निस्वार्थ त्याग
रिया अपने कमरे में आईने के सामने खड़ी होकर कॉलेज के एक फंक्शन के लिए तैयार हो रही थी। तभी उसके पिता, मदन जी, अपने एक पैर से हल्का सा लंगड़ाते हुए कमरे में आए। उनके हाथ में रिया की प्रेस की हुई ड्रेस थी। मदन जी के चेहरे पर एक पुराना, गहरा जलने का … Read more