सच्ची मां

“अंजलि बेटा, जरा बाहर आना।” सुमित्रा जी ने अपनी अलमारी को ताला लगाते हुए अपनी नई नवेली बहू अंजलि को आवाज दी। अगले ही पल अंजलि रसोई से अपने हाथ पोंछती हुई बाहर आ गई। उसकी आंखें थोड़ी सूजी हुई थीं और चेहरा उतरा हुआ था। सुमित्रा जी ने अंजलि को हिदायत देते हुए कहा, … Read more

तोहफे की कीमत…

सुबह की भागदौड़ के बीच, जब घर में नाश्ते की खुशबू और कुकर की सीटियों का शोर गूंज रहा था, तभी दरवाजे से बाहर निकलते हुए समीर ने अपनी पत्नी काव्या को आवाज लगाई। “काव्या, सुनो! आज शाम को जल्दी तैयार हो जाना। तुम्हें याद है न, हमारे पुराने पड़ोसी माथुर अंकल की बेटी की … Read more

असली न्याय

“मालिक, ऐसा गज़ब मत बोलिए। वो आपकी भी बेटी जैसी है। अगले महीने उसके हाथ पीले होने वाले हैं। मैं खून-पसीना एक करके आपका एक-एक पैसा चुका दूँगा, बस मेरी बच्ची की तरफ आँख मत उठाइए।” लेकिन समर सिंह ने एक ज़ोरदार लात रामदीन के सीने पर मारी और अपने दोस्तों के साथ भद्दे ठहाके … Read more

“संस्कारों की सौगात ” – कमलेश आहूजा

घर में आज सुबह कुछ अलग-सी हलचल थी।शब्द कम थे,मुस्कानें ज़्यादा थीं और इशारों में जैसे कोई छोटा-सा राज़ पल रहा था।रोहन और नेहा कभी धीमे स्वर में बातें करते,तो कभी एक-दूसरे को देखकर मुस्कुरा देते।यह सब देखकर सरोज को लग रहा था,कि ज़रूर कोई ऐसी बात है जो उनसे छिपाई जा रही है। “क्या … Read more

सच्ची कमाई

साठ वर्षीय सुलोचना जी अपने दोनों हाथों में ताजी सब्जियों, फलों और कुछ घरेलू सामानों से भरे भारी थैले पकड़े, अपनी सोसायटी के मुख्य गेट से अंदर दाखिल हो रही थीं। उम्र के इस पड़ाव पर घुटनों में गठिया का दर्द अक्सर उन्हें परेशान करता था, लेकिन आज उनके चेहरे पर एक अजीब सी ऊर्जा … Read more

 रिश्ते चलते हैं बराबरी से

मीरा के हाथों में वह कागज का टुकड़ा बुरी तरह से कांप रहा था। वह कोई मामूली कागज नहीं था, बल्कि समीर की कंपनी से आया हुआ ‘रिलीविंग लेटर’ था। कमरे में पसरा सन्नाटा इतना गहरा था कि मीरा को अपनी ही धड़कनें सुनाई दे रही थीं। सामने पलंग पर बैठा समीर नजरें झुकाए अपने … Read more

अजनबी

रोहन जैसे ही थका-हारा दफ्तर से घर लौटा, सोफे पर बैठी उसकी पत्नी रिया का पारा सातवें आसमान पर था। रोहन ने अभी अपने जूतों के फीते खोले ही थे कि रिया की तीखी आवाज पूरे ड्रॉइंग रूम में गूंज उठी, “मैं अब और बर्दाश्त नहीं कर सकती रोहन! तुम्हारी माँ से एक छोटा सा … Read more

पिता की सीख

“पापा, बस बहुत हो गया! मैं अब इस घर में एक पल भी और नहीं रह सकती। रोहन और उसके परिवार की पिछड़ी हुई सोच के साथ मेरा दम घुटता है। अगर आप कल सुबह तक यहाँ नहीं आए, तो मैं अकेले ही डिवोर्स के पेपर फाइल कर दूँगी।” काव्या ने बिना कोई जवाब सुने … Read more

फैमिली कोर्ट

पारिवारिक अदालत के बाहर आज एक अजीब सी तपिश थी। धूप से ज्यादा गर्मी सुमित्रा देवी के चेहरे की चमक में थी। वो अदालत की सीढ़ियां ऐसे उतर रही थीं जैसे कोई बहुत बड़ा युद्ध जीतकर आई हों। उनकी चाल में एक गुरूर था, आंखों में एक विजयी चमक और होंठों पर एक ऐसी मुस्कान … Read more

दर्द के आँसू

“अरे सुधा दीदी, ज़रा फोन में देखिए तो, कल्याणी की बहू अंजलि ने अपनी सास के साथ की फोटो लगाकर स्टेटस में लिखा है- ‘मिस यू माँ, आपकी जगह कोई नहीं ले सकता।’ अब आप ही बताइए, क्या कभी किसी बहू को सास के मरने का सच में कोई दुख होता है? ये सब तो … Read more

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