रिश्ते पैसों से नहीं संस्कार से चलते हैं

रघुनाथ जी और गीता जी के घर में इन दिनों उल्लास और चिंता का मिला-जुला माहौल था। उनकी इकलौती और लाड़ली बेटी मीरा की शादी शहर के एक बहुत बड़े और प्रतिष्ठित कारोबारी परिवार में तय हुई थी। लड़के का नाम आकाश था, जो अपने पिता महेंद्र जी का कारोबार संभालता था। महेंद्र जी और … Read more

रिश्तों की जमा पूँजी – सुनीता सोलंकी ‘मीना’

ब्रह्मसिंह की बैंक की पासबुक में छपी आखिरी एंट्री  — ₹2,847/-  थी । ब्रह्मसिंह  जी ने चश्मा उतारकर मेज़ पर रखा। 72 साल की उम्र में बैंक बैलेंस से ज़्यादा ज़रूरी था उनके जीवन में  ‘लोगों का बैलेंस’। पर आज उसे वही खाली लग रहा था।  पेंशन से ही उसका घर चलता था, दवाइयाँ निकल … Read more

वो अनकही लकीर

उनके गालों पर एक आँसू लुढ़क आया था। यह आँसू इस बात का नहीं था कि उन्हें खाने के लिए फल नहीं मिले। दर्द की चुभन उन फलों की कमी की नहीं थी। पीड़ा तो इस बात की थी कि वह घर, जिसे उन्होंने अपनी जवानी के खून-पसीने से सींचा था, आज उसी घर में … Read more

संस्कार

शहर के एक शांत पार्क के कोने में बैठी अंजलि की आँखों से आँसू थमने का नाम नहीं ले रहे थे। उसके घर में आज सुबह ही एक बहुत बड़ा बखेड़ा खड़ा हुआ था। अंजलि के बड़े भाई और घर की बागडोर सँभालने वाली उसकी बड़ी भाभी ने उसका रिश्ता किसी और रसूखदार परिवार में … Read more

 मूहूर्त 

यह सुनते ही पूरे घर में सन्नाटा छा गया। जो मेहमान कुछ देर पहले तक ताने मार रहे थे, उनकी आँखें शर्म से झुक गईं। सुशीला देवी का सारा गुस्सा, सारा घमंड जैसे किसी बर्फ की तरह पिघल गया। उनके पैरों तले से ज़मीन खिसक गई कि वह किन महान लोगों को बुरा-भला कह रही … Read more

*भाई, मैं तेरी तरह स्वार्थी नहीं हूं* – तोषिका

“आज क्या बनाया है खाने में आपने मां?” पीछे से गले लगकर तारा ने अपनी मां सुषमा से पूछा।” तेरी मनपसंद कड़ी बनाई है, जल्दी से हाथ मुंह धो ले, मैं खाना गरम कर देती हू।” उधर तारा हाथ मुंह धो कर आई और खाना खाने बैठी और सुषमा से पूछा कि “मां, ये भाई … Read more

अनकहे जज़्बात

“तुम्हें बस अपनी माँ की फिक्र है! उन्होंने सुबह दलिया खाया या नहीं, उनकी बीपी की गोली खत्म तो नहीं हो गई, उनके घुटनों का दर्द कैसा है… बस यही सब चलता रहता है तुम्हारे दिमाग में! मेरी तो रत्ती भर भी चिंता नहीं है तुम्हें। मैं सुबह से भूखी-प्यासी ऑफिस के काम में उलझी … Read more

अनकहा प्यार

रागिनी ने गुस्से से अपने कमरे का दरवाज़ा बंद किया और बिस्तर पर धम्म से बैठ गई। उसकी आँखों में आँसू थे और मन में एक ही बात बार-बार गूँज रही थी— “आखिर मैं इस घर में अपनी मर्जी से साँस भी क्यों नहीं ले सकती?” शादी से पहले उसकी सहेलियों ने उसे चेताया था … Read more

सुकून के आँसू

“हां, तुम्हारी मम्मी तो महान है, सब कुछ कर लेती है, तुम तो उनके गुणगान करोगे ही, पर कान खोलकर सुन लो, मैं कोई मशीन नहीं हूँ!” शिखा के हाथों से सब्जियों की टोकरी स्लैब पर जोर से गिरी और उसकी आँखों से आंसुओं का बांध टूट पड़ा।  रसोई में पसरा सन्नाटा इस बात का … Read more

दो परिवारों की इज्जत

कॉलेज की कैंटीन के उस शांत कोने में आज एक अजीब सी बेचैनी थी। मेज के दोनों तरफ बैठे शिवानी और विकास के बीच पिछले दस मिनट से कोई बात नहीं हुई थी। शिवानी की आँखें सूजी हुई थीं और वह लगातार अपने दुपट्टे के छोर को उंगलियों में लपेट रही थी। विकास ने गहरी … Read more

error: Content is protected !!