सास का तजुर्बा

नंदिनी अपने कमरे की खिड़की के पास खड़ी होकर बाहर लॉन में बिखरी सुबह की सुनहरी धूप को देख रही थी। उसके हाथों में रची गाढ़ी लाल मेहंदी अभी भी उसकी शादी की गवाही दे रही थी। महज़ तीन दिन पहले ही तो वह अपने पिता के घर की चौखट लांघकर इस नए घर में … Read more

नई बहू

लाल सुर्ख जोड़े में लिपटी, भारी गहनों के बोझ तले बैठी काव्या आज किसी सजी-धजी गुड़िया से कम नहीं लग रही थी। पूरे घर में गेंदे के फूलों और देसी घी की मिठाइयों की महक तैर रही थी। यह शहर के जाने-माने वकील दीनानाथ जी का घर था, जहाँ आज उनके इकलौते बेटे सुशांत की … Read more

गुरु दक्षिणा

मास्टर विद्यानाथ थोड़ा घबरा गए। उन्होंने अपनी कमज़ोर आँखों से डॉक्टर को पहचानने की कोशिश की। “कौन हो बेटा? उठो, तुम इतने बड़े आदमी हो, मेरे पैर क्यों छू रहे हो?” डॉ. समर ने जब अपना सिर उठाया तो उनकी आँखों से आँसू बह रहे थे। उन्होंने रुंधे हुए गले से कहा, “मास्टर जी… आपने … Read more

डील के कागजात

दीनानाथ जी की सुबह छत पर बने उस छोटे से टिन के कमरे में होती थी, जिसे घर वाले ‘कबाड़खाना’ कहते थे। गर्मियों में यह कमरा भट्टी की तरह तपता था और सर्दियों में यहाँ की सीलन हड्डियों तक में उतर जाती थी। रात भर मच्छरों की भिनभिनाहट और टिन की छत से टपकती ओस … Read more

 रिश्तों का व्यापार

“रजत, तुम मेरी बात समझ क्यों नहीं रहे हो? रोहन के इक्कीसवें जन्मदिन पर हमें उसे वही लग्जरी एसयूवी ही गिफ्ट करनी चाहिए, जिसके बारे में वह पिछले छह महीने से बात कर रहा है।” सुमेधा ने अपना लैपटॉप बंद करते हुए गहरी साँस ली और पति की तरफ देखा। रजत, जो अपनी कंसल्टेंसी फर्म … Read more

तपस्या

“डॉक्टर साहिबा, इतनी कम उम्र में जिले की मुख्य चिकित्सा अधिकारी (CMO) का पद संभालना अपने आप में एक मिसाल है। आपकी इस असाधारण सफलता के पीछे किसका हाथ है? वो कौन सी प्रेरणा थी जिसने आपको इस मुकाम तक पहुँचाया?” पत्रकारों के कैमरों की फ्लैशलाइट्स चमक रही थीं और हर कोई उनके जवाब का … Read more

ज़िंदगी की एक छोटी सी हार

“अरे मीना बहू, क्या बात है? आज हमारे घर का चिराग सुबह से दिखाई नहीं दिया, कहीं सूरज पश्चिम से तो नहीं निकल आया?” पचहत्तर वर्षीय रिटायर कर्नल शमशेर सिंह ने अपनी छड़ी को ज़मीन पर टिकाते हुए अपने पड़ोस में रहने वाले आयुष के घर के बरामदे में कदम रखा। उनकी भारी और रौबदार … Read more

सोने का पिंजरा

काव्या की गोरी कलाई और कोहनी के बीच का हिस्सा नीले, काले और हरे पड़े निशानों से भरा हुआ था। वे निशान नए नहीं थे, कुछ पुराने थे जो पीले पड़ रहे थे और कुछ बिल्कुल ताज़े थे, जिनमें खून जम गया था। हीरों के उस भारी ब्रेसलेट के ठीक ऊपर, किसी सिगरेट से जलाए … Read more

खोखले हो चुके रिश्ते – गरिमा चौधरी

“अरे कोई है इस घर में या सब बहरे हो गए हैं? मीना… ओ मीना! कहां मर गई?” ड्राइंग रूम में फाइलों का पुलिंदा बिखेरते हुए राजेंद्र बाबू का पारा सातवें आसमान पर था। उनकी गरजती आवाज से खिड़कियों के कांच भी मानो थर्रा गए हों। रसोई में सुबह के नाश्ते की तैयारी में जुटी … Read more

खुली हवा – श्रीप्रकाश श्रीवास्तव

शर्मा जी के घर के सामने अच्छी खासी भीड जमा थी। उनके बीच खुसर फुसर जारी थी। एक पचीस वर्षीया शादीशुदा महिला फाटक पास बैठी थी। अंदर से फाटक बंद था। भीड ज्यादातर उन लेागो की थी जिनकी कोई केा सामाजिक हैसियत नहीं थी। किसी का आदमी ठेला चलता था तेा कोई बर्तन मांझने का … Read more

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