स्वाभिमान की रक्षा – गीता वाधवानी

 सुबह 5:00 का अलार्म बड़ी तेज बज रहा था। निधि का बिल्कुल उठने का मन नहीं कर रहा था। वह बहुत ही थकी हुई थी। लेकिन मन मार कर आखिर उठाना ही पड़ा क्योंकि उसे ऑफिस पहुंचने में रोज देर हो जाती थी और घर के काम भी निपटाने  होते थे। 

    वह जल्दी से नहा धोकर कपड़े बदलकर आ गई और रसोई में जाकर चाय बनाने लगी। तभी सासू मां की आवाज सुनाई दी -” निधि, और कितनी देर लगेगी चाय में, तुम बहुत ही धीरे-धीरे काम करती हो, ना जान तुम्हें कब समझ आएगी? ” 

 निधि को सब कुछ चुपचाप सुनने की आदत थी। उसने कुछ नहीं कहा और चुपचाप जाकर सास को चाय और रस देकर आ गई। 

 तभी उसका पति राकेश चिल्लाया -” निधि मेरा लंच पैक कर दो और मुझे नाश्ता दे दो, मुझे देर हो रही है। ”          गीता वाधवानी 

 निधि ने कहा-” अभी तो तुम्हारे जाने में बहुत समय है, 10 मिनट रुक जाओ। जब तक नाश्ता खाओगे तब तक मैं तुम्हारा लंच पैक कर दूंगी। ” ऐसा कहकर वह राकेश को चाय और टोस्ट देने आ गई। तब तक राकेश का पारा हाई हो चुका था। उसने अचानक निधि के गाल पर एक थप्पड़ जड़ दिया। निधि रोती हुई वहां से चली गई और उसका लंच पैक करने लगी। 

      तभी निधि की बेटी परिधि ने आवाज लगाई -” मम्मी आपको बताया था ना, मेरी एक्स्ट्रा क्लास है, मुझे जल्दी स्कूल जाना है। आपको तो मेरे बोर्ड एग्जाम की कोई चिंता नहीं है। जल्दी से मेरा लंच पैक कर दो, वरना मैं ऐसे ही चली जाऊंगी। आपसे कोई काम ढंग से नहीं होता। ” 

 निधि सबकी बातें सुन रही थी और उसे ऑफिस पहुंचने की भी चिंता थी। उसने फटाफट थप्पड़ से पड़े निशान पर मेकअप लगाया और जल्दी से सड़क पर पहुंच गई। उसने कई बार राकेश को कहा था कि मुझे थोड़ी दूर तक छोड़ दिया करो, वहां पर आसानी से मिल जाते हैं, लेकिन वह उसकी कभी नहीं सुनता था। 

       सास कहती थी कि हमारे ऊपर कौन सा एहसान कर रही हो,अगर तुम नौकरी पर जा रही हो। घर का काम करना तुम्हारा फर्ज है। वह खुद निधि की बिल्कुल हेल्प नहीं करवाती थी। शाम को वापस आकर निधि को खुद ही डिनर बनाना पड़ता था। यहां तक की सासू मां सब्जी काट कर भी नहीं रखती थी। 

     निधि को ऑफिस पहुंचने में देर हो गई थी। बॉस ने उसे खूब खरी खोटी सुनाई। जब वह केबिन से बाहर आई तो उसकी आंखों में आंसू थे। उसे भावनात्मक रूप से सहारा देने के बहाने उसके कलीग ने उसके कंधे पर हाथ रख और उसे बुरे ढंग से सहलाने लगा और कहने लगा-” निधि तुम बहुत सुंदर हो, इतनी चिंता मत किया करो, मैं हूं ना तुम्हारे साथ। मेरी दोस्ती को स्वीकार कर लो, सब कुछ ठीक कर दूंगा। ” 

 निधि उसका हाथ झटक कर चली गई। 

 वापसी में उसे बस से वापस आना पड़ा। बस में एक आदमी ने एक लड़की को छेड़ दिया था। उसे लड़की ने उसे बहुत मारा। सबने उस लड़की का साथ दिया और बस को पुलिस स्टेशन की तरफ मोड़ दिया। उसे गुंडे को पुलिस के हवाले कर दिया। 

 तब निधि को लगा कि यह छोटी लड़की अपनी इज्जत के लिए एक गुंडे को पीट सकती है तो क्या मैं इतनी बड़ी होकर अपने स्वाभिमान की रक्षा नहीं कर सकती। मुझे खुद के लिए खड़ा होना ही होगा। मुझे गलत का विरोध करना ही होगा। अपने स्वाभिमान की रक्षा मैं खुद नहीं करूंगी तो कौन करेगा।

 गीता वाधवानी  

 तब निधि ने मन ही मन एक फैसला ले लिया था। सुबह 5:00 का अलार्म बज रहा था। वह उठी नहा धोकर रसोई में चाय बनाने गई। 

 तभी सास की आवाज आई-” निधि, क्या आज चाय मिलेगी, कब से उठकर बैठी हूं, तुम्हारी मां ने क्या तुम्हें यही संस्कार दिए हैं कि सास भूखी प्यासी बैठी रहे। ” 

     निधि-” मां जी, मेरी मां को बीच में मत लाइए, मेरी मां ने मुझे बहुत अच्छे संस्कार दिए हैं, भगवान की दया से आप भी अच्छी खासी चल फिर सकती हैं तो क्या आप एक कप चाय बना नहीं सकती, मुझे सुनाने का आपको बहाना चाहिए। ” इतना कह कर वह चाय और रस सास को देकर चली गई। 

 सास तुरंत उठकर अपने बेटे के पास गई और बोली-” आज तो यह उलटे जवाब दे रही है, सुना तूने। ” 

 तब राकेश चिल्लाया -” निधि मेरा लंच पैक करो और नाश्ता दो,जल्दी इधर आओ। ” 

 निधि के आने पर उसने कहा-” मां को कैसे उलटे जवाब दे रही हो, अभी तुम्हारी अकल ठिकाने लगाता हूं। ” 

 ऐसा कहकर उसने निधि पर हाथ उठाया तो निधि ने हवा में ही उसका हाथ रोक दिया। 

 निधि ने कहा-” बस बहुत हो गया राकेश, अब अगर तुमने कभी मुझ पर हाथ उठाया तो मैं सीधा पुलिस स्टेशन जाऊंगी। मैं बहुत सालों से सब कुछ चुपचाप सह रही हूं। तुमने मेरा आत्मसम्मान,मेरा स्वाभिमान कुचल कर रख दिया था, लेकिन अब ऐसा नहीं होगा। मैं भी कमाती हूं और इसलिए कमाती हूं कि घर खर्चे में तुम्हारा हाथ बटा सकूं। तुम और माँ जी घर के कामों में किसी तरह से मेरी कोई मदद नहीं करते हो। सुबह के समय और ऑफिस से आने के बाद थकान से मेरा क्या हाल होता है मैं ही जानती हूं। ऊपर से तुम मुझे मारते हो और तुम्हारी माताजी मुझे ताने सुनाती रहती हैं। अब यह सब बिल्कुल नहीं होना चाहिए। ” 

 सास ने कुछ कहना चाहा तो निधि ने उन्हें यह कह कर चुप करवा दिया कि माँ जी कुछ मत कहिए। अगर आप मुझे और मेरे मायके वालों को उल्टा सीधा बोलेंगे और आपका बेटा मुझ पर हाथ उठेगा तो फिर गाड़ी और नए फ्लैट की किस्त अपने बेटे से कहिए भरने को, मुझे कोई उम्मीद मत रखिएगा। ” 

 मां बेटा दोनों चुप हो गए। 

 तभी परिधि की आवाज आई-” मम्मी जल्दी से मेरा लंच पैक कर दो। कभी तो समय पर काम कर लिया करो। ”       गीता वाधवानी 

 निधि उसके कमरे में गई और उसे एक तमाचा मारते हुए बोली-” आज से तुम अपना लंच खुद ही पैक करना, इतनी बड़ी हो गई हो, इतना तो कर ही सकती हो। ” 

 आज निधि को लग रहा था कि मैं खुली हवा में सांस ले रही हूं। आज वह टाइम पर ऑफिस पहुंच गई थी। बास बड़े अच्छे से पेश आया और उसके बाद उसके कलीग ने जब उसके हाथ को टच करना चाहा तो निधि ने उसके हाथ को झटक कर उसके गाल पर एक जोरदार थप्पड़ मारा और कहा कि मैं कोई बेचारी नहीं हूं जो मुझे तुम्हारा सहारा चाहिए। आइंदा अपनी हद में रहना। ” 

 निधि सोच रही थी कि काश मैं अपने स्वाभिमान की रक्षा बहुत साल पहले ही कर ली होती, तो पति से पिटने के बाद बेवजह होने वाली आत्म ग्लानी  से बच जाती।  

 स्वरचित अप्रकाशित गीता वाधवानी दिल्ली

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