रिश्तों की बगिया
शकुंतला देवी ने तुरंत वंदना को उठाया और उसे अपने गले से लगा लिया। उन्होंने वंदना के सिर पर हाथ फेरते हुए कहा, “पागल लड़की, इस हालत में तुझे सीढ़ियाँ चढ़कर ऊपर आने की क्या ज़रूरत थी? कुछ ऊँच-नीच हो जाती तो? माँ कभी अपने बच्चों से हमेशा के लिए रूठ सकती है क्या? मेरा … Read more