ज़िंदगी का असली सुकून

अचानक काव्या के मन का सारा मलाल, सारा गुस्सा और सारी मायूसी एक झटके में कहीं बह गई। उसे लगा जैसे किसी ने उसके तपते हुए मन पर सुकून की ठंडी फुहार डाल दी हो। जिस नौकरी को वह कुछ घंटों पहले एक बोझ समझ रही थी, आज उसी ने उसे वो खुशी दी थी … Read more

‘फर्ज’ और ‘हक’

सुमेधा ने हंसते हुए कहा, “दीदी, आप ‘फर्ज’ और ‘हक’ को अपनी सुविधानुसार नहीं चुन सकतीं। अगर बेटा ‘श्रवण कुमार’ बनकर सारे दुख और कर्ज ढोए, तो बेटी सिर्फ ‘लक्ष्मी’ बनकर पैसा लेकर नहीं जा सकती। अगर आप मॉडर्न जमाने की बात करती हैं और कानून का सहारा लेती हैं, तो कानून यह भी कहता … Read more

डिग्रियों के बोझ तले दब गए रिश्ते

 सुशीला जी ने अपने आंसू पोंछते हुए कहा, “बेटा, हमने उन्हें इतना पढ़ा दिया कि वे अब हर रिश्ते, हर भावना को नफे-नुकसान के तराजू पर तौलने लगे हैं। जब तक हम उनके काम आते रहे, बच्चों को संभालते रहे, तब तक हम अच्छे थे। लेकिन जैसे-जैसे हम बूढ़े हुए, बीमारियां बढ़ने लगीं, तो हम … Read more

अस्तित्व की कीमत

समीर ने अपने चमचमाते जूतों के फीते बांधते हुए झल्लाहट भरी आवाज में कहा, “मीरा, मेरा नीला रूमाल कहां है? तुम दिन भर घर में रहकर एक काम ढंग से नहीं कर सकती? नाश्ते में नमक कम है और मेरी फाइल भी टेबल पर नहीं है।” मीरा, जो पसीने से लथपथ रसोई में बच्चों का … Read more

ज़िंदगी का असली सुकून

अचानक काव्या के मन का सारा मलाल, सारा गुस्सा और सारी मायूसी एक झटके में कहीं बह गई। उसे लगा जैसे किसी ने उसके तपते हुए मन पर सुकून की ठंडी फुहार डाल दी हो। जिस नौकरी को वह कुछ घंटों पहले एक बोझ समझ रही थी, आज उसी ने उसे वो खुशी दी थी … Read more

रेत के निशानों पर हौसले की उड़ान

गौरी, उम्र यही कोई पंद्रह बरस की रही होगी, लेकिन उसकी आँखों में एक ऐसी गहरी समझ थी जो उम्र से बहुत पहले आ जाती है। राजस्थानी गाँव के उस रूखे और रेतीले माहौल में भी वह किसी खिले हुए पलाश के फूल जैसी लगती थी। साँवला सलोना रंग, बड़ी-बड़ी कजरारी आँखें, और हवा में … Read more

वक्त का पहिया

 पार्वती ने यह सुनकर एक पल के लिए आसमान की तरफ देखा और सुकून से मुस्कुराती हुई बोली, “ईश्वर की माया भी कितनी अजीब है न! जो अपनी रफ्तार और मशीन पर इतना इतरा रहा था, वो आज पैदल हो गया। और हम, जो सोच रहे थे कि हमारी जिंदगी अब खत्म हो गई, भगवान … Read more

रिश्तों की बंजर ज़मीन

कुछ दिनों बाद, एक शाम रामदीन को अचानक सीने में बहुत तेज़ दर्द उठा। वे पसीने से तर-बतर होकर ज़मीन पर गिर पड़े। सुमित्रा की चीख निकल गई। पड़ोसियों की मदद से उन्हें तुरंत पास के अस्पताल ले जाया गया। डाक्टरों ने बताया कि उन्हें एक गंभीर हार्ट अटैक आया है और उनकी हालत बहुत … Read more

मुक्ति का स्वाद

 आज सुबह रघुनाथ जी की हालत बहुत खराब थी। वे दर्द से कराह रहे थे और उनकी आँखों से लगातार आंसू बह रहे थे। उन्होंने कांपते हाथों से विमला का हाथ पकड़ा और टूटी हुई आवाज़ में कहा, “विमला… मुझे जाने दे। पर इस कड़वाहट के साथ मत भेज… मेरा मुँह मीठा करवा दे… मेरी … Read more

स्वाभिमान की कीमत

 राधिका बुरी तरह चौंक गई, “क्या बकवास कर रहे हो तुम? तुम क्यों उनके साथ जाओगे? तुम अपना घर छोड़कर उन.. उन बाहरी लोगों के साथ रहोगे?” “बाहरी लोग? राधिका, जब मेरे पास सिर छिपाने को पक्की छत नहीं थी, तब इन्हीं बाहरी लोगों ने मुझे अपना घर दिया था। जब मेरे घर में अंधेरा … Read more

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