मान्या पिछले कई दिनों से एक अजीब सी बेचैनी से गुजर रही थी। आठ साल की शादीशुदा जिंदगी में उसने कभी रोहन पर शक करने का कोई कारण नहीं पाया था। रोहन एक जिम्मेदार पति और उनके पांच साल के बेटे, आरव का बहुत प्यारा पिता था। दोनों की जिंदगी एक शांत नदी की तरह बह रही थी, जिसमें कोई बड़ा तूफान कभी नहीं आया था। लेकिन पिछले कुछ हफ्तों से उस शांत नदी में जैसे किसी ने कंकड़ मार-मार कर लहरें पैदा कर दी थीं। और यह सब शुरू हुआ था रोहन के मोबाइल फोन से।
पहले रोहन घर आते ही अपना फोन टेबल पर रख देता था और पूरी तरह से परिवार का हो जाता था। लेकिन अब बात कुछ और थी। वह हर समय अपना फोन अपनी जेब में रखता, बार-बार स्क्रीन चेक करता, और कई बार तो मैसेज पढ़ते हुए अकेले ही मुस्कुराने लगता। मान्या ने कई बार पूछने की कोशिश की कि ऐसा क्या है जो उसे इतना खुश कर रहा है, लेकिन रोहन हर बार “अरे कुछ नहीं, ऑफिस का एक नया प्रोजेक्ट है” कहकर बात टाल देता। एक पत्नी की छठी इंद्री बहुत तेज होती है, और मान्या की अंतरात्मा उसे चीख-चीख कर कह रही थी कि मामला सिर्फ ऑफिस के प्रोजेक्ट का नहीं है।
शक का बीज तब एक विशाल पेड़ में बदल गया, जब एक रात रोहन गहरी नींद में सो रहा था और उसके फोन की स्क्रीन रोशन हुई। मान्या , जो पानी पीने उठी थी, की नजर अचानक उस स्क्रीन पर पड़ गई। वहां एक पॉप-अप मैसेज था। भेजने वाले का नाम था- ‘किरण’। मैसेज में लिखा था, “तुम्हारे बिना दिन बहुत बोरिंग था, कल जल्दी मिलना।” यह पढ़ते ही मान्या के पैरों तले से जमीन खिसक गई। उसके दिल की धड़कन तेज हो गई और हाथों में पसीना आ गया। ‘किरण’? कौन है यह किरण? रोहन के ऑफिस में तो इस नाम की कोई महिला नहीं थी। फिर यह कौन है जिससे मिलने के लिए रोहन इतना बेताब रहता है और जो रोहन के बिना बोर हो जाती है?
उस रात मान्या सो नहीं पाई। करवटें बदलते हुए उसने अपने आठ साल के वैवाहिक जीवन का एक-एक पन्ना पलट कर देख लिया। उसने रोहन के लिए, इस घर के लिए, अपनी पहचान तक भुला दी थी। शादी से पहले वह एक स्कूल में पढ़ाती थी, लेकिन आरव के जन्म के बाद रोहन ने ही कहा था कि उसे नौकरी छोड़ देनी चाहिए ताकि वह बच्चे पर पूरा ध्यान दे सके। मान्या ने बिना किसी शिकायत के अपनी गृहस्थी को ही अपना करियर मान लिया था। और आज, यह सिला मिल रहा था उसे? क्या पुरुष सच में इतने स्वार्थी होते हैं? क्या घर में बैठी पत्नी उन्हें कुछ सालों बाद उबाऊ लगने लगती है जो वे बाहर ‘किरण’ जैसी महिलाओं की तलाश में निकल पड़ते हैं? ख्यालों के बवंडर ने मान्या को सुबह तक सुन्न कर दिया।
अगले कुछ दिन मान्या के लिए किसी नर्क से कम नहीं थे। उसने रोहन की जासूसी शुरू कर दी। उसने देखा कि रोहन बालकनी में जाकर छुप-छुप कर बातें करता है। जब भी मान्या पास जाती, वह तुरंत फोन काट देता या फिर आवाज बहुत धीमी कर लेता। मान्या ने एक दिन मौका पाकर रोहन का कॉल लॉग भी चेक कर लिया। ‘किरण’ के साथ दिन में तीन-चार बार बात हो रही थी, और वो भी बीस-बीस मिनट लंबी। व्हाट्सएप पर तो जैसे दोनों ने बातों की झड़ी लगा रखी थी। चुटकुले, गुड मॉर्निंग के मैसेज, और न जाने कैसे-कैसे वीडियो दोनों एक-दूसरे को भेज रहे थे। मान्या का दिल हर गुजरते दिन के साथ कड़वाहट से भरता जा रहा था। उसे लगा जैसे उसकी पूरी दुनिया ताश के पत्तों की तरह ढहने वाली है।
लेकिन मान्या भी हार मानने वाली महिलाओं में से नहीं थी। वह कोई अबला नारी नहीं थी जो कोने में बैठकर आंसू बहाती। उसने तय किया कि वह इस घर को, अपने परिवार को इतनी आसानी से टूटने नहीं देगी। अगर कोई बाहरी औरत उसके पति पर डोरे डाल रही है, तो वह उसे उसकी असली जगह दिखा कर रहेगी। लेकिन इसके लिए पहले रोहन से सीधे बात करनी होगी। रोहन को समझाना होगा, और अगर वह न समझे, तो उसे चेतावनी देनी होगी।
रविवार की सुबह थी। घर में एक अजीब सी शांति छाई हुई थी। आरव अपने कमरे में खिलौनों के साथ खेल रहा था और रोहन ड्राइंग रूम में सोफे पर बैठा अखबार पढ़ रहा था। वह बहुत खुश लग रहा था और गुनगुना रहा था। उसकी यह खुशी मान्या को किसी तीखे तीर की तरह चुभ रही थी। मान्या ने अपने गुस्से को एक जगह इकट्ठा किया, गहरी सांस ली और सीधे रोहन के सामने जाकर खड़ी हो गई।
“मुझे तुमसे कुछ बात करनी है, रोहन,” मान्या की आवाज में एक बर्फीली ठंडक थी।
रोहन ने अखबार नीचे किया और मुस्कुराकर बोला, “हां कहो ना, क्या बात है? आज तो वैसे भी बहुत अच्छा दिन है।”
“तुम्हारे लिए अच्छा होगा,” मान्या ने व्यंग्य कसते हुए कहा। “सुनो, मैं यह सब तमाशा और बर्दाश्त नहीं कर सकती। यह क्या लगा रखा है तुमने पिछले एक महीने से? कौन है यह किरण?”
रोहन थोड़ा चौंका, लेकिन फिर उसके चेहरे पर एक अजीब सी मुस्कान तैर गई। “अरे, तुमने मेरा फोन देखा क्या? तुम्हें किसने कहा फोन चेक करने को?”
रोहन की यह ढिठाई देखकर मान्या का पारा सातवें आसमान पर पहुंच गया। “मैंने फोन देखा, कॉल लॉग देखा, तुम्हारे मैसेज देखे! दिन भर, रात-रात भर तुम दोनों चिपके रहते हो फोन पर। क्या चल रहा है तुम्हारे और उस किरण के बीच? क्या तुम भूल गए हो कि तुम्हारी एक पत्नी है, एक बच्चा है? उस परायी औरत के लिए तुम अपना घर बर्बाद करने पर तुले हो?”
मान्या लगातार बोलती जा रही थी। वह रोना नहीं चाहती थी, लेकिन उसकी आंखों में आंसू तैरने लगे थे। वह रोहन के मुंह से माफी सुनना चाहती थी। वह चाहती थी कि रोहन घुटनों पर बैठकर कहे कि उससे गलती हो गई और वह किरण को हमेशा के लिए छोड़ देगा।
लेकिन इसके विपरीत, रोहन बिल्कुल शांत बैठा था। बल्कि, उसे देखकर ऐसा लग रहा था जैसे वह अपनी हंसी दबाने की कोशिश कर रहा हो। “तो…? अगर मैं किरण से बात करता हूँ तो इसमें इतना गुस्सा होने वाली क्या बात है?”
रोहन का यह ‘तो…?’ सुनकर मान्या सच में फटने की कगार पर पहुंच गई। उसके अंदर का ज्वालामुखी बस फूटने ही वाला था कि अचानक दरवाजे की घंटी बज उठी। टिंग-टोंग!
घंटी की आवाज से मान्या एक पल के लिए रुकी।
रोहन तुरंत सोफे से उछल पड़ा। “अरे! किरण आ गया! मैंने ही उसे आज नाश्ते पर बुलाया था। वह कुछ जरूरी कागज भी लेकर आने वाला था।”
मान्या सन्न रह गई। रोहन की इतनी हिम्मत? उसने उस औरत को घर तक बुला लिया? और वह भी रविवार की सुबह नाश्ते पर? मान्या ने अपनी मुट्ठियां भींच लीं। उसने मन ही मन तय कर लिया कि आज आर-पार की लड़ाई होगी। वह उस किरण नाम की औरत के बाल नोच लेगी और उसे धक्के मारकर घर से बाहर निकाल देगी। बिना उसकी तरफ देखे, मान्या दरवाजे की तरफ घूरती रही, जहां से रोहन दरवाजा खोलने जा रहा था।
“आओ यार किरण, आओ! तुम्हारा ही तो इंतजार कर रहा था मैं कब से!” रोहन ने उत्साह से दरवाजा खोलते हुए कहा।
मान्या ने एक गहरी सांस ली, अपनी साड़ी का पल्लू कमर में खोंसा और शेरनी की तरह ड्राइंग रूम की तरफ बढ़ी। आज वह उस किरण का ऐसा स्वागत करेगी कि वह जिंदगी भर याद रखेगी।
लेकिन जैसे ही मान्या ड्राइंग रूम में पहुंची और उसकी नजर दरवाजे पर खड़े शख्स पर पड़ी, उसके कदम वहीं जम गए।
दरवाजे पर कोई आधुनिक, सुंदर, छरहरी औरत नहीं खड़ी थी। वहां एक छह फुट दो इंच लंबा, चौड़े कंधों वाला एक आदमी खड़ा था। उसने काले रंग की लेदर जैकेट पहन रखी थी, उसके सिर पर बाल कम थे लेकिन चेहरे पर एक घनी, लंबी और रौबदार दाढ़ी-मूंछ थी। उसके एक हाथ में मोटरसाइकिल का भारी हेलमेट था और दूसरे हाथ में एक फाइल। वह किसी भी एंगल से ‘औरत’ नहीं लग रहा था, बल्कि वह तो किसी एक्शन फिल्म का गुंडा या भारी-भरकम पहलवान लग रहा था।
“अरे रोहन मेरे भाई!” उस विशालकाय आदमी ने अपनी भारी और गूंजती हुई आवाज में कहा और रोहन को एक जोरदार गले लगा लिया, जिससे रोहन की हड्डियां कड़कड़ा उठीं।
मान्या अभी भी बुत बनी वहीं खड़ी थी। उसका मुंह आधा खुला हुआ था और आंखें फटी की फटी रह गई थीं।
रोहन ने उस आदमी से अलग होकर मान्या की तरफ देखा और बोला, “मान्या , मैं तुम्हें बताना भूल गया था। यह किरण कुमार है। मेरे कॉलेज का सबसे जिगरी दोस्त। यह पिछले दस सालों से दुबई में था और अब इंडिया वापस शिफ्ट हो गया है। हम दोनों मिलकर एक नया बिजनेस शुरू करने वाले हैं, उसी के प्रोजेक्ट और कागजातों को लेकर हम पिछले एक महीने से लगातार चर्चा कर रहे थे। मैंने सोचा था कि जब सब कुछ फाइनल हो जाएगा, तब तुम्हें सरप्राइज दूंगा।”
किरण कुमार ने मान्या की तरफ देखा, अपने चेहरे पर एक बेहद सौम्य और संकोची मुस्कान लाते हुए दोनों हाथ जोड़े और बहुत ही सम्मानजनक स्वर में बोला, “नमस्ते भाभी जी! रोहन ने आपके और आरव के बारे में बहुत कुछ बताया है। मुझे माफ कीजिएगा अगर मेरे और रोहन के इस नए प्रोजेक्ट की वजह से आपको घर में कोई परेशानी हुई हो। हम दोनों फोन पर बहुत ज्यादा समय बिता रहे थे।”
मान्या की समझ में नहीं आ रहा था कि वह क्या करे। एक तरफ उसके अंदर का उबलता हुआ गुस्सा था, और दूसरी तरफ यह भयानक शर्मिंदगी, जिसने उसे पानी-पानी कर दिया था। उसने जिस ‘किरण’ को चुड़ैल, सौतन और घर तोड़ने वाली मानकर पूरी महाभारत रचने की तैयारी कर ली थी, वह असल में एक छह फुट का दाढ़ी वाला इंसान निकला!
मान्या का चेहरा लाल हो गया। उसने तुरंत अपनी नजरें झुका लीं और हड़बड़ाहट में सिर्फ इतना ही कह पाई, “न.. नमस्ते भइया जी।”
वह एक पल भी वहां और नहीं रुकना चाहती थी। रोहन की वो शरारती मुस्कान अब उसे समझ में आ रही थी। रोहन जानबूझकर मजे ले रहा था क्योंकि वह समझ गया था कि मान्या क्या सोच रही है। मान्या तुरंत मुड़ी और लगभग दौड़ते हुए रसोई की तरफ भाग गई।
अब उसे इस विशालकाय किरण कुमार भइया जी के लिए अपने हाथों से चाय, पोहा और पकौड़े जो बनाने थे। रसोई में जाकर उसने गहरी सांस ली, अपने माथे पर आया पसीना पोंछा और खुद की ही बेवकूफी पर धीरे-धीरे मुस्कुराने लगी। आज के बाद वह कभी किसी नाम के आधार पर कोई राय नहीं बनाएगी, यह उसने मन ही मन पक्का कर लिया था।
अगर इस कहानी ने आपके दिल को छुआ तो तो लाइक, कमेंट और शेयर करें अगर इस पेज पर पहली बार आए हैं तो ऐसे ही मार्मिक कहानियाँ पढ़ने के लिए पेज को फ़ॉलो करें , धन्यवाद