धरोहर – शुभ्रा बैनर्जी
“मां,मैं कल आ रही हूं।रात ग्यारह बजे तक पहुंच जाऊंगी।तुम जगी मत रहना।आज शाम की ट्रेन है।” निधि का फोन आते ही सुधा चहक कर बातें करने को व्याकुल हो उठी।निधि ने तीन वाक्य में ही बातें खत्म करते हुए बाय कर दिया तो,सुधा ने टोका”अरे,रुक तो जरा।फ्लाइट में आने वाली थी ना?फिर ट्रेन से … Read more