रेशम की साड़ी – लीनू अहलूवालिया

मैं घर की सबसे छोटी बेटी थी। उस समय मेरी उम्र लगभग नौ वर्ष थी। पिताजी को गुज़रे चार वर्ष हो चुके थे। उनके जाने के बाद माँ ने अकेले ही हम बहनों का पालन-पोषण किया। आर्थिक तंगी थी, जीवन संघर्षों से भरा था, फिर भी माँ ने कभी हमें प्रेम, संस्कार और आत्मसम्मान की … Read more

कलंकिनी या जीवन दायिनी – शिव कुमारी शुक्ला

दीप्ति सात साल की मासूम बच्ची हतप्रभ खडी थी।उसे समझ में नहीं आ रहा था कि एकाएक उसके घर में लोगों का आना-जाना क्यों शुरू हो गया। मम्मी पापा अभी कुछ समय पहले ही घर से गये थे कुछ काम करने के लिए उसे मैड के पास छोड़ कर। फिर ये पड़ोसी अंकल घबराए से … Read more

रिश्तो की जमा पूंजी – सीमा सिंघी

मम्मी जी जब आपका मन क्रोधित होता है तो उस वक्त आप मुझे कुछ भी सुनाने से पीछे नहीं हटती है। यह घर आपका है उतना ही मेरा भी है ।जब आप मुझे प्यार नहीं दे पा रही हो तो मुझसे आप सम्मान की उम्मीद कैसे कर सकती है  मैं आपकी जितनी अनुभवी तो नहीं … Read more

कब तक आत्म सम्मान खोकर जिएगी – सीमा सिघी

अरे सौम्या यह बिखरी हुई रसोई तुमने अब तक समेटी नहीं??? मैं तुमसे कितनी बार कहा है… मुझे सफाई पसंद है। मुझे इस तरह बिखरी हुई रसोई बिल्कुल अच्छी नहीं लगती है। तुम सब जानती हो…फिर भी तुम इन्हें अधूरा छोड़कर कमरे में चली गई कहते हुए निर्मला जी सौम्या के बिल्कुल करीब आकर खड़ी … Read more

सिल्क की साड़ी – सीमा सिंघी

मम्मी मैं सुबह से देख रही हूं । आप आते-जाते इस अलमीरा में कुछ ढूंढ रही हैं। अगर मुझे भी पता चले तो,मैं शायद कोई आपकी मदद कर दूं कहते हुए नीति ने मेरे गले में अपनी बाहें डाल दी। नीति को इस तरह पूछते देखकर मैं भी मुस्कुरा कर कहने लगी।  नीति मैं वह … Read more

रेशम की खुशबू – लक्ष्मी कानोडिया

अलमारी का सबसे ऊपर वाला खाना खोलते ही मीरा के हाथ ठिठक गए। सामने हल्के आसमानी रंग की बनारसी सिल्क साड़ी बड़े करीने से रखी थी। उसने साड़ी को धीरे से बाहर निकाला और हथेलियों पर फैला लिया। रेशम की मुलायम चमक जैसे वर्षों पुरानी यादों को फिर से जीवंत कर गई। “मम्मी, आप फिर … Read more

 रिश्ते चलते हैं बराबरी से

मीरा के हाथों में वह कागज का टुकड़ा बुरी तरह से कांप रहा था। वह कोई मामूली कागज नहीं था, बल्कि समीर की कंपनी से आया हुआ ‘रिलीविंग लेटर’ था। कमरे में पसरा सन्नाटा इतना गहरा था कि मीरा को अपनी ही धड़कनें सुनाई दे रही थीं। सामने पलंग पर बैठा समीर नजरें झुकाए अपने … Read more

सिल्क की साड़ी – डॉ बीना कुण्डलिया

अनु ओ अनु अरे कहां है बिटिया अनु की दादी माँ लगातार पुकारे जा रहीं थीं और अनु का कहीं अता-पता नहीं, तभी उसके दादाजी आवाज सुनकर कमरे में प्रवेश करते हुए कहते हैं अरी भाग्यवती “क्यों चिल्ला रही बच्ची पर “? चैन से रहने दे उसे पल दो पल । दादी बोलीं चिल्ला नहीं … Read more

रिश्ते पैसे से नहीं संस्कार से निभते है – मंजू ओमर

रश्मि यह लो ₹10000 रूपये  कल तुम्हारी एनिवर्सरी है ना जो  चाहे खरीद लो और जहां चाहे पार्टी करना अपनी सहेलियों के साथ खूब मस्ती करना और इंजॉय करना विनय बोला। रूपये रश्मि के हाथ में रखता हुआ। , और तुम तुम नहीं इंजॉय करोगे तुम्हारी भी तो मैरिज एनिवर्सरी है मेरी अकेली की तो … Read more

जली हुई सिल्क की साड़ी

 हंसता खेलता एक खुशहाल परिवार। परिवार में अर्जुन की मां देविका जी, अर्जुन उसकी पत्नी आरती, 10 वर्षीय बेटा कबीर और 8 वर्षीय बेटी अक्षरा थे। अर्जुन की बहन तपस्या की शादी हो चुकी थी। वह अर्जुन से कुछ साल बड़ी थी।  परिवार में सभी एक दूसरे से बहुत प्यार करते थे। छोटी-छोटी खुशियों को  … Read more

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