आँगन की गूंज: एक अनमोल वसीयत

 देवकी जी के झुर्रीदार गालों पर आँसुओं की धारा बह निकली। रुंधे हुए गले से उन्होंने बताया कि आकाश दुबई में एक नई बहुराष्ट्रीय कंपनी शुरू करना चाहता है और इसके लिए उसे करोड़ों रुपयों की सख्त जरूरत है। आकाश ने उन्हें फोन करके एक तरह का अल्टीमेटम दे दिया था कि ‘आनंदमयी’ जैसे बड़े … Read more

अपना पराया

 घर के इस तनाव का सबसे आसान और मूक शिकार बना माधव। सरिता को लगता था कि घर के सारे संकटों की जड़ माधव ही है। “यह दिन भर खाता है, कपड़े गंदे करता है, कभी नल खुला छोड़ देता है तो कभी बर्तन तोड़ देता है! इसके इलाज और दवाओं में हर महीने दो-तीन … Read more

घर की धड़कन

अनामिका की आँखों से पश्चाताप के आँसू बह निकले। उसने रुंधे गले से कहा, “भाभी, हमें माफ कर दीजिए। हम अपनी डिग्रियों और नौकरियों के अहंकार में अंधी हो गई थीं। हम सोचते थे कि सिर्फ पैसा कमाना ही सबसे बड़ी योग्यता है। पर आज आपने हमारी आँखें खोल दीं। हम कुछ घंटे भी इस … Read more

जब घर फिर से मुस्कुरा उठा

 मानस ने उसके आँसू पोंछे और कहा, “तू नकारा नहीं है समर्थ। तू तो हम सबमें सबसे ज्यादा संवेदनशील है। ज़िंदगी में ठोकरें सबको लगती हैं। कल से हम दोनों मिलकर तेरे विषयों की पढ़ाई शुरू करेंगे। मैं देखता हूँ कि तू कैसे पास नहीं होता!” समर्थ के दिल से जैसे कई मन का बोझ … Read more

आँगन में धूप की दस्तक

उस मासूम बच्ची के इन भोले शब्दों ने सुभद्रा जी के संयम का बाँध तोड़ दिया। वे वहीं सोफे पर बैठ गईं और फूट-फूटकर रोने लगीं। उनके हाथ-पांव सुन्न पड़ गए थे। उन्हें लग रहा था कि यह सांसें यहीं थम जाएंगी। जिस घर में अभी-अभी हँसी की गूँज थी, वहाँ फिर से वही अंतहीन, … Read more

दिल के रिश्ते

  “बाबूजी, आप हमसे नाराज हो लीजिए, हमें डांट लीजिए, लेकिन भगवान के लिए अब अपनी यह जिद छोड़ दीजिए। अगर कल रात माँ को कुछ हो जाता, तो हम जिंदगी भर खुद को माफ नहीं कर पाते। हमारा यह सारा पैसा, यह पद, यह प्रतिष्ठा किस काम की, अगर हम अपने माँ-बाप के काम ही … Read more

स्मृतियों का आंगन

सुमन ने जब से होश संभाला था, अपने छोटे भाइयों, आलोक और सुमित के लिए वह बहन कम और माँ ज्यादा थी। माता-पिता के असमय निधन के बाद, सुमन ने अपनी पढ़ाई और अपनी खुशियों को ताक पर रखकर दोनों भाइयों को पाला। जब सुमन की शादी राजीव से हुई, तो उसे लगा कि भाइयों … Read more

ममता का स्पर्श

“पगली, किसने कह दिया कि तेरा मायका लुट गया? क्या मायका सिर्फ मां-बाप के जीवित रहने तक ही होता है? सुन बिटिया, मां-बाप शरीर से चले जाते हैं, पर उनका आशीष और उनकी आत्मा इसी चौखट, इसी आंगन और इसी मिट्टी में रची-बसी रहती है। तूने सोचा कि भाभी ने कमरा बदल दिया तो अपनापन … Read more

रिश्तों की नई सुबह

 अंजलि वहीं खड़ी रही। उसके कपड़े गीले थे, उसकी मेहनत से बनाई रंगोली फर्श पर एक भद्दे से दाग की तरह फैल चुकी थी, लेकिन आज उससे भी ज्यादा कुछ और टूट गया था—उसका सब्र। पिछले चार सालों से वह इस घर में अपनी जगह बनाने की कोशिश कर रही थी। विकास से उसने लव … Read more

वक्त की अहमियत और सच्चे रिश्ते

“अरे समधी जी, आपको और सुधा जी को इस बार कोई बहाना नहीं बनाना है। मेरी बहू की गोदभराई की रस्म है, पहला बच्चा आने वाला है घर में। आप लोगों को तो कम से कम एक हफ्ता पहले आना पड़ेगा। घर में इतनी रौनक होगी, और आपके बिना सब सूना लगेगा।” सुमित्रा देवी फोन … Read more

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