पराया आँगन, अपनी महक
“अंजलि, बेटा… सब ठीक तो है ना? तू मुंह से तो कुछ नहीं कहती, लेकिन एक माँ अपनी बेटी की खामोशी भी पढ़ लेती है। तेरी आवाज़ में वो पुरानी वाली खनक नहीं है, एक अजीब सी उदासी झलकती है। अगर कोई बात है तो मुझे बता दे।” फोन के दूसरी तरफ से अंजलि की … Read more