तीसरी दस्तक: किस्मत का फैसला – रीता मक्कड़

  सरिता रसोई में बड़े ही जतन से दही और चीनी मिला रही थी। बाहर हॉल में चहल-पहल थी। आज उनकी सबसे छोटी बेटी, ईशानी, अपने जीवन की सबसे बड़ी उपलब्धि की ओर कदम बढ़ाने वाली थी। वह आज शहर के जिला अस्पताल में ‘चीफ मेडिकल ऑफिसर’ के रूप में अपनी ड्यूटी ज्वाइन करने वाली थी। … Read more

परिवार – गीता अस्थाना

विवाहोत्सव समाप्त हुए एक महीना बीत चुका था। मेहमान तो विवाह संपन्न होने के तुरंत बाद ही चले गए थे। घर के आत्मीय सदस्य भी परिवार सहित धीरे धीरे अपने अपने कार्यस्थल पर चले गए। नई नवेली होने के बावजूद नमिता काफी व्यस्त रही। सबके जाने के बाद नमिता को कुछ सुकून महसूस हुआ। उसके … Read more

परिवार – करुणा मालिक 

शांति काकी……जरा देखना, बाहर गुड़िया को….बकरियों और भेड़ों की आवाज आ रही है, मेरी मीटिंग चल रही है। सौम्या ने अपने कंप्यूटर को म्यूट करके अपनी घरेलू सहायिका शांति को आवाज लगाते हुए कहा क्योंकि वह जानती थी कि उसकी दो साल की बेटी बकरियों की आवाज सुनकर बाहर की तरफ भागती है और अगर … Read more

राधिका का संघर्ष – भारती अनिल सोनी

राधिका आज बहुत खुश थी,, आज उसकी सालों की मेहनत सफल हुई थी। उसके इतने सालों के संघर्ष का अब अंत करीब था । उसकी बेटी अनुभा का आज डिप्टी कलेक्टर के पद पर चयन हो गया था । अनुभा पिछले 3 सालों से आई ए एस अधिकारी की परीक्षा दे रही थी पर आज … Read more

परिवार – मधु वशिष्ठ

बड़ा सा बोर्ड लगा था और उस पर लिखा था बच्चों का अपना घर। उद्घाटन के बाद जब सब घर जाने को थे तो मिन्नी ने सविता मैडम को रोकते हुए कहा, आप कहीं नहीं जाएंगे आपका कमरा तो यहां ही बना हुआ है अब इस अपना घर का काम आपको ही संभालना है।  मैडम … Read more

एक कटोरी चीनी – प्रतिमा श्रीवास्तव

कुछ ही दिन आए हुए थे कविता को इस शहर में। सबकुछ नया – नया सा था। किसी को जानती नहीं थी, ऑफिस वालों से थोड़ी – थोड़ी जान-पहचान का सिलसिला शुरू हुआ था। कविता बहुत ही सुलझी, समझदार थी, बहुत जल्दी किसी से घुलती मिलती नहीं थी।उसे इंसानों की बहुत समझ थी जो उसे … Read more

खामोशी और झंकार: एक अनकहे अहसास की कहानी

रात के करीब आठ बज रहे थे। बाहर बारिश की हल्की फुहारें गिर रही थीं और बालकनी में बैठी अंजलि अपनी पड़ोसन विशाखा के साथ ठहाके लगाकर हंस रही थी। उनकी हंसी की आवाज़ बेडरूम तक आ रही थी, जहाँ समीर अपने लैपटॉप पर ऑफिस का कुछ ज़रूरी काम निपटाने की कोशिश कर रहा था। … Read more

बेड़ियों की उड़ान

“ये आप क्या कह रहे हैं? अवनि अभी अपनी मास्टर्स की पढ़ाई पूरी करना चाहती है, उसका सपना एक सिविल सर्विस ऑफिसर बनने का है।” “अरे तो मैं कहाँ मना कर रहा हूँ। शादी के बाद अपने ससुराल में बैठकर जितनी मर्जी किताबें पढ़ ले। तुम अपना ये फालतू का ज्ञान देना बंद करो और … Read more

रिश्तों की असली वसीयत

शहनाई की गूंज और गेंदे के फूलों की महक से पूरा घर महक रहा था। घर के आंगन में शामियाना लगा हुआ था और मेहमानों की चहल-पहल से एक उत्सव का माहौल बना हुआ था। आज कावेरी जी की इकलौती बेटी शिखा की हल्दी की रस्म थी। कावेरी जी अपने माथे का पसीना पोंछते हुए … Read more

दौलत का भ्रम

दीपावली का समय था और पूरे घर में रौनक छाई हुई थी। घर की बड़ी बहू निर्मला हमेशा की तरह रसोई से लेकर मेहमानों के स्वागत तक की सारी जिम्मेदारियां चुपचाप निभा रही थी। वहीं छोटी बहू, राखी, अपने महंगे रेशमी कपड़ों और भारी गहनों से लदी, बस सोफे पर बैठकर अपनी बेटी तान्या के … Read more

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