बड़ी बहू होना सम्मान है अधिकार नहीं – सीमा सिंघी

शुभ्रा मैंने तुमसे कितनी बार कहा है । जब भी रसोई में काम करती हो तो पूरा निपटा के ही रसोई से निकला करो। मैं जब भी रसोई में आती हूं तो मुझे रसोई बिखरी हुई ही मिलती है।  न जाने तुम कौन सी दुनिया में खोई रहती हो। जो तुम्हारा काम खत्म होता ही … Read more

माता-पिता को सिर्फ रोटी और छत नहीं, प्यार और सम्मान चाहिए… – अर्चना खंडेलवाल

रमा और गोविंद जी भीतर ही भीतर घुट रहे थे, लेकिन उनकी घुटन से नेहा बिल्कुल बेखबर थी। उसे बस यही भरोसा था कि अब सास-ससुर उसके खिलाफ कोई फैसला नहीं ले सकते, क्योंकि बैंक खाते और प्रॉपर्टी के कागज़ उसी की पकड़ में थे। उसके लिए पैसा ताकत था—और ताकत के आगे रिश्ते अक्सर … Read more

रिश्ते अधिकार से नहीं, करुणा से चलते – सिम्मी मल्होत्रा

सविता की तबीयत दिन-ब-दिन अधिक बिगड़ने लगी थी। वह कई दिनों से बस एक ही बात दोहराती रहती—“मेरी बिटिया को देखना है… एक बार उसे देख लूं… बस एक बार।” उस दिन दोपहर के वक्त फोन बजा। नंबर मायके का था। दिल धक से रह गया, लेकिन जैसे ही मैंने रिसीवर उठाया, उधर से भाई … Read more

अहमियत – गरिमा चौधरी 

“तुम दोनों की शक्ल देखकर लग रहा है, बात कुछ बिगड़ी है,” आंगन में तुलसी को पानी देते-देते शारदा देवी की आवाज़ आई। उनकी उम्र अस्सी के आसपास थी, पर आँखों में वही चमक और शब्दों में वही वजन। पास ही बैठी बहू कृति रोटी सेंक रही थी और दामाद-पोती की जोड़ी—नव्या और आर्यन—चुपचाप एक-दूसरे … Read more

एक रिश्ता ऐसा भी – मधु वशिष्ठ

दादी की आवाज जोर-जोर से आ रही थी वह चाची से बात कर रही थी और कह रही थी अरे काहे को अभी से बिटिया के लिए वर ढूंढे है, छोरी को पढने दो और फिर बिट्टो वाले मेहमान जैसा ही कोई लड़का देख लियो।” “क्याआआआआ? दादी ऐसा बोल रही है?” नाचती हुई बिट्टो रुक … Read more

एक रिश्ता ऐसा भी – बबीता झा

आज मैं जब अस्पताल से आ रही थी तो अंदर एक सुकून सा एहसास हो रहा था। आज मैं एक ऐसी शख्स मिली जो मेरा पेशेंट नहीं था, मेरा कोई अपना भी नहीं था, लेकिन पता नहीं क्यों आज उसको देखकर अजीब सी खुशी मिल रही थी।   घर पहुंची तो अजय ने कहा, “दीपा, कितनी … Read more

सम्मान को अधिकार ना समझे। – लतिका पल्लवी

  जाड़े के दिन थे। कड़ाके की ठंड पर रही थी। 1से 5तक की कक्षा विद्यालय नें स्थगित कर दिया था पर 6 से 12 की पढ़ाई चल रही थी। विद्यालय सात बजे की जगह नव बजे से खुलता था पर बच्चों को जाना पड़ता था और जब बच्चे विद्यालय जाएंगे तो उनके खाने के लिए … Read more

घर बचाना है तो अहंकार छोटा कर बहू – नीलम गुप्ता 

निखिल ने निशा को एक शादी में देखा था लंबी छर हरी सांवली सलोनी निशा की बड़ी-बड़ी शर्मीली आंखों ने उसे जैसे सम्मोहित कर लिया। पूरे समय वह उसे ही देखता रहा और अवसर पाते ही बोला -हेलो मिस ब्यूटीफुल ! क्या मैं आपका नाम जान सकता हूं? निशा ने हैरानी से उसे देखा और … Read more

बड़ी बहु – खुशी

मोहन और प्रमिला दोनों एक ही कॉलेज में पढ़ते थे।दोनो ने ही बैंक की परीक्षा दी और दोनों की नियुक्ति भी हो गई। समान बिरादरी तो विवाह में भी अड़चन नहीं आई।प्रमिला और मोहन दोनो ही शांत व्यक्तित्व के मालिक थे।किसी से तू तू मैं मैं नहीं।चार साल विवाह के बाद वो बनारस रहे और … Read more

वसीयत – शिप्पी नारंग 

“वो भी बिना हमारी मर्जी जाने…!”ड्रॉइंग रूम में खड़े हर व्यक्ति के चेहरे पर अलग रंग था—कहीं झुंझलाहट, कहीं घबराहट, कहीं बनावटी मासूमियत। लेकिन सबसे स्थिर चेहरा था माधवी का, जो चुपचाप अपने ससुर विनोद के पास खड़ी थी। उसकी हथेलियाँ पसीने से भीग रही थीं, फिर भी उसने आंखें नीचे नहीं कीं। आज पहली … Read more

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