स्नेह की छांव
“प्रखर, जब तू इस घर में आया था, तो तू सिर्फ मेरा बेटा था। लेकिन जब तूने दृष्टि का हाथ थामा, तो तूने एक वादा किया था कि तू इसके सुख-दुख का साथी बनेगा। यह अपने मां-बाप का भरा-पूरा घर छोड़कर, अपने सारे सपने और अपनी पहचान समेटकर तेरे भरोसे इस चौखट के अंदर आई … Read more