ममता का स्पर्श

“पगली, किसने कह दिया कि तेरा मायका लुट गया? क्या मायका सिर्फ मां-बाप के जीवित रहने तक ही होता है? सुन बिटिया, मां-बाप शरीर से चले जाते हैं, पर उनका आशीष और उनकी आत्मा इसी चौखट, इसी आंगन और इसी मिट्टी में रची-बसी रहती है। तूने सोचा कि भाभी ने कमरा बदल दिया तो अपनापन … Read more

रिश्तों की नई सुबह

 अंजलि वहीं खड़ी रही। उसके कपड़े गीले थे, उसकी मेहनत से बनाई रंगोली फर्श पर एक भद्दे से दाग की तरह फैल चुकी थी, लेकिन आज उससे भी ज्यादा कुछ और टूट गया था—उसका सब्र। पिछले चार सालों से वह इस घर में अपनी जगह बनाने की कोशिश कर रही थी। विकास से उसने लव … Read more

वक्त की अहमियत और सच्चे रिश्ते

“अरे समधी जी, आपको और सुधा जी को इस बार कोई बहाना नहीं बनाना है। मेरी बहू की गोदभराई की रस्म है, पहला बच्चा आने वाला है घर में। आप लोगों को तो कम से कम एक हफ्ता पहले आना पड़ेगा। घर में इतनी रौनक होगी, और आपके बिना सब सूना लगेगा।” सुमित्रा देवी फोन … Read more

रिश्तों की बुनियाद

  “पापा, बस बहुत हो गया! मैं अब इस घर में एक पल भी और नहीं रह सकती। रोहन और उसके परिवार की पिछड़ी हुई सोच के साथ मेरा दम घुटता है। अगर आप कल सुबह तक यहाँ नहीं आए, तो मैं अकेले ही डिवोर्स के पेपर फाइल कर दूँगी।” काव्या ने बिना कोई जवाब सुने … Read more

मायके की देहरी और ससुराल का मान

सविता देवी का बंगला शहर के पॉश इलाके में स्थित था। घर की दीवारों पर सजी महंगी पेंटिंग्स और दहलीज़ पर रखी पीतल की मूर्तियाँ इस बात की गवाह थीं कि यह परिवार संपन्नता में जी रहा है। सविता देवी के दो बेटे थे—अभिषेक और रचित। अभिषेक की पत्नी रिद्धिमा एक रईस घराने से थी, … Read more

**ममता का मोल: एक अनसुना दर्द**

 साठ वर्षीय सुलोचना जी अपने दोनों हाथों में ताजी सब्जियों, फलों और कुछ घरेलू सामानों से भरे भारी थैले पकड़े, अपनी सोसायटी के मुख्य गेट से अंदर दाखिल हो रही थीं। उम्र के इस पड़ाव पर घुटनों में गठिया का दर्द अक्सर उन्हें परेशान करता था, लेकिन आज उनके चेहरे पर एक अजीब सी ऊर्जा … Read more

एक पिता का प्रायश्चित: जब न्याय ने ली रिश्तों की जगह

“हाँ, मैंने गलती की। मैं धन बटोरने में अंधा हो गया था। मुझे लगा पैसा ही सब कुछ है।” रघुनाथ जी का गला रुंध गया। “लेकिन सबसे बड़ा पाप जो हमने किया है, वह विक्रम को बिगाड़ना नहीं है। वह पाप है इस मासूम लड़की मीरा की जिंदगी बर्बाद करना। याद है तुम्हें? जब विक्रम … Read more

आँगन की वो गौरैया

यह सुनकर मेरे पैरों तले ज़मीन खिसक गई। मेरा बाल-मन इस बात को स्वीकार ही नहीं कर पा रहा था कि मौसी मुझे छोड़कर हमेशा के लिए कहीं और रहने जा रही हैं। अगर शादी का मतलब बिछड़ना होता है, तो फिर शादी करनी ही क्यों? मैं दौड़कर मौसी के पास जाना चाहता था, उन्हें … Read more

मायके की दहलीज

“मम्मी, वो जो बनारसी सिल्क की साड़ी आपने दिखाई थी, वही भिजवाना मेरे लिए। और हाँ, काजू-बादाम, पिस्ता के साथ वो इंपोर्टेड चॉकलेट्स का बड़ा वाला पैक भी रख देना। मेरी जेठानी के मायके से बहुत भारी सामान आया है इस बार दिवाली पर। उनके रिश्तेदारों के सामने मेरा इम्प्रेशन डाउन नहीं होना चाहिए। आपको … Read more

माँ का घर

“माँ, मुझे माफ़ कर दो। मैं तुम्हें यहाँ छोड़कर नहीं गया था। मुझे पता ही नहीं था… सुमन ने कहा तुम बुआ के घर…” रवि बच्चों की तरह फफक पड़ा। गायत्री देवी ने रवि का हाथ अपने हाथ में लिया। “मैं जानती हूँ बेटा… मैं जानती हूँ तू ऐसा नहीं कर सकता। बहू ने… बहू … Read more

error: Content is protected !!