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बुढ़ापे में माता-पिता लाचार हो जाते हैं
“पापा, मम्मी, आप दोनों जल्दी से अपना सामान समेट लीजिए। तीन बजे तक निकलना सही रहेगा। अगर और देर हुई तो एक्सप्रेसवे के ट्रैफिक में बुरी तरह फंस जाएंगे और रात हो जाएगी,” विकास ने अपनी कलाई घड़ी देखते हुए एक व्यापारिक लहजे में कहा। विकास की इस बात को सुनकर दीनानाथ जी का चेहरा … Read more
घर-घर की कहानी
सुनीता देवी अपनी इकलौती बेटी काव्या को लेकर पारिवारिक न्यायालय के बाहर बने काउंसलिंग सेंटर में बैठी थीं। उनके चेहरे पर गुस्सा, चिंता और एक अजीब सी जिद साफ झलक रही थी। उनके ठीक सामने वाली कुर्सी पर उनका दामाद रोहन और उसके माता-पिता खामोश बैठे थे। काव्या की आँखें सूजी हुई थीं, जैसे वह … Read more
सोने का हार
मीरा ने महीने भर के राशन का हिसाब डायरी में लिखकर जैसे ही मेज़ पर रखा, सामने बैठे उसके पति सुधीर ने तुरंत डायरी उठा ली। सुधीर की आदत थी कि वह घर खर्च के लिए दिए गए पैसों का एक-एक रुपये का हिसाब मांगता था। पंद्रह रुपये का हिसाब डायरी में नहीं था, और … Read more
पिता का न्याय
रमाकांत जी के पचहत्तरवें जन्मदिन का जश्न पूरे शबाब पर था। घर के बड़े से लॉन में रिश्तेदारों और जान-पहचान वालों की भीड़ जमा थी। चारों तरफ रोशनी, फूलों की सजावट और हंसी-मज़ाक का माहौल था। केक काटने की रस्म के बाद रमाकांत जी ने अपने दोनों बेटों और बहुओं को मंच पर बुलाया। यह … Read more
बहू को बेटी बनने समय तो लगता है
अलार्म की तीखी आवाज़ ने काव्या की नींद तोड़ दी। उसने फोन की स्क्रीन पर समय देखा—सुबह के साढ़े पाँच बज रहे थे। नवंबर की हल्की ठंड में रजाई से बाहर निकलने का बिल्कुल मन नहीं था, लेकिन रसोई की जिम्मेदारियां उसे पुकार रही थीं। काव्या की शादी को अभी महज़ आठ महीने ही हुए … Read more
संस्कारों की कद्र
“सुषमा जी, देखिए हमारे पंडित जी ने कहा है कि अगले महीने की पंद्रह तारीख का मुहूर्त सबसे उत्तम है। इसके बाद तो सीधा छह महीने तक कोई शुभ मुहूर्त नहीं है। हम चाहते हैं कि शादी इसी मुहूर्त में हो जाए। आखिर हमें भी तो अपने रिश्तेदारों को जवाब देना होता है।” फोन के … Read more
प्यार हमेशा पाने का नाम नहीं होता
जब वह लाल जोड़े में सजी, रोते हुए गाड़ी में बैठ रही थी, तो उसकी नज़रें भीड़ में मुझे ही तलाश रही थीं, लेकिन मैं एक खंभे के पीछे छिप गया था। मैं उसे अलविदा कहने की हिम्मत नहीं जुटा पाया था। आज उसकी शादी को छः महीने बीत चुके हैं। कल ही वह पहली … Read more
एक माँ का दिल
रमा देवी गैस के पास खड़ी होकर अपने पच्चीस साल के बेटे कबीर के लिए टिफिन पैक कर रही थीं। डाइनिंग टेबल पर बैठे उनके पति, आनंद जी, अपने चश्मे को नाक पर टिकाए अख़बार की सुर्ख़ियों में खोए हुए थे। घर का माहौल बिल्कुल वैसा ही था जैसा किसी भी आम मध्यमवर्गीय परिवार का … Read more