रेत के निशानों पर हौसले की उड़ान

गौरी, उम्र यही कोई पंद्रह बरस की रही होगी, लेकिन उसकी आँखों में एक ऐसी गहरी समझ थी जो उम्र से बहुत पहले आ जाती है। राजस्थानी गाँव के उस रूखे और रेतीले माहौल में भी वह किसी खिले हुए पलाश के फूल जैसी लगती थी। साँवला सलोना रंग, बड़ी-बड़ी कजरारी आँखें, और हवा में … Read more

वक्त का पहिया

 पार्वती ने यह सुनकर एक पल के लिए आसमान की तरफ देखा और सुकून से मुस्कुराती हुई बोली, “ईश्वर की माया भी कितनी अजीब है न! जो अपनी रफ्तार और मशीन पर इतना इतरा रहा था, वो आज पैदल हो गया। और हम, जो सोच रहे थे कि हमारी जिंदगी अब खत्म हो गई, भगवान … Read more

रिश्तों की बंजर ज़मीन

कुछ दिनों बाद, एक शाम रामदीन को अचानक सीने में बहुत तेज़ दर्द उठा। वे पसीने से तर-बतर होकर ज़मीन पर गिर पड़े। सुमित्रा की चीख निकल गई। पड़ोसियों की मदद से उन्हें तुरंत पास के अस्पताल ले जाया गया। डाक्टरों ने बताया कि उन्हें एक गंभीर हार्ट अटैक आया है और उनकी हालत बहुत … Read more

मुक्ति का स्वाद

 आज सुबह रघुनाथ जी की हालत बहुत खराब थी। वे दर्द से कराह रहे थे और उनकी आँखों से लगातार आंसू बह रहे थे। उन्होंने कांपते हाथों से विमला का हाथ पकड़ा और टूटी हुई आवाज़ में कहा, “विमला… मुझे जाने दे। पर इस कड़वाहट के साथ मत भेज… मेरा मुँह मीठा करवा दे… मेरी … Read more

स्वाभिमान की कीमत

 राधिका बुरी तरह चौंक गई, “क्या बकवास कर रहे हो तुम? तुम क्यों उनके साथ जाओगे? तुम अपना घर छोड़कर उन.. उन बाहरी लोगों के साथ रहोगे?” “बाहरी लोग? राधिका, जब मेरे पास सिर छिपाने को पक्की छत नहीं थी, तब इन्हीं बाहरी लोगों ने मुझे अपना घर दिया था। जब मेरे घर में अंधेरा … Read more

प्रतिष्ठा का मुखौटा

दीनदयाल जी अपनी बात पूरी कर पाते, उससे पहले ही शेखर सेठ ने उनकी बात काटते हुए तल्ख लहज़े में कहा, “दीनदयाल जी! बात पाँच-सात लाख रुपये के खर्च की नहीं है, बात हमारी ‘हैसियत’ की है। बुआ जी के ससुराल वालों, हमारे पूरे खानदान और शहर के रसूखदार लोगों को पता तो चलना चाहिए … Read more

जश्न के पीछे का सन्नाटा

 लेकिन तभी हॉल के मुख्य दरवाज़े पर एक अजीब सा शोर हुआ। दरबान किसी को अंदर आने से रोक रहे थे, और वह व्यक्ति ज़ोर-ज़ोर से गालियां बक रहा था। “अरे हटो… मेरा बेटा है वो… मुझे रोकोगे तुम? मैं बाप हूँ उसका, आईएएस का बाप!” आवाज़ सुनकर सुमेधा के पैरों तले ज़मीन खिसक गई। … Read more

अस्तित्व की धूप

छत पर पहुँचते ही शालिनी ने मीरा का हाथ पकड़ लिया और एक गहरी साँस लेते हुए बोली, “मीरा, मेरी समझ में नहीं आ रहा है कि तू साबित क्या करना चाहती है? कल ही तो वकीलों से बात हुई थी। तूने खुद कहा था कि अब तू विकास के साथ एक पल भी नहीं … Read more

उम्र का वनवास

 नेहा स्वभाव से बुरी नहीं थी, लेकिन वह बहुत ‘प्रोफेशनल’ थी। घर की हर चीज़ अपनी जगह पर होनी चाहिए, यह उसका सख्त नियम था। दीनानाथ जी अगर गलती से सोफे पर चाय का एक कतरा भी गिरा देते, तो नेहा के माथे पर सिलवटें पड़ जाती थीं। “पापा जी, आप डाइनिंग टेबल पर ही … Read more

खोई हुई पहचान: एक अनकही दास्तान

शिखा ने मीरा का हाथ पकड़कर कहा, “मीरा, एक बात हमेशा याद रखना। अगर इंजन में ही खराबी आ जाए, तो गाड़ी आगे नहीं बढ़ सकती। तुम इस घर का इंजन हो। तुम दिन-रात सेवा कर रही हो, यह बहुत अच्छी बात है, लेकिन अगर तुम अंदर से खुश नहीं हो, तो तुम दूसरों को … Read more

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