी रिया का पारा सातवें आसमान पर था। रोहन ने अभी अपने जूतों के फीते खोले ही थे कि रिया की तीखी आवाज पूरे ड्रॉइंग रूम में गूंज उठी, “मैं अब और बर्दाश्त नहीं कर सकती रोहन! तुम्हारी माँ से एक छोटा सा … Read more

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