खामोश दीवारों का दर्द – अर्चना खंडेलवाल

खिड़की के बाहर सावन की झमाझम बारिश हो रही थी, लेकिन काव्या के अंदर जैसे एक सूखा रेगिस्तान पसर चुका था। उसकी छोटी बहन श्रुति, जो अपनी कॉलेज की छुट्टियों में कुछ दिनों के लिए दीदी के घर रहने आई थी, सोफे पर बैठी स्तब्ध थी। उसने अभी-अभी जो देखा था, उस पर उसे यकीन … Read more

**चमकते ख्वाब और घर की चौखट** – अर्चना खंडेलवाल

“निहारिका, इस तरह आधी रात को अचानक घर छोड़ कर जाना ठीक नहीं होगा,” अनिरुद्ध की आवाज़ में गुस्सा नहीं, बल्कि एक गहरी पीड़ा थी। “अभी बाबूजी और माँ सो गए हैं, सुबह उठकर जब वे तुम्हारे बारे में पूछेंगे तो मैं उन्हें क्या जवाब दूंगा? वे सब तुमसे कितना प्यार करते हैं, तुम्हारा कितना … Read more

अदालत का फैसला – एम. पी. सिंह

जीवन भोपाल के पास एक छोटे से गावं मैं रहता था और पशु आहार का कारोबार करता था. पंजाब से माल आता था ओर आस पास के छोटे पशु पालक माल ले जाते थे. बिक्री बहुत ज्यादा नहीं थीं पर कमाई काफ़ी ज्यादा थीं. जीवन की पत्नी ज्योति अपना घर ओर  बच्चे नीता व नितिन … Read more

पहला प्यार – एम. पी. सिंह

स्कूल की पढ़ाई पूरी कर कॉलेज में एडमिशन लिया. कॉलेज का पहला दिन, नये साथी, नये टीचर, नये चेहरे, नई जगह बस शहर वहीं पुराना. इन नये चेहरों में एक चेहरा ऐसा भी था जो मेरे सपनो की राजकुमारी से मिलता था. मेरे दिल ने अपनी राजकुमारी के चहरे क़ो पहचान लिया और उसके पीछे … Read more

लालची और जिद्दी पत्नी का घमंड तोड़ा पति ने ! – स्वाती जैन

आनंद जैसे ही घर में आया अपने माता- पिता को नाराज सोफे पर बैठे देख समझ गया आज वापस उसकी पत्नी रीना ने घर में जरूर कुछ हंगामा किया होगा , दूसरी तरफ उसकी पत्नी रीना खड़ी थी जिसका गुस्सा सांतवे आसमान पर था ! उसने आनंद को चाय पानी भी नहीं पूछा , रसोई … Read more

होली क़ी यादें – एम. पी. सिंह

होली का त्योहार आते ही मेरे बचपन की यादें ताज़ा हों जाती है. ये बात है ज़ब में कॉलेज मे पढ़ता था. मेरा दोस्त राहुल अपने ही कॉलेज की एक लड़की सुनीता से दिल ही दिल प्यार करता था, पर इज़हार करने से डरता था. उसने होली पर सुनीता के साथ होली खेलने ओर प्यार … Read more

मायके की देहरी – विनीता सिंह

समीर ने अपना लैपटॉप बंद किया और लापरवाही से कंधे उचकाते हुए बोला, “अरे यार नव्या, तुम भी छोटी-छोटी बातों का बतंगड़ बनाती हो। माँ कह रही हैं तो चली जाओ। उनकी अपनी मान्यताएं हैं। वैसे भी मेरी इस महीने बहुत बिजी शेड्यूल है, तुम जाओगी तो मुझे भी थोड़ा काम पर फोकस करने का … Read more

ज़िंदगी की कड़वी चाय – प्रियंका नाथ

सुमित्रा जी से अपनी बेटी की यह हालत देखी नहीं जा रही थी। तभी घर की बड़ी बहू, काव्या, रसोई से बाहर आई। काव्या न सिर्फ इस घर की बहू थी, बल्कि श्रुति की एक बहुत अच्छी दोस्त भी थी। सुमित्रा जी ने काव्या का हाथ पकड़ा और रुंधे हुए गले से बोलीं, “बहू, तुम … Read more

संस्कारों का आईना – शारदा सक्सेना

 निर्मला देवी और सुमित, शालिनी का यह रूप देखकर सन्न रह गए। निर्मला देवी ने चिल्लाते हुए कहा, “जुबान लड़ा रही है तू मुझसे? ये हैं तेरे संस्कार?” “संस्कार!” शालिनी की आँखों से आंसू छलक पड़े, लेकिन उसकी आवाज़ में कोई कंपन नहीं था। “संस्कारों की बात आप मत ही कीजिए माँ जी। जब मैं … Read more

पिंजरे की खुली उड़ान – मोहिनी मिश्रा

देविका, जो अब तक चुपचाप यह सब तमाशा देख रही थी, उसके भीतर का सोया हुआ ज्वालामुखी अचानक फट पड़ा। उसे उस बंद दरवाज़े के पीछे रोती हुई काव्या में अपनी ही परछाई नज़र आने लगी। बाइस साल पहले जब देविका ने अपने मायके में कॉलेज ट्रिप पर जाने की ज़िद की थी, तो उसके … Read more

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