रिश्तों की छाँव: जब आंगन सूना हो गया
अम्मा जी कभी निहारिका के सामने उसकी तारीफ नहीं करती थीं। उन्हें लगता था कि ज्यादा तारीफ करने से बहू सिर पर चढ़ जाएगी। इसलिए वह अक्सर कमियां ही निकालती थीं—”सब्जी में नमक थोड़ा कम है”, “कपड़े ठीक से तह नहीं किए”। लेकिन निहारिका को उनकी असलियत तब पता चली, जब एक दिन वह बाज़ार … Read more