पराया आँगन, अपनी महक

“अंजलि, बेटा… सब ठीक तो है ना? तू मुंह से तो कुछ नहीं कहती, लेकिन एक माँ अपनी बेटी की खामोशी भी पढ़ लेती है। तेरी आवाज़ में वो पुरानी वाली खनक नहीं है, एक अजीब सी उदासी झलकती है। अगर कोई बात है तो मुझे बता दे।” फोन के दूसरी तरफ से अंजलि की … Read more

रिश्तों की बुनियाद

  “पापा, बस बहुत हो गया! मैं अब इस घर में एक पल भी और नहीं रह सकती। रोहन और उसके परिवार की पिछड़ी हुई सोच के साथ मेरा दम घुटता है। अगर आप कल सुबह तक यहाँ नहीं आए, तो मैं अकेले ही डिवोर्स के पेपर फाइल कर दूँगी।” काव्या ने बिना कोई जवाब सुने … Read more

मायके की देहरी और ससुराल का मान

सविता देवी का बंगला शहर के पॉश इलाके में स्थित था। घर की दीवारों पर सजी महंगी पेंटिंग्स और दहलीज़ पर रखी पीतल की मूर्तियाँ इस बात की गवाह थीं कि यह परिवार संपन्नता में जी रहा है। सविता देवी के दो बेटे थे—अभिषेक और रचित। अभिषेक की पत्नी रिद्धिमा एक रईस घराने से थी, … Read more

अपनापन या अधिकार

सुबह के करीब छह बज रहे थे। नवंबर की हल्की ठंड ने दस्तक दे दी थी, लेकिन मीरा के माथे पर पसीने की कुछ बूंदें साफ झलक रही थीं। गैस के एक चूल्हे पर कुकर की सीटी बजने को तैयार थी, तो दूसरे पर वह ओट्स और ताजी सब्जियों का चीला बना रही थी। घर … Read more

अटूट बंधन – संगीता श्रीवास्तव

‘कुछ नहीं कर पाएगा नालायक! जब भी पी टीएम में जाता हूं तो रिपोर्ट कार्ड देखकर मुंह लटकाए चला आता हूं। इस लड़के को तो शर्म नाम की कोई चीज ही नहीं !अब इन्हें बाइक चाहिए। जितनी मेरी तनख्वाह है ,उसी में ना अपनी गृहस्थी चलाऊंगा। तुम्हारे लिए चोरी- बाजारी तो नहीं करूंगा न! अरे … Read more

यह कैसा बंधन – लक्ष्मी कनोडिया ‘अनिका’

हवेली के आँगन में रखी वह पुरानी संदूकची पिछले पैंतीस वर्षों से बंद थी। उस पर जंग लगे पीतल का ताला था और ताले के ऊपर लाल रंग से किसी ने बहुत पहले लिख दिया था— “घर की मर्यादा।” नंदिनी ने बचपन से उस संदूकची को देखा था। घर की औरतों के लिए वह किसी … Read more

“ये कैसा बंधन” – कमलेश आहूजा

रमा के सामने वाले फ्लैट में सुबह से हलचल मची हुई थी। वह फ्लैट काफी समय से खाली पड़ा था। इस फ्लोर पर सिर्फ दो ही फ्लैट थे, इसलिए रमा बहुत खुश थी कि चलो, पड़ोसी आ जाने से उसका अकेलापन कुछ कम होगा। वह उत्सुक थी कि आखिर उसके नए पड़ोसी कौन हैं। उसने … Read more

ये कैसा बंधन है! – श्वेताअग्रवाल

जैसे ही डोरबेल बजी, निमित्त तेज़ी से उठा और दरवाज़े की तरफ दौड़ पड़ा। जब तक उसकी पत्नी वाणी किचन से निकल आई, उसने दरवाजा खोल दिया था। बाहर दरवाज़े पर डाकिया खड़ा था। उसने तुरंत उसके हाथ से लिफ़ाफ़ा लिया और उसे वहीं दरवाज़े पर खड़े-खड़े लिए खोल दिया, मानो उससे सब्र ही नहीं … Read more

ये कैसा बंधन – रेखा जैन

“मम्मी, आप ये ड्रेस ले लीजिए…” काव्या ने दुकान में रखी हल्के नीले रंग की खूबसूरत ड्रेस उठाकर अपनी सास रूपा की तरफ बढ़ा दी। रूपा ने ड्रेस को देखा और फिर अपनी बहू को प्यार भरी नजरों से देखते हुए बोलीं, “लेकिन बेटा, मैं तो सिर्फ साड़ी पहनती हूँ… ड्रेस नहीं।” “तो क्या हुआ … Read more

बंधन – खुशी

सिया और अमन की शादी को पांच साल हो गए थे।अमन एक आटोमोबाइल कंपनी में था।घर में माँ मनोरमा, पिता आदित्य और भाई रवि थे। सिया एक खुशमिजाज लड़की थी जिसने पूरे घर को अपना बना लिया। परन्तु शादी के पांच साल भी सिया की गोद नहीं भरी। डाक्टर कहते सब ठीक है ‌ पिछले … Read more

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