मैं विहान की पत्नी बाद में हूँ, आपकी बेटी पहले हूँ – रमा शुक्ला

शारदा के हाथों में आज भी जब वह पुरानी तस्वीर आती, तो उसकी आँखें अपने आप छलक उठती थीं। तस्वीर में वह अपने पति रमेश के साथ खड़ी थी, और उसकी गोद में छह महीने का नन्हा विहान था। शादी के महज तीन साल बाद ही एक सड़क दुर्घटना ने रमेश को हमेशा के लिए … Read more

जिस रिश्ते में सम्मान और भरोसा न हो… – निधि गुप्ता

शादी के शुरुआती दिन किसी खूबसूरत ख्वाब की तरह होते हैं, लेकिन रोहन और निध‍ि के लिए यह ख्वाब बहुत जल्दी एक डरावनी हकीकत में बदलने लगा था। दोनों ने एक-दूसरे को पसंद करके शादी की थी। निध‍ि एक मल्टीनेशनल कंपनी में एचआर मैनेजर थी—आत्मविश्वासी, बेबाक और अपने उसूलों पर जीने वाली लड़की। रोहन एक … Read more

मैं बेटे की खुशियां उसे वापस लौटाऊँगी – नेहा पटेल  

कमरे में पसरा घना सन्नाटा और उस सन्नाटे को चीरती हुई घड़ी की टिक-टिक। सुलोचना जी ने कांपते हाथों से खाने की थाली मेज पर रखी। पिछले एक महीने से उनके घर का यही दृश्य था। उनका इकलौता बेटा रोहन, जो कभी पूरे घर में अपनी हंसी और चुलबुलेपन से रौनक ला देता था, आज … Read more

इस पापी माँ को माफ कर दे – सीमा श्रीवास्तव

सुमित्रा जी के जीवन का एकमात्र सहारा उनका इकलौता बेटा अंशुल था। पति के कम उम्र में ही गुजर जाने के बाद, सुमित्रा जी ने अपना पूरा जीवन अंशुल को एक अच्छा इंसान और एक सफल व्यक्ति बनाने में लगा दिया था। अंशुल भी अपनी माँ से बहुत प्यार करता था और उनकी हर छोटी-बड़ी … Read more

कुलकलंकिनी

राधिका के मुंह से ‘हिस्से’ का नाम सुनते ही घर का माहौल एकदम से बदल गया। जो पिता कुछ देर पहले बेटी के आंसुओं पर पिघल रहा था, उसकी आंखें अचानक कठोर हो गईं। भाई विकास, जो बचपन में राधिका के लिए किसी से भी लड़ जाता था, आज उसी राधिका पर गरजने लगा। उसने … Read more

समर्पण – खुशी

राधा एक गरीब घर की बच्ची थी। मां लोगों के घरों में बर्तन मांजती थी और पिताजी रिक्शा चलाते थे।राधा मां के साथ लोगो के घर जाती थी। यूही कोई 5 साल की होगी वो लोग भी उसे मां के साथ कोई छोटा मोटा काम बता देते। पर राधा पढ़ना चाहती थीं जब वो बच्चों … Read more

संस्कार – खुशी

कविता एक भरे पूरे परिवार की बेटी थी। मास्टर्स किया हुआ था।परिवार में पिताजी  राम कुमार जो पेशे से एक व्यवसाई थे।उनका डिस्पोजेबल का बिजनेस था।दो भाई नितिन और सचिन भी पिताजी का कारोबार देखते थे। उनकी पत्नियां सुमन और  विजया उनके दो दो बच्चे बड़े भाई के दो बेटे राहुल और संजय और छोटे … Read more

रिश्तो की कीमत – मधु वशिष्ठ

गांव में जाने के बाद ही पता चला कि मां काफी समय से बीमार है। खटिया पर लेटी हुई भाभी के कहने पर भी मां विश्वास नहीं कर पा रही थी कि सीमा और मैं वास्तव में उनसे मिलने ही आए हैं। काफी कमजोर हो गई थी मां। अब उसका पूरा चेहरा झुर्रियों से भरा … Read more

भरोसा – मंजू ओमर

ये क्या दीदी ये कैसा व्यवहार करते है आप लोग ज्योति के साथ। मैंने तो आपको और आपके व्यवहार को देखकर आपके बेटे पंकज के लिए ज्योति का रिश्ता दिया था। मुझे नहीं पता था आप मेरे भरोसे को इस तरह तोड देंगी। वो तो मै न आती आपके घर तो मुझे पता ही न … Read more

बेटी यह तुम्हारे संस्कारों की परिक्षा है। – परमा दत्त झा

मां जीजाजी,-इससे आगे ट्विंकल बोल नहीं पाई और रोने लगी। क्या हुआ क्या किया रोहित ने?-मां ने आशंकित होकर पूछा। वे मेरे साथ अजीब व्यवहार करते हैं,माना कि मैं उनकी साली हूं मगर इसका क्या मतलब?-वह अपनी बात मां के सामने रखी। अच्छा,ऐसी बात है मां सब बातें समझ गयी।यह समस्या सुलझाना जरूरी है। मां … Read more

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