दो परिवारों की इज्जत

कॉलेज की कैंटीन के उस शांत कोने में आज एक अजीब सी बेचैनी थी। मेज के दोनों तरफ बैठे शिवानी और विकास के बीच पिछले दस मिनट से कोई बात नहीं हुई थी। शिवानी की आँखें सूजी हुई थीं और वह लगातार अपने दुपट्टे के छोर को उंगलियों में लपेट रही थी। विकास ने गहरी … Read more

बहू भी इस घर का हिस्सा है

अंजलि जब लाल जोड़े में सजी-धजी इस घर की चौखट पर आई थी, तो उसकी सास सुमित्रा देवी ने आरती उतारते हुए बहुत ही मीठे स्वर में कहा था, “बहू, आज से यह घर तुम्हारा है। मेरी तो उम्र हो गई है, अब तुम्हें ही यह पूरी गृहस्थी संभालनी है।” उस दिन अंजलि की आँखों … Read more

एक माँ की दूरदर्शिता

दीनानाथ जी के जीवन का एक बहुत बड़ा अध्याय आज समाप्त हो गया था। आज उनकी सरकारी नौकरी का आखिरी दिन था और उनके सेवानिवृत्ति (रिटायरमेंट) का एक छोटा सा समारोह घर पर ही रखा गया था। घर में रिश्तेदारों और परिचितों की चहल-पहल थी, लेकिन अब रात के दस बज चुके थे और लगभग … Read more

संस्कार – खुशी

कविता एक भरे पूरे परिवार की बेटी थी। मास्टर्स किया हुआ था।परिवार में पिताजी  राम कुमार जो पेशे से एक व्यवसाई थे।उनका डिस्पोजेबल का बिजनेस था।दो भाई नितिन और सचिन भी पिताजी का कारोबार देखते थे। उनकी पत्नियां सुमन और  विजया उनके दो दो बच्चे बड़े भाई के दो बेटे राहुल और संजय और छोटे … Read more

*एक बहु की समझदारी* – तोषिका

बधाई हो रमा जी, बधाई हो। ये रिश्ता पक्का हुआ, गले लगते हुए मीनू बोली। जी आपको भी बधाई हो , रमा बोली। मीनू का बेटा रमन उधर दूर खड़ा था। मीनू ने उसको बुलाया और कहा कि, “बेटा आकर अपनी होने वाली सास के पैर छू।” रमन का थोड़ा मुंह बना पर वो आ … Read more

तलाक – मंजु घोष 

“काव्या, तुम परेशान मत होना। लेकिन मुझसे रहा नहीं गया, इसलिए पूछ रहा हूँ। मुझे किसी से पता चला कि तुम्हारे और समीर के बीच आजकल कुछ भी ठीक नहीं चल रहा है। बात यहां तक पहुँच गई है कि तुम दोनों अलग होने का मन बना चुके हो और तलाक की नौबत आ गई … Read more

सम्मान का मोल – रीमा साहू

सर्दियों की एक सर्द शाम थी, जब सुमेधा अपने कमरे में बैठी हुई फोन के रिसीवर को अपने हाथों में पकड़े हुए सुन्न सी रह गई थी। बाहर हल्की-हल्की धुंध छाने लगी थी, लेकिन सुमेधा के मन के भीतर विचारों का एक घना कोहरा उमड़ पड़ा था। फोन कट चुका था, लेकिन दूसरी तरफ से … Read more

असली राजकुमार

रामनारायण जी ने अपने दोनों बेटों, सूरज और मयंक का विवाह कराकर घर में दो सर्वगुण संपन्न बहुओं का प्रवेश कराया था। रितु और कविता, दोनों ही बहुएँ स्वभाव से बहुत ही संस्कारी और घर को बांध कर रखने वाली थीं। देखते ही देखते दो-तीन सालों के भीतर घर का आँगन पोते-पोतियों की किलकारियों से … Read more

कंगन की गूंज – निभा राजीव “निर्वि”

“एक मां ने अपनी बेटी के लिए वो दुनिया चुनी जो समाज की नजर में ‘उतरन’ थी, लेकिन उस दुनिया में बेटी को वो मिला जो मां ने पूरी जिंदगी खोया था।” शादी की शहनाई की आवाज़ के बीच, हर तरफ जश्न का माहौल था। रंग-बिरंगे कपड़ों में सजी-धजी औरतें, मेहमानों की हंसी-ठिठोली और पकवानों … Read more

ऑनलाइन ज़िंदगी – मुकेश पटेल 

रामकिशोर जी ने अपने चश्मे को नाक पर थोड़ा ऊपर खिसकाया और हाथ में पकड़े हुए त्यागपत्र (Resignation Letter) को दोबारा पढ़ा। उनके हाथ हल्के से काँप रहे थे। सामने उनका बेटा मोहित सोफे पर टांग पर टांग चढ़ाए अपने मोबाइल में कुछ टाइप कर रहा था, उसके चेहरे पर एक अजीब सी बेफिक्री थी। … Read more

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