चेहरे के ऊपर चेहरा रखती हो तुम बहू – मंजू ओमर

और भाई अम्मा कहां है दिखाई नहीं दे रही  हैं। अजय ने बड़े भाई विजय से पूछा, अरे वह अंदर है, वह देखो आ गई। अरे अजय आया है क्या आज। हां माँ बहुत दिन हो गए थे तुमसे मिले हुए तो आ गया तुमसे मिलने । अजय  और पत्नी सुमन ने झुक कर माँ  के पैर छुए । और कैसी है मां छोटी बहू सुमन बोली ठीक हूं अम्मा बोली ।

अजय बोला मां बड़े भैया भाभी ने तो आपकी बहुत सेवा कर ली अब हमारे पास भी चल कर रहो कुछ दिन। मुझे भी अपनी सेवा का मौका दो। हां मां हमारे पास भी रहो सुमन बोली । तभी माँ पुष्पा जी बोली ठीक है किसी दिन का क्या आज ही चलती हूं तेरे साथ।

तू गाड़ी लेकर आया है ना, हां मां तभी सुमन बोल पड़ी चिंटू की परीक्षा खत्म हो जाने दो तो माँ को ले चलते हैं। अरे नहीं मां आज ही चलेगी अजय बोला। चिंटू अपनी परीक्षा देता रहेगा उससे मां का क्या लेना देना। ठीक है तो भाभी आप माँ की तैयारी कर दे उनके कपड़े और जरूरी सामान और दवाइयां वगैरह रख दें।

हां मैं कर देती हूं मां की तैयारी बड़ी बहू संगीता बोली। सुमन मां को थोड़ी कमजोरी है ध्यान रखना। हां भाभी खूब अच्छे से ध्यान रखूंगी ।

अच्छा खिलाऊंगी पिलाऊंगी तो मां जल्दी ठीक हो जाएगी। यहां आपके यहां तो मां को साधारण सा ही खाना मिलता होगा क्योंकि भाई साहब की इतनी तनख्वाह नहीं है । लेकिन मेरे यहां उन्हें कोई परेशानी नहीं होगी अच्छे से अच्छा ख्याल   रखूगीं और खिलाऊंगी पिलाऊगीं।। 

                 अजय और सुमन अम्मा को लेकर घर आ गए। अजय ने सुमन से कहा देखो मां को अच्छे से ख्याल रखना और उनके खाने पीने पर भी ध्यान रखना। और हां मां को कौन सी दवाई किस समय देनी है यह भाभी से पूछ लेना। अजय का पांच साल का बेटा था चिंटू वो दादी के आ जाने से बहुत खुश था ।

दादी दादी अब आप हमसे बात करोगी ना मेरे संग खेलोगे ना, हां बेटा वह सब करूंगी जो तू कहेगा।यह क्या हो रहा है कमरे में सो जाकर सुबह स्कूल जाना है ना। अरे थोड़ी देर बैठ लेने दे मेरे पास पुष्पा जी ने कहा, अरे नहीं मां इसकी आदत नहीं खराब करो सोने जाने दो सुबह स्कूल जाना है। 

              पुष्पा जी को छोटे बेटे के यहाँ आए  पूरा दिन निकल गया ।सुमन ने माँ की की दवाइयां के बारे में जानकारी नहीं ली।आज जब अजय ऑफिस के लिए तैयार हो रहा तो अजय ने पूछा अम्मा आपने अपनी दवाइयां ले ली कि नहीं, मैं सुमन से कह दिया था कि वह आपको दवाई दे दे पूछ कर   बड़ी भाभी से।

कौन सी दवाई किस समय खानी है । नहीं बेटा अभी तो नहीं खाई जरा फोन लगा दे अपनी बड़ी भाभी को तो उनसे पूछ लूं।सुमन ने नहीं पूछा क्या मैं तो उसको बोल कर गया था। तभी अजय ने आवाज दी सुमन और सुमन तुमने मां की दवाइयां के बारे में भाभी से नहीं पूछा।

अरे टाइम कहां मिला कल से दिन भर काम ही तो करती रही हूँ।अम्मा जी के आ जाने से मेरा काम तो और बढ़ गया है। यह सुनकर अम्मा सोचने लगी देखो तो कैसे दोहरे चेहरे रखती है वहां कह रही थी कि मेरे घर चलिए मुझे भी सेवा का मौका दीजिए और यहां कैसी बात कर रही है। 

                 आज सुबह-सुबह फोन की घंटी बजी वहां पर कोई नहीं था सिर्फ अम्मा थी, ,उन्होंने फोन उठा लिया बड़ी बहू का फोन था।।हेलो अम्मा कैसी हो सुमन‌ ढंग से आपका ख्याल रख रही है कि नहीं। हां बहू सब ठीक है इतनी बात की थी कि सुमन वहां आ गई ।

और आप किससे बात कर रही है ,अम्मा जी आपको क्या जरूरत है फोन उठाने की। अरे बहु यहां पर कोई था नहीं इसलिए मैंने फोन उठा लिया था । भाभी से मेरी बुराई कर रही होगी मैं क्यों बुराई करने लगी भला। यह मुझे फोन दीजिए आप मत उठाया करिए। 

               अजय और विजय दो भाई थे उनके पिताजी नहीं थे ।। बड़ा भाई अजय किसी फैक्ट्री में काम करता था। उसकी आर्थिक स्थिति बहुत अच्छी नहीं थी । लेकिन वही अजय मोटर पार्ट्स का बिजनेस करता था । उसे ससुर से बिजनेस करने में मदद मिली थी ।

अजय की आर्थिक स्थिति अच्छी थी इस बात को लेकर दिखावा चलता रहता था दोनों देवरानी जेठानी मे।सुमन दिखाती थी कि हम रईस है और तुम्हारे पास तो कुछ भी नहीं है।

आर्थिक स्थिति अच्छी न होने को भी विजय मां को अच्छे से रखता था । मैं भी माँ  को  अच्छे से रख सकता हूं । और अच्छे से खिला पिला सकता हूं। इस चक्कर में छोटा बेटा बहू उनका घर ले आए थे । अजय तो ठीक था लेकिन सुमन ढोंग करती थी की मां को अच्छे से रख रही है दोहरी चेहरे थे उसके। 

         आज अजय और माँ  जी सब खाना खाने बैठे तो अजय बोला पुलाव बहुत अच्छा लग रहा है बिलकुल पहले वाला स्वाद आ रहा है । जैसे माँ जी आप बनाए करती थी। हां बेटा इतना कहना था क्या आपने बनाया है हां ,,अरे इतना कहना था की सुमन झट से बोल पड़ी अरे बनाया तो मैने ही है वह माँ से पूछ पूछ कर अभी और भी चीजे सिख लूंगी माँ से।  पुलाव माँ ने ही बनाया था सुमन की बातें सुनकर अम्मा उसका मुंह देखने लगी। 

        दूसरे दिन दोपहर को अम्मा ने कहा सुमन खाना बन गया क्या मुझे दोपहर की दवा खानी है। अभी तो नाश्ता किया है आपने अभी फिर से भूख लग गई। अरे 2:00 बज रहे हैं मुझे खाने के बाद दवा लेनी होती है। अच्छा ज्यादा भूख लग रही है तो फ्रीज में कल का दाल चावल रखा है गर्म करके खा लें।

हे भगवान कितनी भूख लगती है सुमन बोली। अम्मा को यहां परेशानी हो रही थी कुछ भी समय पर नहीं हो रहा था। नहीं खाने पीने का ध्यान रखा जा रहा था। लेकिन वह फिर भी चुप थी । अब बड़े बेटे के यहां भी नहीं जा सकती थी अभी क्या 15 दिन ही तो हुए है यहां आए।

कुछ बात पता चली यहां की तो दोनों भाइयों में आपस में खटास हो जाएगी। अम्मा को पता था जितना बड़ी बहू ध्यान  रखती थी उतना तो सुमन नहीं रख सकती।वह तो पैसे घमण्ड मे मुझे यहां ले आई थी ,की बड़ी से अच्छा खाना पीना करूगीं पर यहां तो समय से चाय नाश्ता भी नहीं  मिलता। मन मसोसकर रह जा रही थी अम्मा। 

                 आज शाम की चाय अभी तक अम्मा को नहीं मिली थी। शाम के छै बज रहे थे। अम्मा उठी और अपने आप ही चाय बनाने को रसोई मे चली गई।।वो चाय लेकर कमरे तक आ ही रही थी कि जाने कैसे कुछ चक्कर सा आया और अम्मा के हाथ से चाय का कप नीचे गिर गया।

तभी सुमन दौडकर आई और चिल्लाने लगी अरे क्या तोड दिया। हाय मेरा इतना महंगा कप का सेट तोड दिया। क्या जरूरत थी आपको चाय बनाने की। अभी मै बनाती तो दे देती। मै तो आपको यहाँ लाकर परेशान हो गई हूँ जरा सा चैन नहीं देने देती।

तभी बाहर से अजय के साथ बडे भइया और भाभी अंदर आए। उन्होंने देखा कि सुमन अम्मा से बदसलूकी कर रही है। बड़ी बहु चिल्लाई ये क्या सुमन तुम अम्मा के साथ कैसा व्यवहार कर रही हो। यदि तुम समय पर चाय बना कर अम्मा को दे देती तो भला वो क्यों बनाती।

तभी अजय ने एक थप्पड़ सुमन के मुंह पर मार दिया। मै नहीं जानता था सुमन कि तुम माँ के साथ ऐसा व्यवहार करती हो। तुम मेरे सामने कुछ और होती थी और मेरे पीठ पीछे कुछ औ्र। आज मै सही मायने मे देख पाया तुम्हारा ये दोहरा चेहरा। 

          अम्मा आपने भी नहीं बताया कि सुमन आपके साथ अच्छा व्यवहार नहीं करती है। मै क्या बताती बेटा। कुछ कहने से घर मे तुम दोनों मे लडाई झगड़े होते। तभी अम्मा का बड़ा बेटा विजय आगे बढकर बोला अम्मा बहुत हो गया अब आप मेरे साथ चल  रही हो। यहाँ नहीं रहना आपको जहाँ इज्जत न मिले।

दोगले लोग है ये चलो अपने घर चलो। और बडी बहू संगीता अम्मा का सारा सामान समेटने लगी। अम्मा को घर ले आई। अम्मा अब आप यहाँ ही रहे हमारे साथ। आपको कहीं जाने की जरूरत नहीं है। आपके आशीर्वाद से मेरा प्रमोशन हो गया है और सैलरी भी बढ गई है।

आपको कोई तकलीफ नही होगी। तकलीफ कैसी बेटा तुम लोग तो मेरा इतना ख्याल रखते हो। मै तो तेरे साथ कम मे ही खुश थी। नहीं चाहिए मुझे दोहरे चेहरे वाले लोग। मुझे नहीं जाना वहाँ‌ यही रहूंगी तेरे पास जबतक जिन्दा हूँ। हाँ माँ तेरे आशीर्वाद से मेरा घर ऐसे ही फलता फूलता रहे बस और कुछ नहीं चाहिए। 

मंजू ओमर

झांसी उत्तर प्रदेश

9 अगस्त

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