रिश्तों की छांव

 “चुप कर मुर्ख!” दीदी ने माधव की बात बीच में ही काट दी। उन्होंने अपने पल्लू की गांठ खोली और उसमें से एक छोटी सी कपड़े की पोटली निकाली। वो पोटली उन्होंने माधव के हाथों में रख दी। “इसमें मेरी कुछ एफडी (Fixed Deposit) के कागज़ात हैं और मेरे कुछ पुराने गहने हैं जो मैंने … Read more

रिश्तों की कीमत

कार्तिक मास की हल्की-हल्की ठंड ने दस्तक दे दी थी। सुबह का धुंधलका अभी पूरी तरह छँटा भी नहीं था, लेकिन मीरा की रसोई में बर्तनों की खनक और मसालों की सोंधी महक ने पूरे घर को जगा दिया था। आज भाई दूज का पवित्र त्योहार था। वैसे तो घर में काम करने वाली बाई … Read more

परंपराओं की दोहरी कसौटी: एक नई बहू की अनकही कहानी

 सिद्धार्थ, जो अब तक इस पूरे मामले से अनजान था, तुरंत सारी स्थिति समझ गया। उसने अपनी भाभी का साथ देते हुए कहा, “बड़ी अम्मा, भाभी बिल्कुल सही कह रही हैं। सम्मान दिल में होता है, दिखावे में नहीं। तान्या ने हमारे घर और हमारे रीति-रिवाजों को पूरे दिल से अपनाया है। अगर मेरे ‘ताई … Read more

सूने आँगन की छाँव

“समीर ने लंदन में खुद ही कोर्ट मैरिज कर ली है, रघुनाथ जी। ना हमसे कुछ पूछा, ना कोई बात की। बस एक मैसेज और दो तस्वीरें भेज दीं। क्या हम उसके जीवन में इतने गैर हो गए थे?” सुमित्रा जी की आँखों से आँसू थमने का नाम नहीं ले रहे थे। उनके हाथों में … Read more

रिश्तों की नई बुनियाद: एक पिता का सर्वोच्च धर्म

  शिखा , जो दरवाजे के पास खड़ी सब सुन रही थी, धीरे से कमरे में आई। उसकी आंखों में एक अजीब सी दृढ़ता थी। उसने अपने माता-पिता के हाथ पकड़े और आंसुओं को रोकते हुए कहा, “नहीं पिताजी, मैं आपके साथ वापस नहीं जा सकती। जिस दिन मेरा कन्यादान हुआ था, उसी दिन से यह … Read more

रिश्तों की गर्माहट: एक अनकहा एहसास

 “अगले दिन विहान ने दादी से बहाना बनाया कि आपने उसे दो जैकेट दिलवाई हैं। एक स्कूल के लिए और एक घर के लिए। उसने कहा कि नीली वाली जैकेट उसे चुभती है इसलिए वह इसे नहीं पहनेगा। वो मासूम अपनी दादी को वह जैकेट ओढ़ाकर सुला देता है। और क्योंकि उसका खुद का कमरा … Read more

रिश्ते की डोर

कैफे के शीशे वाले दरवाजे से बाहर निकलते हुए समीर की पीठ धीरे-धीरे धुंधली होती जा रही थी, और अंदर बैठी काव्या को ऐसा लग रहा था जैसे उसके शरीर से उसकी रूह निकलकर जा रही हो। उसकी आँखों से आँसू रुकने का नाम नहीं ले रहे थे, लेकिन उसके अंदर का अहंकार उसे रोने … Read more

रिश्तों की नई परिभाषा: जब कमियों को मिला प्यार

 “मुझे तुम्हारी ईमानदारी बहुत पसंद आई मीरा,” सुमित्रा जी की आवाज में एक अजीब सी नरमी थी। उन्होंने अपनी जगह से उठकर मीरा के पास आकर उसके सिर पर हाथ रखा और कहा, “तुम्हें पता है? जब मेरी शादी श्रीकांत जी से हुई थी, तब मैं अपने कॉलेज की एथलेटिक्स चैंपियन थी। दिन भर ग्राउंड … Read more

स्वाभिमान की उड़ान: एक गृहणी की अनकही दास्तान

मीरा ने उनके पैर छुए और बहुत ही कोमलता से कहा, “माँ जी, अगर आप उस दिन मुझे उस गाजर के हलवे पर ताना न मारतीं, अगर आप मुझे यह एहसास न दिलातीं कि बिना कमाए इस दुनिया में कोई इज्जत नहीं है, तो शायद मैं अपनी डिग्रियों को अलमारी में दीमक लगने के लिए … Read more

साँसों की वसीयत

माधव, जो उम्र के इस पड़ाव पर आकर थोड़े और भावुक हो गए थे, एक बच्चे की तरह जिद पर अड़ जाते। जैसे कोई छोटा बच्चा अपनी मनमानी करता है, वैसे ही वे सुलोचना को समझाते हुए कहते, “सुलोचना, मेरी बात समझने की कोशिश करो। तुमने जिंदगी भर मुझे सिर्फ खुशियाँ दी हैं। तुमने मुझे … Read more

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