साँसों की वसीयत
माधव, जो उम्र के इस पड़ाव पर आकर थोड़े और भावुक हो गए थे, एक बच्चे की तरह जिद पर अड़ जाते। जैसे कोई छोटा बच्चा अपनी मनमानी करता है, वैसे ही वे सुलोचना को समझाते हुए कहते, “सुलोचना, मेरी बात समझने की कोशिश करो। तुमने जिंदगी भर मुझे सिर्फ खुशियाँ दी हैं। तुमने मुझे … Read more