फर्क बस यहीं हो जाता है – रोनिता कुंडू
वेदिका, कहां रह गई तुम? इतने कामों में एक काम तुम्हें ढूंढना भी रहता है, वेदिका..! वेदिका..! अनुज चिल्लाते हुए घर के हर एक कमरे में आवाज़ लगा रहा था। तभी अनुज की मां अर्चना जी पूछती है, मिली क्या वेदिका? हे भगवान, बहू के बिना तो सभी के आंखों के आगे अंधेरा ही छा … Read more