पहली बारिश और वो अजनबी सा अपनापन

कमरे के अंदर बैठी स्नेहा अपने कपड़ों को सूटकेस में सहेज रही थी, लेकिन उसकी नज़रें बार-बार खिड़की के बाहर गिरती बारिश की बूंदों पर जा टिकती थीं। उसकी शादी को अभी महज़ चार महीने ही हुए थे। शादी के बाद यह उसका पहला सावन था और मायके जाने की खुशी उसके चेहरे पर साफ … Read more

स्मृतियों की वसीयत

वैदेही की आंखें आंसुओं से सूज चुकी थीं और उसका सिर अपनी छाती तक झुका हुआ था। सामने बाबूजी क्रोध से कांप रहे थे। “तूने सोच भी कैसे लिया कि इस घर की बेटी उस साधारण से मास्टर के बेटे के साथ अपना जीवन बिताएगी? हमारी और उनके परिवार की जो पीढ़ियों पुरानी खटास है, … Read more

आँगन की वो गौरैया

यह सुनकर मेरे पैरों तले ज़मीन खिसक गई। मेरा बाल-मन इस बात को स्वीकार ही नहीं कर पा रहा था कि मौसी मुझे छोड़कर हमेशा के लिए कहीं और रहने जा रही हैं। अगर शादी का मतलब बिछड़ना होता है, तो फिर शादी करनी ही क्यों? मैं दौड़कर मौसी के पास जाना चाहता था, उन्हें … Read more

ज़िंदगी का असली सुकून

अचानक काव्या के मन का सारा मलाल, सारा गुस्सा और सारी मायूसी एक झटके में कहीं बह गई। उसे लगा जैसे किसी ने उसके तपते हुए मन पर सुकून की ठंडी फुहार डाल दी हो। जिस नौकरी को वह कुछ घंटों पहले एक बोझ समझ रही थी, आज उसी ने उसे वो खुशी दी थी … Read more

अपनों के आँसू

सुमित के ये शब्द मेरे कानों में सीसे की तरह पिघल कर गिर रहे थे। मैं कुछ जवाब देने ही वाला था कि तभी फ्लैट की घंटी बजी। सुमित ने उठकर दरवाज़ा खोला। मैं भी उसके पीछे-पीछे हॉल में आ गया। शिखा भी किचन से बाहर आ गई थी। दरवाज़े पर जो शख्स खड़ा था, … Read more

रेत के निशानों पर हौसले की उड़ान

गौरी, उम्र यही कोई पंद्रह बरस की रही होगी, लेकिन उसकी आँखों में एक ऐसी गहरी समझ थी जो उम्र से बहुत पहले आ जाती है। राजस्थानी गाँव के उस रूखे और रेतीले माहौल में भी वह किसी खिले हुए पलाश के फूल जैसी लगती थी। साँवला सलोना रंग, बड़ी-बड़ी कजरारी आँखें, और हवा में … Read more

फासलों के बीच सिमटती दुनिया

  बरामदे में रखी आराम कुर्सी पर बैठे माधव जी के हाथों में उनका टैबलेट था और उनके चेहरे पर एक सौम्य मुस्कान तैर रही थी। पास ही बैठी उनकी पत्नी, सुमित्रा, अपने फोन पर किसी को अपनी नई बुनाई का डिजाइन समझा रही थीं। जो भी उन्हें बाहर से देखता, उसे यही लगता कि उम्र … Read more

एक अधूरी विदाई

यह सुनकर काव्या के आंसू छलक पड़े थे। यह खुशी के आंसू थे। बारह सालों की तपस्या पूरी होने वाली थी। कल रात भर वह सोई नहीं। उसने पूरा घर साफ किया, विवान की पसंद का गाजर का हलवा बनाया और अपनी उस लाल साड़ी को निकालकर इस्त्री किया जो विवान को बहुत पसंद थी। … Read more

मायके की दहलीज

“मम्मी, वो जो बनारसी सिल्क की साड़ी आपने दिखाई थी, वही भिजवाना मेरे लिए। और हाँ, काजू-बादाम, पिस्ता के साथ वो इंपोर्टेड चॉकलेट्स का बड़ा वाला पैक भी रख देना। मेरी जेठानी के मायके से बहुत भारी सामान आया है इस बार दिवाली पर। उनके रिश्तेदारों के सामने मेरा इम्प्रेशन डाउन नहीं होना चाहिए। आपको … Read more

वक्त का पहिया

 पार्वती ने यह सुनकर एक पल के लिए आसमान की तरफ देखा और सुकून से मुस्कुराती हुई बोली, “ईश्वर की माया भी कितनी अजीब है न! जो अपनी रफ्तार और मशीन पर इतना इतरा रहा था, वो आज पैदल हो गया। और हम, जो सोच रहे थे कि हमारी जिंदगी अब खत्म हो गई, भगवान … Read more

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