भाई का निस्वार्थ प्रेम

“तू बहुत बड़ा मूर्ख है, केदार! तुझे क्या लगा, मुझे तेरी चोरी का पता नहीं चलेगा?” सोमनाथ रुंधे गले से बोला। केदार भी रोते हुए मुस्कुराया, “और आप? आप कब से इतने चालाक हो गए भैया कि मेरे ही बक्से में सेंध मार दी?” दोनों भाई एक-दूसरे के गले लगकर बच्चों की तरह रो रहे … Read more

मां – खुशी

सविता की  शादी एक भरे पूरे परिवार में हुई।दो ननद राधा और मीरा  एक देवर मोहन सविता के पति केशव  ससुर दीनानाथ ऐसा परिवार था।जिसमें चलती सिर्फ सविता की सास रूक्मिणी की थी बाकी सब तो प्यादे थे।रुक्मिणी एक तेज गुस्से वाली महिला थी जिन्हें हर चीज समय पर चाहिए होती थी देर हो गई … Read more

सिल्क की साड़ी पहनने की हसरत ही रह गई – मंजू ओमर

सपना आज बहुत खुश थी। आज उसे मुहल्ले मे उसके दो मकान छोड़ कर रहने वाली शांति जी के पोती का महिलाओं का संगीत कार्यक्रम था। शादी थी उसकी,,जो दूसरे शहर से हो रही थी। उसी के उपलक्ष्य मे ये प्रोग्राम रखा था। गाने बजाने के साथ खाने पीने का भी कार्यक्रम था। सपना ने … Read more

“अपनों का साथ ” – कमलेश आहूजा

संडे का दिन था,बेटों के ऑफ़िस की छुट्टी थी रमा ने सोचा था आज थोड़ा आराम से ऊठूँगी…किंतु सुबह से ही किसी कौवे की लगातार काँव-काँव की आवाज आ रही थी..जिससे उसकी नींद जल्दी ही खुल गई।आवाज बंद होने का नाम ही नहीं ले रही थी…उसने खिड़की का पर्दा हटाकर बाहर देखा,तो..सामने के पेड़ पर … Read more

*अपनों का साथ* – तोषिका

“जीवन में कभी कोई भी कठिनाई आए तो याद रखना हम तुम्हारे साथ है ऐसा हमेशा मेरे दादा जी कहते है” कमलेश ने अपने पोते अनंत को बोला। अनंत जो अभी मात्र ९ वर्ष का था, अपनी मासूम भरी आंखों से अपने दादाजी की बात ऐसे सुन रहा था जैसे ये सुनहरे अक्षर उसने पहली … Read more

वो मुझसे ज़्यादा मेरी भाभी की माँ है – डॉ आभा माहेश्वरी

जब भी मैं अपनी माँ के बारे में सोचता हूँ, मन में एक अजीब-सी टीस उठती है। बचपन में मैं अक्सर शिकायत किया करता था कि माँ का सारा ध्यान मुझ पर नहीं, बल्कि मेरी भाभी पर रहता है। मुझे लगता था कि शादी के बाद जैसे उन्हें एक बेटी मिल गई हो और मैं … Read more

अपनों का साथ – संयुक्त परिवार की सबसे बड़ी दौलत – सुदर्शन सचदेवा

कहते हैं, बड़ा घर ईंटों और सीमेंट से नहीं बनता, बल्कि उसमें रहने वाले अपनों के प्रेम, विश्वास और अपनापन से बनता है। संयुक्त परिवार भी ऐसा ही एक आँगन है, जहाँ हर रिश्ता अपने रंग से जीवन को सुंदर बना देता है। यहाँ किसी एक की खुशी, सबकी खुशी बन जाती है और किसी … Read more

वो मुझसे ज्यादा मेरी भाभी की मां है – सुदर्शन सचदेवा

 मुझसे ज़्यादा मेरी भाभी की माँ है… यह कहते हुए कभी-कभी मेरे अपने होंठ मुस्कुरा उठते हैं और आँखें भीग जाती हैं। क्योंकि मैं जानती हूँ… माँ का प्यार कभी कम नहीं होता, बस उसकी दिशा बदल जाती है। एक समय था, जब माँ की हर आवाज़ मेरे लिए होती थी—”बेटा, खाना खा लिया?”, “थक … Read more

अपनों का साथ – मधु वशिष्ठ

मां की मृत्यु का समाचार सुनकर जब उसके दोनों बेटे विदेश से आए तो वह यह देखकर हैरान थे उनकी अकेली रहने वाली माता जी के पास कितने लोग थे।  पूरा कमरा औरतों से भरा हुआ था आने जाने वाले कम ही नहीं हो रहे थे। लोग आकर ऐसे रो रहे थे कि मानो उन्होंने … Read more

अपनों का साथ – खुशी

गायत्री जी एक सुलझी महिला थी।उनके पति किशन जी की दुकान थी बड़े बाजार में किराने की दुकान थी जो बहुत बढ़िया चलती थी।उनके दो बेटे थे रितेश और राहुल दोनों भाइयों की एक दूसरे में जान बसती थी।पूरा परिवार एक दूसरे को समर्पित था।बच्चों ने भी अपनी शिक्षा पूरी कर कर पिता के कारोबार … Read more

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