सात समंदर पार का सन्नाटा

 रोहन की बात सुनकर देवकी के पास कहने को कुछ नहीं बचा था। रोहन ने कुछ गलत नहीं कहा था। उसने वही किया जो उसकी माँ ने उसे सिखाया था। देवकी ने ही उनके कोमल मनों में यह बात डाली थी कि विदेशी सरजमीं ही सफलता का आखिरी मुकाम है। उसने बच्चों को उड़ना सिखाया, … Read more

परंपरा और आधुनिकता की पहेली

अनन्या अवाक रह गई। वह कुछ बोल ही नहीं पा रही थी। आधुनिकता की तमाम दलीलें देने वाली अनन्या को अचानक अपनी ही भारतीय जड़ों का एहसास होने लगा। उसका दिमाग तेज़ी से दौड़ने लगा। ‘होने वाले सास-ससुर के सामने मैं एक ही कमरे में रोहन के साथ कैसे रहूँगी? मैं उनके सामने सुबह-सुबह बिना … Read more

सुकून का नया पता

 सुमित्रा जी मुस्कुराते हुए बोलीं, “नहीं मालती, बच्चों ने कभी हमसे एक पैसा नहीं मांगा। बल्कि वे तो हर महीने हमें पैसे भेजना चाहते हैं। सच तो यह है कि उस बड़े घर में हम थक चुके थे। रोज सुबह उठकर कामवाली का इंतजार करना, कभी प्लंबर को बुलाना, कभी बिजली वाले के पीछे भागना। … Read more

मखमली पर्दे

स्मिता ने अपना रेशमी पल्लू सँभालते हुए कहा। “ये जो लड़का है ना सूरज, इसका बाप एक नंबर का जुआरी और शराबी था। सिर पर लाखों का कर्ज़ा छोड़कर लिवर खराब होने से मर गया। इसकी माँ, कमला, मेरे पैरों में गिरकर रोने लगी। मेरे पति राकेश जी का दिल बहुत बड़ा है। उन्होंने कमला … Read more

मृगतृष्णा: एक अधूरे सच की कहानी

इस बार सुमित्रा जी ठीक नीरजा के पीछे खड़ी थीं और उन्होंने अपने ‘वारिस’ का हर एक शब्द सुन लिया था। उनके पैरों तले ज़मीन खिसक गई। जिस बेटे के लिए उन्होंने अपनी बेटी को हमेशा पराया समझा, जिस बेटे की खातिर उन्होंने अपने पति की सारी ज़िंदगी की कमाई लुटा दी, आज वो बेटा … Read more

अतीत की दहलीज पर

“मैं तुम्हें वापस पाने की जिद नहीं कर रहा हूँ, अनन्या। मैं जानता हूँ मैंने तुम्हारा बहुत दिल दुखाया है। मैं बस इतना चाहता था कि तुम यह जान लो कि तुम्हारी लड़ाई गलत नहीं थी। गलत मैं था। मुझे बस इस एहसास के साथ नहीं जीना था कि तुम मुझे एक डरपोक और धोखेबाज … Read more

स्वाभिमान की चौखट

“तूने बिल्कुल सही किया बेटा,” रामदीन जी ने शिखा का माथा चूमते हुए कहा। “मैं एक बाप होकर जो नहीं कह पाया, वो तूने कह दिया। मेरी बेटियां मेरे गुरूर हैं, कोई बाज़ार में बिकने वाला सामान नहीं। अनुराधा की शादी जब होगी, तब होगी, लेकिन आज के बाद मेरी किसी बेटी को ऐसे अपमान … Read more

एहसास के धागे

मेघा का पारा सातवें आसमान पर पहुँच गया। वह गुस्से से तमतमाती हुई समीर के पास गई। “समीर! तुम्हारी हिम्मत कैसे हुई पापा से यह सब कहने की? तुम्हें पता नहीं है कि उन्हें अस्थमा है? वो यहाँ हमारे घर काम करने आए हैं क्या? कार साफ करने के लिए कॉलोनी में लड़के आते हैं, … Read more

मज़बूत विश्वास

“माँ जी, मैंने आपको कितनी बार मना किया है कि आप रसोई के किसी भी काम में हाथ मत लगाया कीजिए। ये बर्तन मैं खुद मांज लूंगी और रोटियां भी सेंक लूंगी। आप बस अपने कमरे में जाकर आराम कीजिए।” मेघा ने अपनी सास कमला देवी के हाथ से आटे की परात लेते हुए बहुत … Read more

आत्मसम्मान

“महक , मेरी बात ध्यान से सुनो…” मीरा ने एक गहरी साँस लेते हुए अपनी छोटी बहन की आँखों में देखा। “आज तुम जिस मोड़ पर खड़ी हो, सालों पहले मैं भी ठीक वहीं खड़ी थी। तुम कहती हो कि तुम्हें अपनी ज़िंदगी अपने हिसाब से जीनी है, ये समाज और इसके बनाए नियम तुम्हें … Read more

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