**फ़र्ज़ की वेदी पर खिला प्रेम** – विजय सीकर
“सच बताऊं मयंक?” पल्लवी ने एक गहरी और हताशा भरी सांस ली। “एक तो अब उम्र बहुत हो गई है। पैंतीस की होने वाली हूँ मैं। इस उम्र में हमारे समाज में लड़कियों को सिर्फ समझौते मिलते हैं, जीवनसाथी नहीं। और दूसरा, अब इस उम्र में मुझे कौन ढूंढेगा? न मेरे सिर पर पिता का … Read more