कैदी नंबर 214 – गीता वाधवानी
लगभग 22 वर्षीय पंकज को पुलिस इंस्पेक्टर सलाखों के पीछे धकेल कर चला गया। पंकज गिरते गिरते बचा और वहीं कोने में बैठकर अपने घुटनों में मुंह छुपा कर रोने लगा। तब इसी कोठरी में बंद 35-36 वर्षीय मनोज ने उसके कंधे को प्यार से सहलाते हुए पूछा- क्या हुआ भाई,इतना क्यों रो रहे हो? … Read more