तालमेल

शादी को छह महीने बीत चुके थे, लेकिन नेहा के हिस्से में अब तक सिर्फ जिम्मेदारियां ही आई थीं। रसोई, पूजा-पाठ, रिश्तेदारों का आना-जाना और घर की अनगिनत उलझनों के बीच वह जैसे अपनी नई-नवेली शादीशुदा जिंदगी के वो सुनहरे पल जीना ही भूल गई थी, जिनके सपने उसने मायके में बुने थे। आज सुबह-सुबह … Read more

सच्चा जीवनसाथी 

माधव रुंधे हुए गले से बोला, “मुझे छोड़ दो राधिका… तुम अब एक बहुत बड़ी अधिकारी हो। यहाँ सारे लोग तुम्हें देख रहे हैं। मेरे जैसे एक मामूली मजदूर का तुम्हारे साथ होना तुम्हारी इज्जत खराब कर देगा।” राधिका ने आँसू पोंछते हुए कहा, “कौन सी इज्जत? यह पद, यह रुतबा, यह गाड़ी, यह सब … Read more

पिता को अंतिम विदाई

शहर के प्रतिष्ठित रिटायर्ड हेडमास्टर, पंडित दीनानाथ जी की अंतिम यात्रा उनके पुश्तैनी घर के आंगन से निकल रही थी। दीनानाथ जी ने अपने जीवन में हजारों छात्रों का भविष्य संवारा था, इसलिए आज उनके अंतिम दर्शन के लिए पूरा शहर उमड़ पड़ा था। अर्थी के आगे-आगे नंगे पैर, सिर मुंडाए और हाथ में सुलगता … Read more

अपराधबोध

आनंद और सुधा की कहानी भी उन हजारों प्रेम कहानियों जैसी ही थी, जिन्हें समाज और परिवार आसानी से स्वीकार नहीं करते। आज से पैंतीस साल पहले जब उन्होंने एक-दूसरे का हाथ थामा था, तो उनके परिवारों ने हमेशा के लिए उनसे अपने दरवाजे बंद कर लिए थे। बिना किसी सहारे के, एक अजनबी शहर … Read more

आशीर्वाद

अंजलि अपना सूटकेस पैक कर रही थी। शादी के बाद यह उसका पहला सावन था और मायके जाने की खुशी उसके चेहरे पर साफ झलक रही थी। पूरे एक महीने के लिए वह अपने बचपन की सखियों, माँ के हाथ के खाने और उस पुराने झूले के पास जाने वाली थी, जहाँ उसने अपनी ज़िंदगी … Read more

दादी की जूठन

मैंने बिना एक पल गँवाए, बिना कोई तर्क किए, अपना मुँह खोल दिया। दादी ने अपने कांपते हाथों से वो खीर मेरे मुँह में रख दी। वो साबूदाने की खीर, जो शायद थोड़ी ठंडी हो चुकी थी, मुझे दुनिया का सबसे स्वादिष्ट व्यंजन लगी। उसे निगलते हुए मेरी आँखों से आंसुओं की एक धार बह … Read more

माँ की पुरानी साड़ी – विकास श्रीवास्तव

गाँव के एक छोटे से घर में रामलाल, उनकी पत्नी सरला और उनका बेटा मोहित रहते थे। रामलाल एक साधारण किसान थे। दिन-रात मेहनत करके परिवार का पालन-पोषण करते थे। घर में पैसे कम थे, लेकिन प्यार और अपनापन बहुत था। सरला के पास एक पुरानी नीली साड़ी थी। वही साड़ी उन्होंने अपनी शादी में … Read more

भाई दूज

राघव वहीं सोफे पर धम्म से बैठ गया। उसकी आँखें पथरा गई थीं। वह पलक झपकाना भूल गया था। नीती का वह बहाना इतना खोखला था कि कोई भी समझ सकता था कि वह बस राघव से मिलना नहीं चाहती थी। राहुकाल या मुहूर्त का तो बस नाम था; असली बात तो यह थी कि … Read more

खामोश रिश्तों की गूंज – अनुपमा

बाहर आसमान से बारिश की बूंदें लगातार गिर रही थीं, लेकिन मीरा के अंदर जो तूफान उठ रहा था, उसके सामने ये बारिश बहुत मामूली लग रही थी। सुबह से ही उसने कुछ नहीं खाया था। डाइनिंग टेबल पर रखी चाय की प्याली कब ठंडी हो गई, उसे इसका एहसास तक नहीं हुआ। वह बस … Read more

पक्की उम्र का प्यार – रमा शुक्ला 

 निहारिका के माता-पिता कमरे में आए। पिताजी के चेहरे पर एक ऐसी राहत और खुशी थी, जो निहारिका ने बहुत समय बाद देखी थी। उन्होंने निहारिका के सिर पर हाथ फेरते हुए कहा, “बेटा, तुम्हारे लिए एक बहुत ही होनहार लड़के का रिश्ता आया है। नाम सुमेध है। एक बड़ी आईटी कंपनी में सॉफ्टवेयर इंजीनियर … Read more

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