दौलत का भ्रम

दीपावली का समय था और पूरे घर में रौनक छाई हुई थी। घर की बड़ी बहू निर्मला हमेशा की तरह रसोई से लेकर मेहमानों के स्वागत तक की सारी जिम्मेदारियां चुपचाप निभा रही थी। वहीं छोटी बहू, राखी, अपने महंगे रेशमी कपड़ों और भारी गहनों से लदी, बस सोफे पर बैठकर अपनी बेटी तान्या के … Read more

जिंदगी की धूप और छाँव

 रेस्टोरेंट के एक कोने वाली टेबल पर दो लोग आमने-सामने बैठे थे। मेज पर रखी चाय से उठती भाप उन दोनों के बीच पसरी खामोशी को और भी गहरा कर रही थी। माधव, जिसकी उम्र पैंतीस के पार हो चुकी थी, अपनी चाय के कप को दोनों हाथों से पकड़े हुए कुछ सोच रहा था। … Read more

धरोहर – शुभ्रा बैनर्जी

“मां,मैं कल आ रही हूं।रात ग्यारह बजे तक पहुंच जाऊंगी।तुम जगी मत रहना।आज शाम की ट्रेन है।”  निधि का फोन आते ही सुधा चहक कर बातें करने को व्याकुल हो उठी।निधि ने तीन वाक्य में ही बातें खत्म करते हुए बाय कर दिया तो,सुधा ने टोका”अरे,रुक तो जरा।फ्लाइट में आने वाली थी ना?फिर ट्रेन से … Read more

समर्पण – मीनाक्षी गुप्ता

“बरसात की हल्की फुहारें पड़ रही थीं। गाँव की मिट्टी से उठती सोंधी खुशबू वातावरण में घुल गई थी। दसवीं कक्षा में पढ़ने वाली गौरी अपने घर के आँगन में बैठी किताबों के पन्ने पलट रही थी। उसकी आँखों में बड़े सपने थे, लेकिन उन सपनों तक पहुँचने का रास्ता आसान नहीं था।” गौरी के … Read more

मुझे सज़ा दो माँ – सावित्री मल्होत्रा 

समर अपने घुटनों के बल ज़मीन पर गिर पड़ा और अपनी माँ के पैरों से लिपटकर दहाड़ें मारकर रोने लगा। “मुझे माफ़ कर दो माँ… मैं बहुत नीच हूँ। मैंने तुम्हें सिर्फ एक माँ के रूप में देखा, कभी एक इंसान और एक औरत के रूप में तुम्हारे दर्द को नहीं समझा। मैंने तुम पर … Read more

टूटी हुई उम्मीदें – सविता गर्ग

  शादी के कुछ महीनों बाद ही सौम्या को सुमित्रा जी का रहन-सहन, उनकी पुरानी आदतें और उनका आयुष से बात करना खटकने लगा। घर में रोज़-रोज़ क्लेश होने लगे। सौम्या को अपनी ‘प्राइवेसी’ में सास का दखल बिल्कुल पसंद नहीं था। आयुष जो कभी अपनी माँ की एक आह पर रो पड़ता था, अब पत्नी … Read more

ममता को जलील मत करो – सावित्री मल्होत्रा

आरोही मुझे अचरज से देखने लगी। मैंने बात जारी रखी, “बेटा, ब्रांड्स बाजार में मिलते हैं, लेकिन माँ का प्यार किसी शोरूम में नहीं बिकता। तुम्हारी माँ ने पिछले तीन सालों से अपने लिए एक नई चप्पल तक नहीं खरीदी है, ताकि वो तुम्हारे कॉलेज की फीस भर सकें। आज वो तुम्हारे जन्मदिन के लिए … Read more

बहू नहीं सम्मान है इस घर का – गरिमा चौधरी

शहर के सबसे बड़े मैरिज हॉल में शहनाई की गूंज और रोशनी की चकाचौंध हर किसी का मन मोह रही थी। शहर के जाने-माने व्यापारी सेठ दीनानाथ की इकलौती और लाडली बेटी लीला  का विवाह एक बहुत ही रसूखदार और प्रतिष्ठित परिवार के बेटे वेदांत के साथ हो रहा था। बारात दरवाजे पर आ चुकी … Read more

लिव-इन वाली बहू – सीमा श्रीवास्तव

बेंगलुरु की एक नामी आईटी कंपनी में काम करने वाले सिद्धार्थ और नीती की सोच आज के ज़माने की थी। दोनों ने शादी का फैसला रातों-रात नहीं लिया था। करीब दो साल तक लिव-इन रिलेशनशिप में रहने के बाद, एक-दूसरे की आदतों, आर्थिक ज़िम्मेदारियों और पारिवारिक मूल्यों को पूरी तरह से समझने के बाद ही … Read more

मैं विहान की पत्नी बाद में हूँ, आपकी बेटी पहले हूँ – रमा शुक्ला

शारदा के हाथों में आज भी जब वह पुरानी तस्वीर आती, तो उसकी आँखें अपने आप छलक उठती थीं। तस्वीर में वह अपने पति रमेश के साथ खड़ी थी, और उसकी गोद में छह महीने का नन्हा विहान था। शादी के महज तीन साल बाद ही एक सड़क दुर्घटना ने रमेश को हमेशा के लिए … Read more

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