साथ का रिश्ता – शुभ्रा बैनर्जी
हां सास है वे मेरी,मां नहीं।बहू हूं मैं पर बेटी नहीं।ना उन्होंने मुझे जन्म दिया,ना मैं उनकी गोद में खेली।आज पैंतीस सालों से लगातार साथ रहते-रहते हम ,सास-बहू के बीच एक अनोखा रिश्ता बन चुका है।यह रिश्तों का बंधन दुनिया को समझ नहीं आता,क्योंकि यह खून का नहीं। पैंतीस साल पहले इस घर में अपने … Read more