पिता का वनवास – मुकेश पटेल 

ट्रेन की रफ़्तार के साथ-साथ सुमन के दिल की धड़कनें भी बढ़ती जा रही थीं। खिड़की से बाहर भागते हुए पेड़ और खेत उसे अपने बचपन की याद दिला रहे थे। पूरे तीन साल बाद वह अपने मायके, अपने शहर लखनऊ वापस आ रही थी। गोद में छह महीने का बेटा ‘आरव’ सो रहा था … Read more

स्वाभिमान का कन्यादान  – गरिमा चौधरी 

*शादी के मंडप में जब लड़की के पिता ने कांपते हाथों से शगुन का लिफाफा बढ़ाया, तो लड़के की माँ ने उसे ठुकरा दिया। सन्नाटा छा गया। सबने सोचा मांग बड़ी है, पर उस माँ ने जो किया, उसने बारातियों की आँखों में पानी ला दिया। क्या एक ‘बेटे वाली’ सच में ‘बेटी वाले’ का … Read more

अंतिम प्रार्थना – रीमा साहू

*क्या प्रेम का मतलब सिर्फ थामे रखना है या कभी-कभी मुक्त कर देना ही सबसे बड़ा प्रेम है? पढ़िए एक ऐसी पत्नी की दास्तां जिसने अपने पति के लिए वो दुआ मांगी जिसे मांगने में रूह कांप जाती है।* आज शाम को भी ऐसा ही हुआ था। विनोद अचानक हिंसक हो गए थे। उन्होंने अपने … Read more

कांच के महल – विनीता खन्ना 

ससुर ने दामाद की फटी जेब देखकर उसे भरी महफ़िल में ‘बेचारा’ कह दिया, लेकिन उसे नहीं पता था कि वक्त का पहिया जब घूमता है, तो वो राजा को रंक और रंक को राजा बना देता है। क्या स्वाभिमान की जीत दौलत के अहंकार को हरा पाएगी? रवि ने अपनी पुरानी स्कूटर को तीसरी … Read more

दिल के रिश्ते: एक मां का फैसला – गीता गुप्ता

*जब बेटी ने पिता की चिता की राख ठंडी होने से पहले ही जायदाद का बंटवारा मांग लिया, तब एक मां ने जाना कि कोख से जन्म देने से कोई अपना नहीं होता। पढ़िए एक ऐसी मां की कहानी जिसने समाज के डर से नहीं, बल्कि अपने स्वाभिमान के लिए एक कठोर फैसला लिया।* सावित्री … Read more

जज़्बातों का डाकिया  – रोनिता कुंडु 

*इस डिजिटल युग में जब उंगलियों के एक टच से संदेश पहुँच जाते हैं, तब एक बूढ़ा जोड़ा पुराने संदूक से स्याही और कलम निकालकर टूटे हुए दिलों को जोड़ने का काम कर रहा था। क्या उनकी यह ‘पुरानी आदत’ आज के ‘नए दौर’ के रिश्तों को बचा पाएगी?* “सुधा… ओ सुधा! अरे, वो नीला … Read more

सिंदूर का कर्ज  – लतिका श्रीवास्तव

*जब एक औरत पर लगा अपने ही जीजा के साथ अवैध संबंध का घिनौना आरोप, तो उसने अपनी पवित्रता की कसम खाने के बजाय स्वीकार कर लिया वो गुनाह जो उसने किया ही नहीं था। आखिर किस सच को छिपाने के लिए एक भाभी अपनी ही ननद की सुहाग की सेज उजाड़ने को तैयार हो … Read more

आंगन की तुलसी – संगीता अग्रवाल

“सुधा! अरे ओ सुधा! तू अभी तक रसोई में ही है? देख तो ड्राइंग रूम के पर्दों पर धूल जमी है या नहीं? मेरी ‘मल्लिका’ आ रही है। उसे धूल से एलर्जी है। अमेरिका में रहती है वो, वहां जैसा साफ़-सुथरा माहौल यहाँ भी मिलना चाहिए उसे।” सावित्री देवी की आवाज़ पूरे घर में गूंज … Read more

माँ का आईना – रश्मि प्रकाश 

सुशीला देवी को लगा जैसे किसी ने उनके गाल पर ज़ोरदार तमाचा मारा हो। उनका अपना ही तर्क, उनके अपने ही शब्द, अब उन्हें चुभ रहे थे। जो ममता अपनी बेटी के लिए उमड़ रही थी, वही ममता बहू के लिए क्यों सूख गई थी? उनके हाथ से फोन का रिसीवर लगभग छूट ही गया। … Read more

*रिश्ते अधिकार से नहीं, करुणा से निभते है* – तोषिका

डॉक्टर साहब जल्दी आएं यहाँ पर, इनका हादसा होगया है और इनको इलाज की सख्त जरूरत है। परेशान रामू ने बोला। *आज का दिन* मैं कहा हू? कोई मुझे बताएगा कि मैं यहाँ कैसे आया? सर पकड़ते हुए एक आदमी ने दर्द भरी आवाज में पूछा। आस पास के सब लोग उसको देख रहे थे … Read more

error: Content is protected !!