रिश्तों का आइना

अंजलि की आंखों से अब आंसुओं की धार बह निकली। ये आंसू दर्द के नहीं, बल्कि पछतावे के थे। उसे अपनी सोच पर, अपने उस शक पर घिन आने लगी जो उसने आभासी दुनिया के उस कचरे को देखकर अपने मन में पाला था। जो परिवार उसके लिए अपनी जान छिड़कता है, जो सासू मां … Read more

अदृश्य डोर: एक माँ की वापसी

 यह सुनते ही देवकी की आत्मा सिहर उठी। वह जोर से “कबीर!” चिल्लाते हुए नींद से जाग गई। वह हांफ रही थी और उसका पूरा शरीर पसीने से भीगा हुआ था। बाहर बारिश रुक चुकी थी और सुबह की पहली किरण कबीर के कमरे की खिड़की से अंदर आ रही थी। देवकी वहीं बैठी रही … Read more

ससुराल की देहरी और मायके का आँगन: एक अनकही सच्चाई

अलार्म की तीखी आवाज़ ने काव्या की नींद तोड़ दी। उसने फोन की स्क्रीन पर समय देखा—सुबह के साढ़े पाँच बज रहे थे। नवंबर की हल्की ठंड में रजाई से बाहर निकलने का बिल्कुल मन नहीं था, लेकिन रसोई की जिम्मेदारियां उसे पुकार रही थीं। काव्या की शादी को अभी महज़ आठ महीने ही हुए … Read more

कांच के रिश्ते और आभासी दुनिया

 रामेश्वर जी ने एक व्यंग्यात्मक लेकिन दर्द भरी मुस्कान के साथ कहा, “यही तो दुख है बेटा। दुनिया तुम्हें श्रवण कुमार समझ रही है, लेकिन तुम्हारे माता-पिता यहाँ प्यासे बैठे हैं। तुमने लिखा कि ‘स्वर्ग माता-पिता के चरणों में है’, लेकिन इस घर में कदम रखे तुम्हें आठ घंटे हो गए हैं, और तुमने एक … Read more

ममता की छाँव और स्वाभिमान

 रात के लगभग ग्यारह बज रहे थे। पैंसठ वर्षीय सुमित्रा देवी अपनी पंसदीदा किताब के कुछ पन्ने पलट कर बस सोने की ही तैयारी कर रही थीं। उनका यह पच्चीस सौ स्क्वायर फुट का दो मंजिला घर, जिसे उन्होंने अपने पति के गुजर जाने के बाद अपनी पाई-पाई जोड़कर बनाया था, अब उनकी एकांत दुनिया … Read more

मायके की दहलीज

“मम्मी, वो जो बनारसी सिल्क की साड़ी आपने दिखाई थी, वही भिजवाना मेरे लिए। और हाँ, काजू-बादाम, पिस्ता के साथ वो इंपोर्टेड चॉकलेट्स का बड़ा वाला पैक भी रख देना। मेरी जेठानी के मायके से बहुत भारी सामान आया है इस बार दिवाली पर। उनके रिश्तेदारों के सामने मेरा इम्प्रेशन डाउन नहीं होना चाहिए। आपको … Read more

रिश्तों की अटूट डोर

 सुलोचना झेंप गई और मेहमानों के सामने अपनी इज्जत बचाते हुए धीरे से फुसफुसाई, “तू पागल हो गई है शिखा? तमाशा मत बना। तुझे पता है न कि हमारे उनके बीच कोई रिश्ता नहीं है। वे लोग नहीं आएंगे। तू चुपचाप रस्म के लिए बैठ जा।” “रिश्ता कैसे नहीं है माँ?” शिखा की आँखों से … Read more

वो ‘निकम्मा’ बेटा

रात के करीब ढाई बज रहे थे। अचानक मास्टर महेश जी  जी के सीने में तेज दर्द उठा। दर्द इतना भयानक था कि वे बिस्तर पर ही तड़पने लगे। उनकी पत्नी कौशल्या घबराहट में उठ बैठीं। वे समझ नहीं पा रही थीं कि इतनी रात गए, इस भयंकर तूफ़ान में क्या करें। उनके दो बड़े … Read more

अपनी माटी, अपना आंगन

 कौशल्या जी ने चौंककर अपनी आँखें खोलीं और अनिरुद्ध के कंधे के ऊपर से देखा। सामने उनकी बहू क्लारा खड़ी थी। लेकिन यह वो क्लारा नहीं थी जिसकी कल्पना कौशल्या जी ने की थी। क्लारा ने एक बहुत ही सुंदर सूती सलवार-कमीज़ पहनी हुई थी। उसके सुनहरे बालों पर लाल रंग का दुपट्टा बहुत ही … Read more

रिश्तों का आईना

सुलोचना देवी टूट कर रोने लगीं। वे लड़खड़ाते कदमों से प्रेरणा के पास गईं और उसके दोनों हाथ पकड़ लिए। “मुझे माफ कर दे मेरी बच्ची। मैं सोने की चमक में अंधी हो गई थी। मुझे लगा कि जो पैसे वाला है, वही सच्चा है। मैं यह भूल गई कि असली जेवर सोना-चांदी नहीं, बल्कि … Read more

error: Content is protected !!